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Yamuna Nagar News: ग्रामीण रूटों पर अब तक नहीं सुधरी रोडवेज बसों की व्यवस्था

Thu, 04 Dec 2025 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 04 Dec 2025 01:11 AM IST
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The arrangement of roadways buses on rural routes has not improved yet
यमुनानगर बस स्टैंड पर बसों का इंतजार करते लोग। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। एक माह पहले प्रतापनगर बस स्टैंड पर रोडवेज बस ने छह छात्राओं को कुचल दिया था। बस की चपेट में आने से एक छात्रा की मौत हो गई थी और पांच घायल हुई थी। इसके बावजूद अभी तक ग्रामीण रूटों पर छात्र-छात्राओं की परेशानी कम नहीं हुई है। विद्यार्थियों को बसों में धक्का-मुक्की झेलते हुए शिक्षण संस्थान में पहुंचना पड़ रहा है।
विद्यार्थियों का ज्यादातर समय बसों के इंतजार में ही बीत रहा है। हालांकि रोडवेज ने छह बसें लॉग रूट से हटाकर ग्रामीण रूट पर लगाई है। परंतु इससे समस्या का समाधान पूरी तरह से नहीं हुआ है। छात्र नेताओं का कहना है कि छह बसें लगाने से महज दो से तीन प्रतिशत ही सुधार हुआ है। व्यासपुर के अहड़वाला, रादौर, सरस्वतीनगर, छछरौली व रादौर में केवल सरकारी कॉलेज हैं। बाकी के डिग्री कॉलेज यमुनानगर शहर में हैं। जो छात्र-छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं वही राजकीय कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। बाकी के विद्यार्थी पढ़ने के लिए यमुनानगर शहर में आते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को 40 से 45 किलोमीटर का सफर तय करके रोडवेज बसों में शहर में आना पड़ता है।
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बसों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रा की मौत के बाद रोडवेज ने दिल्ली रूट से चार व अन्य रूट से दो बसों को हटाकर ग्रामीण रूट पर लगाया है। इनमें से चार बसें प्रतापनगर, दो बसें साढौरा व दो बसें गढ़ी बीरबल रूट पर लगाई हैं। यह बसें सुबह स्कूल, कॉलेज के टाइम और दोपहर को छुट्टी के समय चलाई जा रही है। परंतु इनसे विद्यार्थियों को कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ है।
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10 दिन पहले ही यमुनानगर डिपो में रोडवेज की 10 नई बीएस-6 बसें आई हैं। लोगों को उम्मीद जगी थी कि इन बसों के आने से ग्रामीण रूटों पर उन्हें थोड़ी राहत मिलेगी। परंतु रोडवेज ने इन बसों को शिमला, मनाली, कांगड़ा, दिल्ली, पांवटा रूटों पर लगा दिया। ऐसे में लोकल रूट अभी भी बसों की कमी से जूझ रहे हैं। छात्र नेता उपेंद्र कुमार का कहना है कि एक छात्रा की मौत के बाद केवल दो-चार प्रतिशत ही सुधार हुआ है। सुबह के समय तो बसें रूटों पर रुकती ही नहीं है। यदि रूकती भी हैं तो अड्डे से आगे-पीछे। उन्हें दौड़ कर बस पकड़नी पड़ती है। बसों की कमी से पढ़ाई प्रभावित है।
छात्राओं के लिए स्पेशल बसों की कमी

कुछ साल पहले तक लगभग हर रूट पर छात्राओं के लिए स्पेशल बस चलती थी। परंतु अब केवल प्रतापनगर व पाबनी तक ही यमुनानगर से रोडवेज की बस चल रही है। प्रतापनगर से छात्राओं के लिए स्पेशल बस भी छात्रा की मौत के बाद ही लगाई गई है। वहीं गुलाब नगर-सरांवा रोड पर भी केवल पाबनी तक ही बस जा रही है। उधर, यमुनानगर-व्यासपुर, साढौरा, रणजीतपुर, रादौर व सहारनपुर रूट पर छात्राओं की संख्या बहुत ज्यादा है, लेकिन वहां के लिए कोई स्पेशल बस नहीं है।

ग्रामीण रूटों पर बसों की संख्या को बढ़ाया गया है। अब कहीं पर भी बसों की दिक्कत नहीं है। जहां से भी बस चलाने की मांग आती है, वहां पर बस चला दी जाती है। - संजय रावल, महाप्रबंधक, यमुनानगर डिपो।

यमुनानगर बस स्टैंड पर बसों का इंतजार करते लोग। संवाद

यमुनानगर बस स्टैंड पर बसों का इंतजार करते लोग। संवाद

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