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सूर्य देव न दिए दर्शन, शीत लहर ने कंपाए हाड़
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कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए आग तापते लोग।
- फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। एक सप्ताह से पड़ रही कड़ाके की सर्दी से सामान्य जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। हाड़ गला देने वाली शीतलहर के कारण मानो जिंदगी थम सी गई है। एक सप्ताह बाद भी सूर्य देव के दर्शन न होने से आग ही लोगों के लिए सहारा बना हुआ है। सर्दी का असर ऐसा था कि छुट्टी के दिन भी लोग घरों में दुबके रहे। बड़े तो दूर किशोर और बच्चे भी सर्दी में खेलने से बचते नजर आए।
रविवार को कोहरे से राहत रही लेकिन शीतलहर ने हाड़ कंपा दिए। शाम को ठंड इतनी बढ़ गई कि हाथ-पांव कमरों के भीतर भी सुन्न रहे। दोपहर एक बजे अधिकतम तापमान 13 डिग्री और न्यूनतम सात डिग्री सेल्सियस रहा। नमी के साथ ही 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बर्फीली हवा चली। कड़ाके की सर्दी के कारण सामान्य जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। सुबह और शाम को सैर करने वाले लोगों की संख्या में भी भारी कमी आई है। पार्क व बगीचे इन दिनों सूने नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि एक सप्ताह से न तो शीत लहर थमने का नाम ले रही है और न ही सूर्यदेव दर्शन दे रहे हैं। हालांकि हवा चलने के कारण कोहरे से निजात मिली। शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में कोहरे का जोर दिखाई दिया। लेकिन इस दौरान हवा के कारण कोहरा छटता रहा, जिससे दृष्टिता सही रही।
बता दें कि साल के पहले दिन से ही मौसम बदला बदला नजर आ रहा है। कभी धूप तो कभी बादल, कभी बारिश तो कभी शीत लहर चल रही है। वहीं साल के दूसरे सप्ताह में सूर्यदेव के दर्शन ही नहीं हुए। शनिवार को सूर्य बादलों के बीच लुका छिपी करता रहा। वहीं रविवार को पूरे दिन आसमान पर बादल छाए रहे। दिन ढलने के साथ साथ पारा भी लुढकता गया।
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रविवार को छुट्टी के कारण जहां बाजारों में भीड़ व रौनक रहती थी, वहीं इस दौरान सन्नाटा पसरा रहा। घरों से लोग बेहद जरूरी सामान खरीदने के लिए बाजार पहुंचे। इस दौरान दुकानदार भी अलाव के सहारे रहे। हालांकि ठंड के कारण बाजारों में गर्म कपड़ों की मांग बढ़ गई। दुकानों पर लोग गर्म कपड़े खरीदने पहुंचे। जबकि अन्य दुकानों पर मंदी छाई रही। ग्राहक न होने के कारण दुकानदार निराश रहे।
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रविवार को कोहरे से राहत रही लेकिन शीतलहर ने हाड़ कंपा दिए। शाम को ठंड इतनी बढ़ गई कि हाथ-पांव कमरों के भीतर भी सुन्न रहे। दोपहर एक बजे अधिकतम तापमान 13 डिग्री और न्यूनतम सात डिग्री सेल्सियस रहा। नमी के साथ ही 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बर्फीली हवा चली। कड़ाके की सर्दी के कारण सामान्य जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। सुबह और शाम को सैर करने वाले लोगों की संख्या में भी भारी कमी आई है। पार्क व बगीचे इन दिनों सूने नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि एक सप्ताह से न तो शीत लहर थमने का नाम ले रही है और न ही सूर्यदेव दर्शन दे रहे हैं। हालांकि हवा चलने के कारण कोहरे से निजात मिली। शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र में कोहरे का जोर दिखाई दिया। लेकिन इस दौरान हवा के कारण कोहरा छटता रहा, जिससे दृष्टिता सही रही।
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बता दें कि साल के पहले दिन से ही मौसम बदला बदला नजर आ रहा है। कभी धूप तो कभी बादल, कभी बारिश तो कभी शीत लहर चल रही है। वहीं साल के दूसरे सप्ताह में सूर्यदेव के दर्शन ही नहीं हुए। शनिवार को सूर्य बादलों के बीच लुका छिपी करता रहा। वहीं रविवार को पूरे दिन आसमान पर बादल छाए रहे। दिन ढलने के साथ साथ पारा भी लुढकता गया।
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रविवार को छुट्टी के कारण जहां बाजारों में भीड़ व रौनक रहती थी, वहीं इस दौरान सन्नाटा पसरा रहा। घरों से लोग बेहद जरूरी सामान खरीदने के लिए बाजार पहुंचे। इस दौरान दुकानदार भी अलाव के सहारे रहे। हालांकि ठंड के कारण बाजारों में गर्म कपड़ों की मांग बढ़ गई। दुकानों पर लोग गर्म कपड़े खरीदने पहुंचे। जबकि अन्य दुकानों पर मंदी छाई रही। ग्राहक न होने के कारण दुकानदार निराश रहे।