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बच्चों के दाखिले के लिए फैक्टरियों में पहुंचे अध्यापक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Jun 2021 12:51 AM IST
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Teachers reached factories for admission of children, Yamunanagar
माई सिटी रिपोर्टर
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यमुनानगर। सरकारी स्कूलों में बच्चों के दाखिले को लेकर शिक्षक डोर-टू-डोर जाकर अभिभावकों को जागरूक कर रहे हैं। इसी कड़ी में गांव करहेड़ा खुर्द स्थित राजकीय उच्च विद्यालय का काफिला सोमवार फैक्टरियों में पहुंचा। अध्यापकों ने मजदूरों को जागरूक कर बच्चों के दाखिले किए और फैक्टरी मालिकों से चर्चा कर मजदूरों के बच्चों का दाखिला कराने के लिए प्रेरित किया।
मुख्याध्यापक विपिन कुमार की अगुवाई में हिंदी के अध्यापक अरुण कुमार कैहरबा, पंजाबी की अध्यापिका सुखिंद्र कौर, संस्कृत की अध्यापिका रजनी शास्त्री वऔरप्राथमिक शिक्षक सुल्तान सिंह ने बीच का माजरा और मिश्री का माजरा के पास स्थित फैक्टरियों में रह रहे प्रवासी मजदूरों से संपर्क किया और उन्हें अपने बच्चों को स्कूल में दाखिला करवाने के प्रति जागरूक किया। कई बच्चों के घर पर ही दाखिले किए गए। अध्यापकों ने बच्चों का दाखिला करवाने के लिए फैक्टरी मालिकों से भी विचार-विमर्श किया और उन्हें मजदूरों को समझाने का अनुरोध किया।
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अध्यापक सबसे पहले बीच का माजरा पहुंचे। यहां पर अभिभावकों से घर-घर जाकर संपर्क किया गया और उन्हें अपने बच्चों की शिक्षा में रुचि लेने पर बातचीत की गई। अरुण कैहरबा ने कहा कि शिक्षा से ही हम आगे बढ़ सकते हैं। बच्चे शिक्षा से वंचित रह गए तो देश व समाज आगे नहीं बढ़ पाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे आसपास के बच्चों के प्रति केवल मां-बाप की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उनकी भी उतनी ही जिम्मेदारी हैं, जिनके खेतों या फैक्टरियों में बच्चों के मां-बाप काम करते हैं। हर पढ़े-लिखे व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि सभी बच्चे स्कूल में दाखिल होकर शिक्षा ग्रहण करें।
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उद्यमी अनिल शर्मा व सुभाष कांबोज ने कहा कि वे मजदूरों के बच्चों की शिक्षा में हर संभव सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि वे समय-समय पर मजदूरों से बातचीत करते हैं और उन्हें बच्चों को स्कूल में दाखिला करवाने के लिए प्रेरित करते हैं। सुभाष ने बताया कि कई मजदूरों की शराब पीने की आदत के कारण बच्चों की शिक्षा पर परिवार ध्यान नहीं दे पाते हैं। उन्होंने मजदूरों को एकत्रित करवाकर उन्हें बच्चों की शिक्षा के लिए प्रेरित किया। मुख्याध्यापक विपिन कुमार ने बताया अध्यापक हर रोज आसपास के गांवों में जा रहे हैं और बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

अध्यापकों को डॉक्टर मानकर एक न सुनी
मिश्री का माजरा के पास स्थित एक फैक्टरी के मजदूरों के रहने के लिए बनाए गए कमरों के पास उस समय असमंजस व दहशत की स्थिति पैदा हो गई, जब बच्चोें ने अध्यापकों को डॉक्टर मान लिया। अध्यापकों के बार-बार अनुरोध करने पर भी कुछ महिलाओं व बच्चों ने एक न सुनी। आशंकित महिलाओं ने कहा कि उन्हें पता है कि आप कोरोना के टीके लगाने आए हो, ऐसा हम बिल्कुल नहीं होने देंगे। इस पर मजदूरों को मनाने के लिए अध्यापकों ने फैक्टरी मालिकों से चर्चा की। इसके बाद फैक्टरी मालिकों न मजदूरों को अपने बच्चों को स्कूल में दाखिल करवाने के लिए समझाया।
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