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Yamuna Nagar News: अर्थी से उठाने के 11 घंटे बाद शेर सिंह से तोड़ा दम
Fri, 18 Jul 2025 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 18 Jul 2025 12:46 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर/छछरौली। मौत, जिंदगी और फिर मौत। कोट बसावा की माजरी निवासी 75 वर्षीय शेर सिंह के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। अर्थी से उठाने के 11 घंटे बाद शेर सिंह ने दम तोड़ा दिया। परिजनों ने वीरवार को अंतिम संस्कार कर दिया।
बुधवार रात कपूर अस्पताल जगाधरी में उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई, इस पर डॉक्टर ने उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। परिजन उन्हें घर ले गए। शेर सिंह करीब 11 घंटे ही जिंदा रह सके। उपचार के दौरान यह भी पता चला है कि शेर सिंह की मौत ब्रेन अटैक यानि दिमाग की नस फटने से हुई है।
बुधवार को अर्थी से उठाने के बाद जब शेर सिंह को कपूर अस्पताल में ले जाया गया तो वहां डॉक्टर आलोक कपूर ने उनकी जांच की। डॉक्टर ने उनकी एमआरआई करवाई, जिसमें पता चला कि शेर सिंह के दिमाग की नस फटी है। मेडिकल साइंस में इसे ल्यूसिड इंटरवल कहा जाता है। बुधवार रात को शेर सिंह की तबीयत ज्यादा खराब होने लगी थी।
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उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। हालत को गंभीर देखते हुए डॉक्टर आलोक ने उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। परंतु परिजन उन्हें घर ले गए। घर पहुंचने के कुछ घंटे के बाद ही ढाई बजे शेर सिंह ने दम तोड़ दिया।
परिजनों के मुताबिक मंगलवार को शेर सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। इस पर उन्हें यमुनानगर के एक नामी निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहां पर डॉक्टर ने चेकअप करने के बाद बताया था कि शेर सिंह को हार्ट अटैक आया है। डॉक्टर ने कुछ समय बाद शेर सिंह को मृत भी घोषित कर दिया। परिजन अंतिम संस्कार से पूर्व उन्हें नहला रहे थ। मुंह में लगे पाइप को हटाने पर शरीर हलचल करने लगा। इस पर उन्हें कपूर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
नष्ट की अर्थी को दोबारा किया तैयार
संस्कार करने के लिए बुधवार को तैयार की गई अर्थी को नष्ट कर दिया गया था। रात में उनका निधन होने के बाद वीरवार को उसी नष्ट हुई अर्थी को दोबारा से तैयार किया गया। इसी से शेर सिंह को श्मशान घाट ले जाया गया। श्मशान घाट में एक दिन पहले जो चिता तैयार की गई थी, उसके ईंधन को भी एक तरफ कर दिया गया था। अंतिम संस्कार के लिए इसी ईंधन से चिता तैयार की गई।
शेर सिंह की एमआरआई करवाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट में पता चला कि उन्हें ब्रेन अटैक आया था। रात को हालत नाजुक होने पर उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया था। ल्यूसिड इंटरवल में कोई व्यक्ति अस्थायी रूप से होश में आता है और फिर स्थिति बिगड़ जाती है। -डॉ. आलोक कपूर, कपूर अस्पताल जगाधरी।
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यमुनानगर/छछरौली। मौत, जिंदगी और फिर मौत। कोट बसावा की माजरी निवासी 75 वर्षीय शेर सिंह के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। अर्थी से उठाने के 11 घंटे बाद शेर सिंह ने दम तोड़ा दिया। परिजनों ने वीरवार को अंतिम संस्कार कर दिया।
बुधवार रात कपूर अस्पताल जगाधरी में उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई, इस पर डॉक्टर ने उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। परिजन उन्हें घर ले गए। शेर सिंह करीब 11 घंटे ही जिंदा रह सके। उपचार के दौरान यह भी पता चला है कि शेर सिंह की मौत ब्रेन अटैक यानि दिमाग की नस फटने से हुई है।
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बुधवार को अर्थी से उठाने के बाद जब शेर सिंह को कपूर अस्पताल में ले जाया गया तो वहां डॉक्टर आलोक कपूर ने उनकी जांच की। डॉक्टर ने उनकी एमआरआई करवाई, जिसमें पता चला कि शेर सिंह के दिमाग की नस फटी है। मेडिकल साइंस में इसे ल्यूसिड इंटरवल कहा जाता है। बुधवार रात को शेर सिंह की तबीयत ज्यादा खराब होने लगी थी।
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उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। हालत को गंभीर देखते हुए डॉक्टर आलोक ने उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। परंतु परिजन उन्हें घर ले गए। घर पहुंचने के कुछ घंटे के बाद ही ढाई बजे शेर सिंह ने दम तोड़ दिया।
परिजनों के मुताबिक मंगलवार को शेर सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। इस पर उन्हें यमुनानगर के एक नामी निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहां पर डॉक्टर ने चेकअप करने के बाद बताया था कि शेर सिंह को हार्ट अटैक आया है। डॉक्टर ने कुछ समय बाद शेर सिंह को मृत भी घोषित कर दिया। परिजन अंतिम संस्कार से पूर्व उन्हें नहला रहे थ। मुंह में लगे पाइप को हटाने पर शरीर हलचल करने लगा। इस पर उन्हें कपूर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
नष्ट की अर्थी को दोबारा किया तैयार
संस्कार करने के लिए बुधवार को तैयार की गई अर्थी को नष्ट कर दिया गया था। रात में उनका निधन होने के बाद वीरवार को उसी नष्ट हुई अर्थी को दोबारा से तैयार किया गया। इसी से शेर सिंह को श्मशान घाट ले जाया गया। श्मशान घाट में एक दिन पहले जो चिता तैयार की गई थी, उसके ईंधन को भी एक तरफ कर दिया गया था। अंतिम संस्कार के लिए इसी ईंधन से चिता तैयार की गई।
शेर सिंह की एमआरआई करवाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट में पता चला कि उन्हें ब्रेन अटैक आया था। रात को हालत नाजुक होने पर उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया था। ल्यूसिड इंटरवल में कोई व्यक्ति अस्थायी रूप से होश में आता है और फिर स्थिति बिगड़ जाती है। -डॉ. आलोक कपूर, कपूर अस्पताल जगाधरी।