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Yamuna Nagar News: अमान्य स्कूलों के बच्चों के भविष्य पर लटकी तलवार
Wed, 08 Oct 2025 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 08 Oct 2025 12:42 AM IST
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जिला शिक्षा सदन। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। अमान्य स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर तलवार लटकी गई है। अगले साल इन विद्यार्थियों को किसी अन्य स्कूल में दाखिला नहीं मिलेगा। इन्हें दाखिला लेना होगा तो पिछली कक्षा में बैठना होगा। चूंकि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने जिले के 40 स्कूलों की स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र (एसएलसी) भी अमान्य कर दिया। ऐसे में विद्यार्थियों का एक साल खराब होना तय है।
जिले में 40 स्कूल बिना विभाग की अनुमति के चल रहे हैं। इन स्कूलों में करीब 15,000 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इन स्कूलों के पास बोर्ड व शिक्षा निदेशालय की अनुमति नहीं है। हरियाणा बोर्ड ने सत्र से पहले इनकी सूची जारी की थी। वहीं, निदेशालय ने इन स्कूलों में दाखिले न करने के आदेश दिए थे।
जिला विभाग की लापरवाही के कारण आदेश बेमानी हो गए। सभी स्कूलों ने नियमित कक्षाओं के दाखिले किए और कक्षाएं लगा रहे हैं। दाखिले के लिए स्कूल को शिक्षा निदेशालय के एमआईएस पोर्टल पर विद्यार्थी का डाटा अपलोड करना होता है। जो साल दर साल अपडेट किया जाता है।
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विभाग ने जिले के अमान्य स्कूलों के एमआईएस पोर्टल बंद कर दिए हैं। इसके बाद पोर्टल बंद होने वाले स्कूलों की सूची तैयार की जा रही है और सभी के दस्तावेज जांच के लिए मंगवाए हैं। विद्यार्थियों की शैक्षणिक योग्यता व विकास का इसमें पूरा ब्योरा होता है और इसके आधार पर ही विद्यार्थी का दाखिला मान्य माना जाता है। परंतु अब जब ऐसे स्कूलों का पोर्टल ही बंद हो गया है, तो सीधे तौर पर इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों के दाखिले भी खारिज हो गए हैं। इसने अब अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, चूंकि एक तरफ स्कूल उनसे हजारों रुपये फीस व दाखिले के रूप में ले चुके हैं।
अमान्य स्कूलों में नहीं रोके गए दाखिले
निदेशालय ने फरवरी में पत्र जारी कर आदेश दिए थे कि अमान्य स्कूलों में दाखिले न होने पाए यह अधिकारी सुनिश्चित करेंगे। परंतु जिला शिक्षा विभाग की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्कूलों ने ट्यूशन के साथ दाखिला फीस भी वसूली और धड़ल्ले से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बेचीं। परंतु विभाग ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। स्कूलों ने अभिभावकों को अंधेरे में रखा और स्वयं को स्थायी मान्यता प्राप्त संस्थान बताकर दाखिला किया। आठ महीने में विभाग ने ऐसे किसी स्कूल पर कार्रवाई करना तो दूर उसका निरीक्षण तक नहीं किया।
जिले के स्कूलों के दस्तावेज जांच जा रहे हैं। अमान्य स्कूलों की सूची तैयार की जा रही है, जो निदेशालय भेजी जाएगी। ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी। निदेशालय के आदेशों के बाद ऐसे स्कूलों पर ताला लगाया जाएगा।
प्रेमलता, जिला शिक्षा अधिकारी।
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जगाधरी। अमान्य स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के भविष्य पर तलवार लटकी गई है। अगले साल इन विद्यार्थियों को किसी अन्य स्कूल में दाखिला नहीं मिलेगा। इन्हें दाखिला लेना होगा तो पिछली कक्षा में बैठना होगा। चूंकि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने जिले के 40 स्कूलों की स्कूल छोड़ने के प्रमाणपत्र (एसएलसी) भी अमान्य कर दिया। ऐसे में विद्यार्थियों का एक साल खराब होना तय है।
जिले में 40 स्कूल बिना विभाग की अनुमति के चल रहे हैं। इन स्कूलों में करीब 15,000 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इन स्कूलों के पास बोर्ड व शिक्षा निदेशालय की अनुमति नहीं है। हरियाणा बोर्ड ने सत्र से पहले इनकी सूची जारी की थी। वहीं, निदेशालय ने इन स्कूलों में दाखिले न करने के आदेश दिए थे।
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जिला विभाग की लापरवाही के कारण आदेश बेमानी हो गए। सभी स्कूलों ने नियमित कक्षाओं के दाखिले किए और कक्षाएं लगा रहे हैं। दाखिले के लिए स्कूल को शिक्षा निदेशालय के एमआईएस पोर्टल पर विद्यार्थी का डाटा अपलोड करना होता है। जो साल दर साल अपडेट किया जाता है।
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विभाग ने जिले के अमान्य स्कूलों के एमआईएस पोर्टल बंद कर दिए हैं। इसके बाद पोर्टल बंद होने वाले स्कूलों की सूची तैयार की जा रही है और सभी के दस्तावेज जांच के लिए मंगवाए हैं। विद्यार्थियों की शैक्षणिक योग्यता व विकास का इसमें पूरा ब्योरा होता है और इसके आधार पर ही विद्यार्थी का दाखिला मान्य माना जाता है। परंतु अब जब ऐसे स्कूलों का पोर्टल ही बंद हो गया है, तो सीधे तौर पर इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों के दाखिले भी खारिज हो गए हैं। इसने अब अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, चूंकि एक तरफ स्कूल उनसे हजारों रुपये फीस व दाखिले के रूप में ले चुके हैं।
अमान्य स्कूलों में नहीं रोके गए दाखिले
निदेशालय ने फरवरी में पत्र जारी कर आदेश दिए थे कि अमान्य स्कूलों में दाखिले न होने पाए यह अधिकारी सुनिश्चित करेंगे। परंतु जिला शिक्षा विभाग की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्कूलों ने ट्यूशन के साथ दाखिला फीस भी वसूली और धड़ल्ले से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बेचीं। परंतु विभाग ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। स्कूलों ने अभिभावकों को अंधेरे में रखा और स्वयं को स्थायी मान्यता प्राप्त संस्थान बताकर दाखिला किया। आठ महीने में विभाग ने ऐसे किसी स्कूल पर कार्रवाई करना तो दूर उसका निरीक्षण तक नहीं किया।
जिले के स्कूलों के दस्तावेज जांच जा रहे हैं। अमान्य स्कूलों की सूची तैयार की जा रही है, जो निदेशालय भेजी जाएगी। ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी। निदेशालय के आदेशों के बाद ऐसे स्कूलों पर ताला लगाया जाएगा।
प्रेमलता, जिला शिक्षा अधिकारी।