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वाइल्ड लाइफ के प्रति जागरूक करने के लिए कलेसर नेशनल पार्क के प्रवेशद्वार पर लगाए जानवरों के बड़े स्टेच्यू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2020 12:51 AM IST
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statue imposed to make wildlife aware
statue imposed to make wildlife aware - फोटो : Yamuna Nagar
आम लोगों को जंगली जानवरों के संरक्षण और उनके बारे में जानकारी देने के लिए वाइल्ड लाइफ विभाग ने शिवालिक की पहाड़ियों के इर्दगिर्द फैले कलेसर नेशनल पार्क व वाइल्ड लाइफ सेंच्यूरी को सुशोभित करने का काम शुरू किया है। इस योजना के तहत नेशनल पार्क के इंट्री प्वाइंट्स पर यहां रहने वाले दुर्लभ जीव जंतुओं के बड़े-बड़े स्टेच्यू लगाएं जा रहे हैं। प्रथम चरण में हरियाणा की तरफ ताजेवाला इंट्री प्वाइंट पर लेपर्ड और हिमाचल की तरफ लाल ढांग इंट्री प्वाइंट पर सांभर का विशाल स्टेच्यू लगाया गया है। ये दोनों इंट्री प्वाइंट जगाधरी-पावंटा साहिब नेशनल हाईवे पर हैं, जो दूर से ही लोगों को आगाह करते हैं कि वाइल्ड सेंच्यूरी का एरिया शुरू हो गया है। लोहे के बड़े एंगल पर लगाएं गए साइन बोर्ड व जंगली जानवरों की एक बड़ी प्रतिकृति एक सवा तीन लाख रुपये का खर्च आया है। इस तरह के कई अन्य बड़े साइन बोर्ड और स्टेच्यू और लगाएं जाने हैं। जंगली जानवरों की प्रतिकृतियां स्थापित करने के पीछे का मकसद आगंतुकों को इन क्षेत्रों के जीवों के बारे में सूचित करना है।
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कलेसर नेशनल पार्क को लेपर्ड यानि तेंदुओं के कारण भी काफी ख्याति हैं। यहां काफी तादाद में तेंदूए हैं, जो अक्सर आने जाने वालों को दिखाई दे जाते हैं। खासकर नेशनल हाइवे पर तेंदूए वाहनों के सामने आते हैं और कई बार हाइसे का शिकार भी हो जाते हैं। यह हरियाणा का एकमात्र नेशनल पार्क है, जहां वाइल्ड लाइफ विभाग की तरफ से आमजन को जंगल सफारी करवाई जाती है। यह दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति है, इसलिए ताजेवाला इंट्री प्वाइंट नेशनल हाइवे पर लेपर्ड का स्टेच्यू और साइनबोर्ड लगाया गया है।
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वाइल्ड लाइफ सेंच्यूरी में सांभर बहुतायत में पाएं जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश की तरफ बने इंट्री प्वाइंट पर सांभर का स्टेच्यू और साइन बोर्ड लगाया गया है। 8 दिसंबर 2003 को कलेसर में 11570 एकड़ क्षेत्रफल वाला राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। राष्ट्रीय उद्यान के समीप ही वन्यजीव अभयारण्य है और इसे 13 दिसंबर 1996 को अधिसूचित किया गया था, जिसका क्षेत्रफल 13209 एकड़ है।
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किराए के जीप द्वारा राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में सफारी यात्रा करने की व्यवस्था है। पार्क क्षेत्र में सफारी करने के लिए आगंतुकों की सुविधा के उद्देश्य से नेशनल पार्क में तीन सफारी मार्गों का परिसीमन किया गया है। ये मार्ग लगभग 16 किलोमीटर का है। यहां केवल उन निजी जीपों को राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति है, जो वन्यजीव निरीक्षक, केलसर के कार्यालय में पंजीकृत हैं और जिनके पास प्रवेश की अनुमति है। जंगल सफारी करने का समय गर्मियों में सुबह 06:00 से 10:00 बजे और शाम को 04:00 से शाम 07:00 तक है। जबकि सर्दियों में सुबह सात बजे से 11 बजे और दोपहर को 03:30 से शाम 06:00 तक है। राष्ट्रीय उद्यान जुलाई से सितंबर के महीनों में बंद रहता है।

कलेसर में तेंदूएं, चीतल, रोझ, जंगली सुअर, हाथी, गोरल, बंदर, बार्किंग हिरण के अलावा राजाजी नेशनल पार्क से यहां बाघ भी आगंतुक मुख्य जंगली जानवर है।
जिला वन्य जीव अधिकारी सुनील तंवर ने बताया कि आमतौर पर कलेसर में आने वाले पर्यटक अपने पहाड़ी क्षेत्र की वनस्पतियों और जीवों के बारे में नहीं जानते हैं, वे केवल मनोरंजन के लिए यहां आते हैं। विभाग चाहता है कि लोग इलाके के वन्यजीवों के बारे में जागरूक हों। यह प्रदेश के सभी वाइल्ड लाइफ सेंच्यूरी क्षेत्र में लगाए गए हैं। वाहन चालकों और आम जन से अपील है कि वे नेशनल पार्क में सावधानी से निकले और लुप्त होते जा रहे जीव जंतुओं को बचाने में वाइल्ड लाइफ विभाग का सहयोग करें। खासकर नेशनल हाईवे पर जंगली जानवरों का ध्यान रखें।
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