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Yamuna Nagar News: मानकपुर में कटाव से कई एकड़ जमीन नदी में समाई

Fri, 11 Jul 2025 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Fri, 11 Jul 2025 12:15 AM IST
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Several acres of land got submerged in the river due to erosion in Manakpur
संवाद न्यूज एजेंसी
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छछरौली। मानकपुर में पथराला नदी किनारे एक साल से कृषि भूमि में कटाव हो रहा है। जिससे किसानों की कई एकड़ जमीन पथराला नदी में समा चुकी है। किसानों का कहना है कि एक साल से लगातार प्रशासन व संबंधित विभागों के चक्कर लगा चुके हैं पर आज तक प्रशासन द्वारा जमीनों में हो रहे भूमि कटाव को रोकने के लिए कोई भी पर्याप्त कदम नहीं उठाया गया।
किसानों का कहना है की बाढ़ बचाव के लिए जो काम इस बार होना था वह भी आधा अधूरा पड़ा हुआ है। बाढ़ बचाव कार्य के पत्थर भी अभी तक साइट पर पूरा नहीं हुआ है। जिससे कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है कि कृषि भूमि में हो रहे कटाव को रोका जा सके। जिस जगह पर कटाव हो रहा है वहां पर सभी छोटे-छोटे किसान परिवार है।
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जिन किसानों पास मुश्किल से एक से डेढ़ एकड़ जमीन ही है, उसमें से भी आधी से ज्यादा जमीन पथराला नदी में समा चुकी है। अगर इस जगह पर कटाव को रोकने के लिए कोई इंतजाम कर दिया जाता तो आज नौबत यहां तक न पहुंचती। इस समय उनके सामने परिवारों को पालन पोषण करने के लिए भी कोई जरिया नहीं बचा है।कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही
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ग्रामीण रणदीप ने बताया कि पिरथीपुर गांव से पूर्व की तरफ नदी के दूसरी साइड मानकपुर के किसानों की जमीन लगती है। जिसमें लगातार कटाव जारी है। जिसमें कई किसानों की चार-पांच एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है। प्रशासन में सिंचाई विभाग को कई बार कटाव रोकने के लिए गुहार लगा चुके हैं पर आज तक उनकी सुनवाई नहीं हो पाई है ।
जमीन पर निर्भर है परिवार

किसान कुलदीप ने बताया कि उनके पास एक एकड़ जमीन है, जिसमें से आधी से ज्यादा जमीन नदी में समा चुकी है। उसके परिवार का पालन पोषण इसी जमीन पर निर्भर था। अब यह जमीन नदी में समा चुकी है परिवार को दो वक्त का खाना देने में भी बड़े परेशानी हो रही है। उसके पास कोई अन्य काम धंधा भी नहीं है।

अफसरों के आगे हाथ जोड़कर किया आग्रह

किसान रमेश ने बताया कि परिवार का पालन पोषण करने के लिए उसके पास एक मात्र यह जमीन ही सहारा थी। यह भी नदी में समा चुकी है उसके सामने रोजी-रोटी का संकट आ चुका है। वह भी पिछले एक साल से लगातार अधिकारियों के पास जा रहा है और हाथ जोड़कर खेतों को बचाने के लिए आग्रह भी कर चुका है। उसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं है।
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