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अभी और सताएगी ठंड, बारिश से बिगड़ा मौसम
यमुनानगर
Updated Tue, 11 Mar 2014 01:07 AM IST
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मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। सोमवार को सुबह हल्की बारिश हुई औैर
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दिनभर बूंदाबांदी जारी रही। इससे ठंडक का अहसास हुआ। विभाग की मानें तो अभी
दो दिन और बारिश रह सकती है।
मौसम के इस बदलते मिजाज में खासकर बच्चों और बुजुर्गों को स्वास्थ्य के प्रति अलर्ट रहने की जरूरत है। क्योंकि ऐसे मौसम में बैक्टीरिया और वायरस की ग्रोथ बढ़ने से खांसी, जुखाम और गर्म-सर्द जैसे रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। फरवरी माह के अंत में मौसम का मिजाज ऐसा था मानों गर्मियां आ गई हों।
लेकिन मार्च में सप्ताह भर में दूसरे बार बारिश आने पर फिर से ठंड महसूस की जा रही है। हाफ स्वेटर से फुल स्वेटर में लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सर्दियां फिलहाल अभी गई नहीं हैं। ऐसा ही कुछ चिकित्सकाें का भी मानना है, उनकी मानें तो अभी सर्दी की तरह ही पेश आएं।
बच्चे और बुजुर्ग रहें अलर्ट
सिविल अस्पताल के डॉ. विजय दहिया ने बताया कि मौसम का मौजूदा मिजाज वायरस और बैक्टीरिया की ग्रोथ के लिए अनुकूल है। इसमें खांसी, जुखाम और सर्द-गर्म के रोग बढ़ जाते हैं। ऐसे में खासकर बच्चाें और बुजुर्गों को अलर्ट रहने की जरूरत है।
ये बरतें एहतियात
- ठंडे पानी से परहेज, हो सके तो पानी को थोड़ा गुनगुना करके पीएं।
- बाहर से घर आकर एक दम मुंह, हाथ न धोएं।
- पसीना सुखाने के बाद ही मुंह हाथ और नहाएं।
- बाजार में खुले में बिकने वाले कटे फल न खाएं।
- आसपास मक्खी-मच्छरों न रहे, इसके लिए साफ-सफाई रखें।
- धूल-मिट्टी से बचें और हो सके तो ऐसे स्थान पर मास्क का प्रयोग करें।
- खांसी-जुखाम पर चिकित्सक को जरूर दिखाएं।
- बच्चों को स्कूल भेजते वक्त पूरे कपड़े पहनाएं।
- बुजुर्गों को खानपान सही समय पर करना चाहिए।
पहले पीला रतुआ, अब बारिश ने बढ़ाई टेंशन
पहले पीले रतुए और अब मौसम के बदलते मिजाज ने किसानाें की चिंता बढ़ा डाली है। रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है, अगले दो दिन भी बारिश रहने की संभावना है। उधर, कृषि विभाग की मानें तो बारिश के साथ अगर हवाएं चलीं तो गेहूं की फसल को खासा नुकसान होगा।
जिले में कुल 85 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल लगी है। गेहूं की फसल अप्रैल माह से पहले ही तैयार हो जाएंगी। अप्रैल माह के शुरुआत में जिले की अनाज मंडियों में गेहूं की आवक होने लगेगी। अब जब गेहूं का सीजन सिर पर है, तब कई जगहाें पर फसल में पीले रतुए के लक्षण सामने आए हैं। उधर, मौसम भी फसल के प्रतिकूल बन रहा है। बारिश का बढ़ता स्तर भी किसानाें की मुसीबतें बढ़ा रहा है। जहां जनवरी माह में 60-65 एमएम बारिश दर्ज की गई थी, वहीं अब तक मार्च माह में 15-20 एमएम बारिश हो चुकी है। कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक अगले दो दिन भी बारिश रहने वाली है। किसान कर्मबीर, जसपाल, रामकिशन, बलदेव, करनैल सिंह, रामकुमार, बलकार सिंह आदि ने बताया कि गेहूं की फसल लगभग पूरी तरह से तैयार है। इस समय गेहूं में बनी बालियों में दूध से गेहूं का दाना बन रहा है। ऐसे समय में फसल में पानी देना या बरसात का होना फसल के लिए ठीक नहीं है।
किसान ये कर सकते हैं उपाय
- खेत का कुछ-कुछ घंटाें के बाद निरीक्षण।
- कोई बीमारी के लक्षण दिखने पर विभाग को सूचित करें।
- फसल में पानी को ज्यादा समय के लिए न रहने दें।
- पीले रतुए से बचाव के लिए प्रोपिकोनाजो दवा का स्प्रे।
मौसम के इस बदलते मिजाज में खासकर बच्चों और बुजुर्गों को स्वास्थ्य के प्रति अलर्ट रहने की जरूरत है। क्योंकि ऐसे मौसम में बैक्टीरिया और वायरस की ग्रोथ बढ़ने से खांसी, जुखाम और गर्म-सर्द जैसे रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। फरवरी माह के अंत में मौसम का मिजाज ऐसा था मानों गर्मियां आ गई हों।
लेकिन मार्च में सप्ताह भर में दूसरे बार बारिश आने पर फिर से ठंड महसूस की जा रही है। हाफ स्वेटर से फुल स्वेटर में लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सर्दियां फिलहाल अभी गई नहीं हैं। ऐसा ही कुछ चिकित्सकाें का भी मानना है, उनकी मानें तो अभी सर्दी की तरह ही पेश आएं।
बच्चे और बुजुर्ग रहें अलर्ट
सिविल अस्पताल के डॉ. विजय दहिया ने बताया कि मौसम का मौजूदा मिजाज वायरस और बैक्टीरिया की ग्रोथ के लिए अनुकूल है। इसमें खांसी, जुखाम और सर्द-गर्म के रोग बढ़ जाते हैं। ऐसे में खासकर बच्चाें और बुजुर्गों को अलर्ट रहने की जरूरत है।
ये बरतें एहतियात
- ठंडे पानी से परहेज, हो सके तो पानी को थोड़ा गुनगुना करके पीएं।
- बाहर से घर आकर एक दम मुंह, हाथ न धोएं।
- पसीना सुखाने के बाद ही मुंह हाथ और नहाएं।
- बाजार में खुले में बिकने वाले कटे फल न खाएं।
- आसपास मक्खी-मच्छरों न रहे, इसके लिए साफ-सफाई रखें।
- धूल-मिट्टी से बचें और हो सके तो ऐसे स्थान पर मास्क का प्रयोग करें।
- खांसी-जुखाम पर चिकित्सक को जरूर दिखाएं।
- बच्चों को स्कूल भेजते वक्त पूरे कपड़े पहनाएं।
- बुजुर्गों को खानपान सही समय पर करना चाहिए।
पहले पीला रतुआ, अब बारिश ने बढ़ाई टेंशन
पहले पीले रतुए और अब मौसम के बदलते मिजाज ने किसानाें की चिंता बढ़ा डाली है। रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है, अगले दो दिन भी बारिश रहने की संभावना है। उधर, कृषि विभाग की मानें तो बारिश के साथ अगर हवाएं चलीं तो गेहूं की फसल को खासा नुकसान होगा।
जिले में कुल 85 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल लगी है। गेहूं की फसल अप्रैल माह से पहले ही तैयार हो जाएंगी। अप्रैल माह के शुरुआत में जिले की अनाज मंडियों में गेहूं की आवक होने लगेगी। अब जब गेहूं का सीजन सिर पर है, तब कई जगहाें पर फसल में पीले रतुए के लक्षण सामने आए हैं। उधर, मौसम भी फसल के प्रतिकूल बन रहा है। बारिश का बढ़ता स्तर भी किसानाें की मुसीबतें बढ़ा रहा है। जहां जनवरी माह में 60-65 एमएम बारिश दर्ज की गई थी, वहीं अब तक मार्च माह में 15-20 एमएम बारिश हो चुकी है। कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक अगले दो दिन भी बारिश रहने वाली है। किसान कर्मबीर, जसपाल, रामकिशन, बलदेव, करनैल सिंह, रामकुमार, बलकार सिंह आदि ने बताया कि गेहूं की फसल लगभग पूरी तरह से तैयार है। इस समय गेहूं में बनी बालियों में दूध से गेहूं का दाना बन रहा है। ऐसे समय में फसल में पानी देना या बरसात का होना फसल के लिए ठीक नहीं है।
किसान ये कर सकते हैं उपाय
- खेत का कुछ-कुछ घंटाें के बाद निरीक्षण।
- कोई बीमारी के लक्षण दिखने पर विभाग को सूचित करें।
- फसल में पानी को ज्यादा समय के लिए न रहने दें।
- पीले रतुए से बचाव के लिए प्रोपिकोनाजो दवा का स्प्रे।