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Yamuna Nagar News: दोषपूर्ण सूट बेचने पर दुकानदार को फटकार, मुआवजा देने का आदेश
Sat, 04 Apr 2026 03:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 04 Apr 2026 03:54 AM IST
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यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने दोषपूर्ण कपड़े बेचने के मामले में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया और दुकानदार को फटकार लगाते हुए मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि सामान में दोष है तो दुकानदार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उपभोक्ता की शिकायत का समाधान करे, चाहे शिकायत कुछ दिनों की देरी से ही क्यों न आई हो।
मामले के अनुसार ग्रीन विहार कॉलोनी निवासी धर्मवीर राठी ने 29 मार्च 2025 को बिलासपुर स्थित एक कपड़े की दुकान से छह लेडीज सूट खरीदे थे। कुल 6710 रुपये में खरीदे गए इन सूटों में से दो सूट घर जाकर खोलने पर कटे व दोषपूर्ण पाए गए। उपभोक्ता ने दुकानदार से संपर्क कर इन्हें बदलने की मांग की, लेकिन दुकानदार ने इनकार कर दिया। इसके बाद उपभोक्ता ने कानूनी नोटिस भेजा और अंततः आयोग का दरवाजा खटखटाया।
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद माना कि सूट में दोष था और इसकी पुष्टि फोटो से भी होती है। आयोग ने कहा कि भले ही शिकायत में देरी हुई हो, लेकिन दुकानदार की यह जिम्मेदारी थी कि वह उपभोक्ता की समस्या का समाधान करता। शिकायत के दौरान भी दुकानदार द्वारा कोई संतोषजनक प्रयास नहीं किया गया, जिससे उपभोक्ता को मानसिक परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
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आयोग ने यह भी माना कि सूट की कटिंग के दौरान ही दोष का पता चला, इसलिए पूरी राशि वापसी उचित नहीं है। लेकिन सेवा में कमी को देखते हुए आयोग ने दुकानदार को 3000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके अलावा 2200 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भी देने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि निर्धारित राशि 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी। तय समय सीमा में भुगतान न करने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। संवाद
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मामले के अनुसार ग्रीन विहार कॉलोनी निवासी धर्मवीर राठी ने 29 मार्च 2025 को बिलासपुर स्थित एक कपड़े की दुकान से छह लेडीज सूट खरीदे थे। कुल 6710 रुपये में खरीदे गए इन सूटों में से दो सूट घर जाकर खोलने पर कटे व दोषपूर्ण पाए गए। उपभोक्ता ने दुकानदार से संपर्क कर इन्हें बदलने की मांग की, लेकिन दुकानदार ने इनकार कर दिया। इसके बाद उपभोक्ता ने कानूनी नोटिस भेजा और अंततः आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद माना कि सूट में दोष था और इसकी पुष्टि फोटो से भी होती है। आयोग ने कहा कि भले ही शिकायत में देरी हुई हो, लेकिन दुकानदार की यह जिम्मेदारी थी कि वह उपभोक्ता की समस्या का समाधान करता। शिकायत के दौरान भी दुकानदार द्वारा कोई संतोषजनक प्रयास नहीं किया गया, जिससे उपभोक्ता को मानसिक परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
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आयोग ने यह भी माना कि सूट की कटिंग के दौरान ही दोष का पता चला, इसलिए पूरी राशि वापसी उचित नहीं है। लेकिन सेवा में कमी को देखते हुए आयोग ने दुकानदार को 3000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके अलावा 2200 रुपये मुकदमा खर्च के रूप में भी देने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि निर्धारित राशि 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी। तय समय सीमा में भुगतान न करने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। संवाद