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Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को दिया भक्ति और आत्मचिंतन का संदेश
Tue, 10 Feb 2026 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 10 Feb 2026 12:38 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। महाशिवरात्रि महोत्सव के तहत जठलाना रोड स्थित श्री हाटकेश्वर नाथ महादेव एवं श्री शाकुंभरी देवी मंदिर में चल रही वार्षिक संगीतमय शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा वाचक आचार्य सचिन कौशिक ने षश्रद्धालुओं को भक्ति और आत्मचिंतन का संदेश दिया।
कथा का शुभारंभ पुजारी ब्रह्मनाथ नागर की अगुवाई में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इसके पश्चात आचार्य सचिन कौशिक ने नारद मोह प्रसंग के माध्यम से बताया कि अहंकार और मोह किस प्रकार व्यक्ति को अपने मार्ग से भटका देते हैं। देवर्षि नारद जैसे महान तपस्वी भी जब मोह के प्रभाव में आए, तो उन्हें भी कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ा। इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि संसार में कोई भी मोह से अछूता नहीं है और केवल भगवान शिव की भक्ति ही मनुष्य को सच्चे मार्ग पर ले जाती है।
आचार्य कौशिक ने बताया कि भगवान शिव की इच्छा से पंचतत्वों की उत्पत्ति हुई और ब्रह्मा, विष्णु व महेश के माध्यम से सृष्टि का संचालन प्रारंभ हुआ। शिव ही सृष्टि के मूल आधार हैं और उन्हीं से जीवन का संचार होता है। सृष्टि वर्णन के दौरान गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया।
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यमुनानगर। महाशिवरात्रि महोत्सव के तहत जठलाना रोड स्थित श्री हाटकेश्वर नाथ महादेव एवं श्री शाकुंभरी देवी मंदिर में चल रही वार्षिक संगीतमय शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा वाचक आचार्य सचिन कौशिक ने षश्रद्धालुओं को भक्ति और आत्मचिंतन का संदेश दिया।
कथा का शुभारंभ पुजारी ब्रह्मनाथ नागर की अगुवाई में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इसके पश्चात आचार्य सचिन कौशिक ने नारद मोह प्रसंग के माध्यम से बताया कि अहंकार और मोह किस प्रकार व्यक्ति को अपने मार्ग से भटका देते हैं। देवर्षि नारद जैसे महान तपस्वी भी जब मोह के प्रभाव में आए, तो उन्हें भी कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ा। इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि संसार में कोई भी मोह से अछूता नहीं है और केवल भगवान शिव की भक्ति ही मनुष्य को सच्चे मार्ग पर ले जाती है।
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आचार्य कौशिक ने बताया कि भगवान शिव की इच्छा से पंचतत्वों की उत्पत्ति हुई और ब्रह्मा, विष्णु व महेश के माध्यम से सृष्टि का संचालन प्रारंभ हुआ। शिव ही सृष्टि के मूल आधार हैं और उन्हीं से जीवन का संचार होता है। सृष्टि वर्णन के दौरान गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया।
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