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Yamuna Nagar News: तकनीकी खामियों का बहाना नहीं चलेगा, बीमा कंपनी करे भुगतान

Fri, 27 Feb 2026 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Fri, 27 Feb 2026 01:04 AM IST
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The excuse of technical flaws will not be accepted, the insurance company should make the payment
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग कार्यालय। आर्काइव - फोटो : जिला अस्पताल में भर्ती घायल करन।
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। स्वास्थ्य बीमा क्लेम को दस्तावेजों में कथित तकनीकी खामियों के आधार पर खारिज करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, यमुनानगर ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को शिकायतकर्ता का 56,257 रुपये का क्लेम 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करने और मानसिक उत्पीड़न और वाद खर्च के लिए 11 हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया है।
मामले के अनुसार करनाल जिले के गांव फूसगढ़ निवासी सचिन कुमार ने स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ले रखी थी, जो 21 जुलाई 2022 से 20 जुलाई 2023 तक प्रभावी थी। पॉलिसी अवधि के दौरान उनकी पत्नी रीना कंबोज को ट्रांजिएंट इस्कीमिक अटैक (टीआईए) की समस्या हुई। 18 जनवरी 2023 को उन्हें करनाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और 21 जनवरी तक उपचार चला। इलाज व दवाइयों पर कुल 56,257 रुपये खर्च हुए। इसके बाद कंपनी के पास प्रतिपूर्ति के लिए दावा प्रस्तुत किया गया, लेकिन कंपनी नेभुगतान से इनकार कर दिया।दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने बिना ठोस आधार के वास्तविक क्लेम को खारिज किया। आदेश में कहा गया कि अस्पताल या फार्मेसी के रिकॉर्ड में किसी प्रकार की कमी या लिपिकीय त्रुटि होने पर उसका दंड उपभोक्ता को नहीं दिया जा सकता, क्योंकि अस्पताल के रिकॉर्ड पर उसका कोई नियंत्रणनहीं होता
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आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी ने यह नहीं बताया कि मरीज को कोई पूर्व रोग था, इसलिए क्लेम अस्वीकार करने का आधार उचित नहीं है। आयोग के अध्यक्ष राजबीर सिंह व सदस्य जसविंद्र सिंह और सुमन राणा की पीठ ने शिकायत स्वीकार करते हुए कंपनी को निर्देश दिए कि 45 दिनों के भीतर 56,257 रुपये की राशि 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे।
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तय अवधि में भुगतान न करने पर यह राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ देय होगी। साथ ही 11 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न व वाद व्यय के रूप में भी देने होंगे। आदेश पर अमल न होने पर कंपनी पर कार्रवाई की जाएगी।
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