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बाबा धारीमल के भंडारे में उमड़ा सर्वधर्म के लोगों की आस्था का सैलाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2022 01:42 AM IST
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The flood of faith of people of all religions gathered in Baba Dharimal's Bhandara
जठलाना। गांव खुर्दबन में स्थित बाबा धारीमल की समाधि पर रविवार को सर्वधर्म के लोगों की आस्था का सैलाब उमड़ा। मौका था बाबा धारीमल की समाधि पर रादौर क्षेत्र के सबसे बड़े भंडारे का। जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू-मुस्लिम व सिक्ख समाज के लोगों ने मिलकर भंडारे के आयोजन में अपना अपना योगदान दिया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने दिनभर बाबा धारीमल की समाधि पर माथा टेका। श्रद्धालुओं ने समाधि पर मन्नतें मांगी और प्रसाद चढ़ाया।
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बाबा धारीमल जी की समाधि पर चल रहे गुरु ग्रथ साहिब का पाठ व रामायण का पाठ रविवार को भोग लगने के साथ ही समाप्त हो गया। पिछले दो महीनों से समाधि पर गुुरुग्रंथ साहिब व रामायण का पाठ चल रहा था। रादौर क्षेत्र में बाबा धारीमल की एक मात्र ऐसी समाधि है, जहां गुरुग्रंथ साहिब व रामायण का पाठ एक ही स्थान पर किया जाता है। यह स्थान हिंदू, सिक्ख एकता की एक अनूठी मिसाल है। कार्यक्रम में पंजाब से भी सैकड़ों लोग विशेष रूप से पहुंचे थे। सिखों के अलावा भारी संख्या में हिंदू धर्म के लोगों की उनमें विशेष आस्था है।
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बाबा धारीमल लगभग 300 वर्ष पहले रादौर में रेस्ट हाउस के पास की जगह में अपने चाचा के साथ तपस्या किया करते थे। उस समय खुर्दबन, धनौरा, पोटली, ठसका आदि गांव के आसपास घने जंगल थे। जिनमें खूंखार जानवरों का आतंक था। जिससे ग्रामीण भयभीत रहते थे। तब गांव के लोग बाबा धारीमल को रादौर से गांव खुर्दबन लेकर आए। बाबा धारीमल ने पश्चिमी यमुना नहर के किनारे तपस्या करनी शुरू की। लोगों का ऐसा मानना है कि बाबा धारीमल की तपस्या के चलते आसपास के जंगलों से खूंखार जानवर गायब हो गए। ग्रामीणों ने बताया कि मान्यता है कि बाबा धारीमल की तपस्या के कारण इन गांवों में सांप के काटने का असर नहीं होता है। बाबा धारीमल की समाधि पर गांव के लोग शुभ कार्य करने पर प्रसाद चढ़ाने पहुंचते हैं। बाबा धारीमल की समाधि के परिसर में बने कमरे में बाबा जी का कमंडल व मिट्टी का बर्तन सैकड़ों वर्षो बाद भी सुरक्षित रखा हुआ है।
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