{"_id":"6a04d12c32015c3bf20da643","slug":"students-who-achieved-success-through-struggle-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-156027-2026-05-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: संघर्ष से सफलता तक पहुंचे विद्यार्थी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: संघर्ष से सफलता तक पहुंचे विद्यार्थी
Thu, 14 May 2026 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 14 May 2026 12:59 AM IST
विज्ञापन
गुरुबचन सिंह।
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कठिन परिस्थितियां अगर इरादों से बड़ी होतीं तो महलांवाली गांव के गुरुबचन सिंह और शिवपुरी निवासी मनीष यादव शायद कभी सफलता की इस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाते। आर्थिक तंगी, पारिवारिक दुख और सीमित संसाधनों के बीच दोनों विद्यार्थियों ने अपनी मेहनत और लगन से हरियाणा बोर्ड की 12वीं परीक्षा में शानदार अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि सफलता केवल सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। एक ने माता-पिता को खोने के बाद संघर्षों के बीच पढ़ाई जारी रखी, तो दूसरे ने फैक्टरी कर्मचारी के बेटे होने के बावजूद सेल्फ स्टडी के दम पर मेडिकल संकाय में शानदार प्रदर्शन किया।
माता-पिता के निधन पर नहीं टूटा गुरुबचन का हौसला
जगाधरी के सनातन धर्म वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के छात्र महलांवाली गांव के गुरुबचन सिंह ने हरियाणा बोर्ड की 12वीं कक्षा में आर्ट्स संकाय से 484 अंक अंक हासिल किए। गुरुबचन की सफलता के पीछे संघर्षों की लंबी कहानी छिपी है।
उनके पिता सुखविंद्र सिंह ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे, लेकिन वर्ष 2017 में बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। पिता की मौत के बाद परिवार संभल भी नहीं पाया था कि वर्ष 2021 में उनकी माता पलविंद्र कौर का कैंसर से निधन हो गया। माता-पिता के गुजर जाने के बाद गुरुबचन और उनके छोटे भाई की जिम्मेदारी चाचा परमजीत सिंह और मेजर सिंह ने संभाली। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद दोनों चाचाओं ने बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने दी।
विज्ञापन
स्कूल समेत सामाजिक संस्थाओं ने भी किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराकर मदद की। गुरुबचन ने बताया कि उन्होंने मोबाइल का उपयोग केवल पढ़ाई के लिए किया और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। उनका सपना अधिवक्ता बनकर समाज में जरूरतमंद लोगों की मदद करना है। गुरुबचन कहते हैं कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इंसान मेहनत और धैर्य बनाए रखे तो मंजिल जरूर मिलती है।
फैक्टरी सुपरवाइजर के बेटे मनीष ने की सेल्फ स्ट्डी
मुकंद लाल राष्ट्रीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के छात्र शहर की शिवपुरी कॉलोनी निवासी मनीष यादव ने हरियाणा बोर्ड की 12वीं परीक्षा में साइंस संकाय (मेडिकल) से 479 अंक यानी 95.8 फीसदी अंक प्राप्त किए। मनीष के पिता कन्हैया यादव के बेटे प्लाईवुड फैक्टरी में सुपरवाइजर हैं और सीमित आय में पूरे परिवार का खर्च उठाते हैं। उनकी माता बबीता देवी गृहिणी हैं। परिवार में दो छोटे भाई-बहन भी हैं। मनीष ने बताया कि उन्होंने यह सफलता पूरी तरह सेल्फ स्टडी के जरिए हासिल की। परीक्षा के दौरान मोबाइल और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी। उन्होंने नियमित पढ़ाई और समय प्रबंधन को अपनी सफलता का सबसे बड़ा कारण बताया। मनीष का सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। इसके लिए उन्होंने दो साल तक तैयारी कर नीट परीक्षा दी थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने से उन्हें निराशा जरूर हुई। लेकिन दोबारा परीक्षा देने के लिए तैयार हैं।
बिजलीकर्मी के बेटे कृष्ण ने रचा इतिहास
मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग से मुकाम हासिल करने वाले विद्यार्थियों में मुकंद लाल राष्ट्रीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के छात्र कृष्णा कोचर का नाम भी शामिल हो गया है। विश्वकर्मा मोहल्ला निवासी कृष्णा ने हरियाणा बोर्ड की 12वीं कक्षा में कॉमर्स संकाय से 479 अंक यानी 95.8 प्रतिशत अंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
उनकी इस सफलता से परिवार और स्कूल में खुशी का माहौल है। कृष्णा के पिता पवन कुमार बिजली निगम में कर्मचारी हैं, जबकि माता पिंकी गृहिणी हैं। साधारण परिवार से संबंध रखने वाले कृष्णा की पांच बड़ी बहनें हैं। परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कृष्णा ने बताया कि उन्होंने रोजाना चार घंटे पढ़ाई का तय शेड्यूल बनाया था।
परीक्षा के दौरान मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी, जिससे पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सके। कृष्णा ने कहा कि परिवार का विश्वास और शिक्षकों का मार्गदर्शन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। कृष्णा का सपना चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनने का है। इसके लिए वह अब बीकॉम की पढ़ाई करेंगे और आगे सीए की तैयारी कर अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं।
विज्ञापन
यमुनानगर। कठिन परिस्थितियां अगर इरादों से बड़ी होतीं तो महलांवाली गांव के गुरुबचन सिंह और शिवपुरी निवासी मनीष यादव शायद कभी सफलता की इस ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाते। आर्थिक तंगी, पारिवारिक दुख और सीमित संसाधनों के बीच दोनों विद्यार्थियों ने अपनी मेहनत और लगन से हरियाणा बोर्ड की 12वीं परीक्षा में शानदार अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि सफलता केवल सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। एक ने माता-पिता को खोने के बाद संघर्षों के बीच पढ़ाई जारी रखी, तो दूसरे ने फैक्टरी कर्मचारी के बेटे होने के बावजूद सेल्फ स्टडी के दम पर मेडिकल संकाय में शानदार प्रदर्शन किया।
माता-पिता के निधन पर नहीं टूटा गुरुबचन का हौसला
जगाधरी के सनातन धर्म वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के छात्र महलांवाली गांव के गुरुबचन सिंह ने हरियाणा बोर्ड की 12वीं कक्षा में आर्ट्स संकाय से 484 अंक अंक हासिल किए। गुरुबचन की सफलता के पीछे संघर्षों की लंबी कहानी छिपी है।
विज्ञापन
उनके पिता सुखविंद्र सिंह ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे, लेकिन वर्ष 2017 में बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। पिता की मौत के बाद परिवार संभल भी नहीं पाया था कि वर्ष 2021 में उनकी माता पलविंद्र कौर का कैंसर से निधन हो गया। माता-पिता के गुजर जाने के बाद गुरुबचन और उनके छोटे भाई की जिम्मेदारी चाचा परमजीत सिंह और मेजर सिंह ने संभाली। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद दोनों चाचाओं ने बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकने दी।
विज्ञापन
स्कूल समेत सामाजिक संस्थाओं ने भी किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराकर मदद की। गुरुबचन ने बताया कि उन्होंने मोबाइल का उपयोग केवल पढ़ाई के लिए किया और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। उनका सपना अधिवक्ता बनकर समाज में जरूरतमंद लोगों की मदद करना है। गुरुबचन कहते हैं कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इंसान मेहनत और धैर्य बनाए रखे तो मंजिल जरूर मिलती है।
फैक्टरी सुपरवाइजर के बेटे मनीष ने की सेल्फ स्ट्डी
मुकंद लाल राष्ट्रीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के छात्र शहर की शिवपुरी कॉलोनी निवासी मनीष यादव ने हरियाणा बोर्ड की 12वीं परीक्षा में साइंस संकाय (मेडिकल) से 479 अंक यानी 95.8 फीसदी अंक प्राप्त किए। मनीष के पिता कन्हैया यादव के बेटे प्लाईवुड फैक्टरी में सुपरवाइजर हैं और सीमित आय में पूरे परिवार का खर्च उठाते हैं। उनकी माता बबीता देवी गृहिणी हैं। परिवार में दो छोटे भाई-बहन भी हैं। मनीष ने बताया कि उन्होंने यह सफलता पूरी तरह सेल्फ स्टडी के जरिए हासिल की। परीक्षा के दौरान मोबाइल और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी। उन्होंने नियमित पढ़ाई और समय प्रबंधन को अपनी सफलता का सबसे बड़ा कारण बताया। मनीष का सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। इसके लिए उन्होंने दो साल तक तैयारी कर नीट परीक्षा दी थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने से उन्हें निराशा जरूर हुई। लेकिन दोबारा परीक्षा देने के लिए तैयार हैं।
बिजलीकर्मी के बेटे कृष्ण ने रचा इतिहास
मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग से मुकाम हासिल करने वाले विद्यार्थियों में मुकंद लाल राष्ट्रीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के छात्र कृष्णा कोचर का नाम भी शामिल हो गया है। विश्वकर्मा मोहल्ला निवासी कृष्णा ने हरियाणा बोर्ड की 12वीं कक्षा में कॉमर्स संकाय से 479 अंक यानी 95.8 प्रतिशत अंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
उनकी इस सफलता से परिवार और स्कूल में खुशी का माहौल है। कृष्णा के पिता पवन कुमार बिजली निगम में कर्मचारी हैं, जबकि माता पिंकी गृहिणी हैं। साधारण परिवार से संबंध रखने वाले कृष्णा की पांच बड़ी बहनें हैं। परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कृष्णा ने बताया कि उन्होंने रोजाना चार घंटे पढ़ाई का तय शेड्यूल बनाया था।
परीक्षा के दौरान मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी, जिससे पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सके। कृष्णा ने कहा कि परिवार का विश्वास और शिक्षकों का मार्गदर्शन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। कृष्णा का सपना चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनने का है। इसके लिए वह अब बीकॉम की पढ़ाई करेंगे और आगे सीए की तैयारी कर अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं।

गुरुबचन सिंह।

गुरुबचन सिंह।