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Yamuna Nagar News: लिपिकों ने भरी हुंकार, बोले, साड्डा हक ऐथे रख

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Aug 2023 01:23 AM IST
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The clerks roared, said, keep your honest rights here
जगाधरी। लिपिक सरकार से कोई नाजायज मांग नहीं कर रहे हैं। 35400 लिपिकों का हक है, जिसके लिए वे 28 दिन से संघर्ष कर रहे हैं। परंतु सरकार सब कुछ जानते मानते हुए भी लिपिकों को उनका हक देने को राजी नहीं है। एक तरफ सरकार लिपिकों की हड़ताल से सभी विभागों का काम ठप होने व पांच हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात कह रही है। वहीं दूसरी तरफ लिपिकों को केवल रिकॉर्ड कीपिंग व डायरी डिस्पैच बता रही है।
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जब लिपिकों का काम केवल रिकॉर्ड कीपिंग व डायरी डिस्पैच है तो कार्यालय में कामकाज ठप कैसे हो गया। यह बात अनाजमंडी में 28 दिन से हड़ताल व 11 दिन से भूख हड़ताल पर लिपिकों ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम करवाया। इस दौरान लिपिकों ने अपनी समस्याओं, सरकार की भूमिका, दूसरे राज्यों में वेतन तुलना इत्यादि को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि लिपिकों की मांग काम के अनुसार बिल्कुल सही है। सरकार लोगों को गुमराह करने के लिए हड़ताल का दोष लिपिकों के सिर मंढ रही है। संवाद में शिक्षा विभाग से सुमन, रोडवेज से विक्की, मनोज, पंचायत विभाग से कर्मवीर सिंह, कृष्ण कुमार, शिक्षा से विजय, तरसेम, तहसील कार्यालय से सर्वजीत सिंह, डीडब्ल्यूओ से मनीष, डीएसडब्ल्यूओ से भारत, आईटीआई से रोहित, विजय, स्वास्थ्य से संजीव कुमार, मनजीत, नगर निगम से सागर, प्रिंस सहित अन्य विभागों के लिपिकों ने संवाद से अपने विचार रखे।
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2013 से विचार के लिए लटकाया हक

2013 में लिपिकों ने 477 दिन की लंबाई लड़ाई कर अपना हक पाया था। तत्कालीन सरकार ने विधानसभा में 35400 रुपये का प्रस्ताव पास कर दिया था। एक नंबवर को नई सरकार ने कार्यभार संभाल लिया। जिसके बाद इसे पुन: विचार के लिए रोक लिया। नौ साल में सरकार इस पर अपना फैसला नहीं ले सकी है। यह हाल तक है जब सरकार ने इसे अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था।
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विकास जैन, शिक्षा विभाग एवं लिपिक प्रधान।

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सरकार के अनुसार करें काम, तो नहीं होगा कुछ

सरकार के अनुसार लिपिक केवल रिकॉर्ड कीपिंग व डायरी डिस्पैचर हैं। यदि लिपिक सरकार के कथन अनुसार काम करे तो किसी विभाग में कोई काम नहीं होगा। सभी विभागों में क्लर्क ही काम करते हैं। लिपिक सरकार की सभी योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहे हैं। लोगों तक लाभ पहुंचा रहे हैं। फील्ड, कार्यालय से लेकर आपातकालीन स्थिति में भी लिपिक ही काम कर रहे हैं।

जगमिंद्र सिंह, उपप्रधान एवं आबकारी विभाग।

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बाढ़ में मजदूर का भी किया काम

लिपिक केवल अपने के लिए मजबूरी में हड़ताल पर बैठे हैं। परंतु अपनी जिम्मेदारी व लोकहित में काम करने से पीछे नहीं हटते हैं। प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ आई। ऐसे में लिपिकों ने बाढ़ बचाव व राहत केंद्र से लेकर मैदान में भी काम किया। लिपिकों ने बाढ़ में भूमि कटाव रोकने व निकास के लिए मजदूर की तरह काम किया है। बाढ़ राहत के दौरान लिपिक ड्यूटी पर मौजूद रहे।

अश्विनी कुमार, तहसील कार्यालय एवं महासचिव।

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काम में पीछे नहीं देंगे अतिरिक्त समय

लिपिक काम में पीछे नहीं है। विशेष अवसरों पर बढ़ने वाला काम लंबित नहीं छोड़ा जाता है। लिपिक घर से भी काम निपटाते हैं। हड़ताल के कारण करीब एक महीने का काम लंबित हो गया है। सरकार उन्हें इसके पैसे दे रही है, ऐसे में लिपिक यह काम करेंगे। हड़ताल समाप्ति के बाद सभी विभागों में लिपिक अतिरिक्त समय देंगे। लंबित कार्य शनिवार व रविवार के अलावा घर से पूरा किया जाएगा। एक महीने का काम 15 दिन में पूरा कर दिया जाएगा।

मनीषा, महिला प्रधान एवं ईएसआई।



तकनीकी हो गया है काम

लिपिकों का काम पहले कुछ और था और अब इसमें भारी बदलाव आ गया है। लिपिकों का पूरा काम टेक्निकल हो गया है। चूंकि हर योजना व कार्य ऑनलाइन है। इसका क्रियान्वयन लिपिक ही करते हैं। केवल शिक्षा विभाग में 15 से ज्यादा पोर्टल व साइट इत्यादि पर काम किया जाता है। ऐसे में सभी लिपिक अब टेक्निकल फील्ड के हो गए हैं। जिस कारण 35400 उनका हक बनता ही है।

सुमन रानी, महिला उपप्रधान एवं शिक्षा विभाग।
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शैक्षणिक योग्यता के आधार पर मांग रहे वेतन

जेबीटी के लिए 12वीं व दो साल का डिप्लोमा की जरूरत है और उसके लिए 35400 का स्केल दिया जा रहा है। लिपिक के लिए भी यही योग्यता है। वहीं अब लिपिक सभी टेक्निकल काम करते हैं। ऐसे में उन्हें 19900 स्केल दिया जा है। शैक्षणिक योग्यता एक ही है, लेकिन उनका कार्य बहुत ज्यादा है। शैक्षणिक योग्यता के आधार पर 35400 उनका हक है और लिपिक इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं।

नीलम नेहरा, शिक्षा विभाग।

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सरकार वेतन की तुलना भरामक तरीक से कर रही है। जबकि हकीयत यह है कि सभी पड़ोसी राज्यों में लिपिकों का वेतन 30500, 35400 ही है। सरकार काम की भी तुलना करे। लिपिकों की एसईटीसी की परीक्षा ली जाती है। यह बीटेक लेवल की परीक्षा है। इसके बावजूद लिपिकों को तकनीकी श्रेणी में नहीं माना जाता है। उनके काम की समीक्षा की जाए। एमपीएचडब्ल्यू, जूनियर इंजीनियर व प्राथमिक अध्यापक के समान वेतन दिया जाए।


राम प्रकाश, पीडब्ल्यूडी।



दशकों से हो रहा शोषण

1957 से अब तक लिपिक वर्ग का वेतन का स्केल ठीक ही नहीं हो पाया है। स्वास्थ्य विभाग के 22 पोर्टल है, कई विंग हैं। सभी का संचालन लिपिक करते हैं। कई विभागों में चपरासी का वेतन उनसे ज्यादा है। दशकों से लिपिकों का शोषण हो रहा है। पब्लिक डिलिंग, ऑफिस वर्क, कोर्ट वर्क, आरटीआई, सरकार की रिपोर्ट, निदेशालय की रिपोर्स काम लिपिक करते हैं। बावजूद इसके उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा है।

संजीव कुमार, हेमसा प्रधान एवं स्वास्थ्य विभाग।

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