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प्रशासन ने कागजों में ही बना दिए सत्तर शौचालय
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर।
Updated Thu, 03 Jul 2014 12:22 AM IST
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छछरौली के गांव मेघुवाला में सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक सात साल पहले योजना के तहत 70 शौचालय बने लेकिन जमीनी पर एक भी शौचालय नहीं है।
यह खुलासा तब हुआ जब एक परिवार ग्रामीण स्वच्छता अभियान के तहत चलाई गई शौचालय बनाने की स्कीम का लाभ लेने सरपंच से मिलने पहुंचा।
सरपंच ने उस परिवार को सात साल पहले स्कीम का लाभ ले लेने के कारण दोबारा लाभ न मिलने की बात कही। परिवार का तर्क है कि उन्हें ऐसा कोई लाभ नहीं मिला है।
उधर, गांव के अन्य ग्रामीणों का भी कहना है कि सात साल पहले गांव में ऐसी कोई योजना का लाभ उन्हें नहीं मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि हमें इस बात का पता अब चला है कि उनके घरों में सात साल पहले प्रशासन ने शौचालय बनाए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि यह शौचालय सिर्फ कागजों में ही बने हैं।
जबकि हकीकत यह है कि जिन परिवारों के नाम सरकारी रिकॉर्ड में शौचालय बने हैं। उनमें से एक भी घर में शौचालय नहीं बने हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सात साल पहले गांव का सरपंच दूसरा व्यक्ति था। जिसने हमें कभी स्कीम के बारे में जिक्र भी नहीं किया। पूरे घोटाले में लगभग आठ लाख चालीस हजार रुपये के घोटाले का पर्दाफाश होने की संभावना है।
नहीं लिए जा रहे आवेदन: सरकार की ग्रामीण स्वच्छता अभियान के तहत चलाई जा रही शौचालय बनाने की नई स्कीम के तहत जो लोग सात साल पहले की स्कीम का लाभ ले चुके हैं वह अब इस स्कीम का लाभ नहीं ले सकते हैं।
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इसी नए नियम के फेर में गांव मेघुवाला के 70 परिवार के लोग फंस गए हैं। क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक उनके घरों में सात साल पहले स्कीम के तहत शौचालय बन चुके हैं।
यानि इन परिवारों को स्कीम का दोबारा लाभ नहीं मिल सकता है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में सात साल पहले एक भी शौचालय नहीं बना था और अब भी उन्हें इस लाभ से वंचित रखा जा रहा है।
शौचालय न होने से दिक्कत: ग्रामीणों का कहना है कि घरों में शौचालय न होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर गांव की महिला को मजबूरन खुले में शौच जाने की दिक्कत से दो-चार होना पड़ रहा है।
महिलाए खुले में दिन में शौच के लिए नहीं जा पाती हैं और दिन ढलते ही खेतों में जहरीले जीव बाहर निकल आते हैं। इन्हीं परेशानियों चलते ग्रामीण सरकार की योजना के तहत घरों में शौचालय बनवाना चाहते हैं लेकिन सरकरी रिकॉर्ड के मुताबिक वह पहले योजना का लाभ ले चुके हैं और दोबारा योजना लाभ नहीं ले सकते हैं।
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यह खुलासा तब हुआ जब एक परिवार ग्रामीण स्वच्छता अभियान के तहत चलाई गई शौचालय बनाने की स्कीम का लाभ लेने सरपंच से मिलने पहुंचा।
सरपंच ने उस परिवार को सात साल पहले स्कीम का लाभ ले लेने के कारण दोबारा लाभ न मिलने की बात कही। परिवार का तर्क है कि उन्हें ऐसा कोई लाभ नहीं मिला है।
उधर, गांव के अन्य ग्रामीणों का भी कहना है कि सात साल पहले गांव में ऐसी कोई योजना का लाभ उन्हें नहीं मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि हमें इस बात का पता अब चला है कि उनके घरों में सात साल पहले प्रशासन ने शौचालय बनाए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि यह शौचालय सिर्फ कागजों में ही बने हैं।
जबकि हकीकत यह है कि जिन परिवारों के नाम सरकारी रिकॉर्ड में शौचालय बने हैं। उनमें से एक भी घर में शौचालय नहीं बने हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सात साल पहले गांव का सरपंच दूसरा व्यक्ति था। जिसने हमें कभी स्कीम के बारे में जिक्र भी नहीं किया। पूरे घोटाले में लगभग आठ लाख चालीस हजार रुपये के घोटाले का पर्दाफाश होने की संभावना है।
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नहीं लिए जा रहे आवेदन: सरकार की ग्रामीण स्वच्छता अभियान के तहत चलाई जा रही शौचालय बनाने की नई स्कीम के तहत जो लोग सात साल पहले की स्कीम का लाभ ले चुके हैं वह अब इस स्कीम का लाभ नहीं ले सकते हैं।
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इसी नए नियम के फेर में गांव मेघुवाला के 70 परिवार के लोग फंस गए हैं। क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक उनके घरों में सात साल पहले स्कीम के तहत शौचालय बन चुके हैं।
यानि इन परिवारों को स्कीम का दोबारा लाभ नहीं मिल सकता है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि उनके गांव में सात साल पहले एक भी शौचालय नहीं बना था और अब भी उन्हें इस लाभ से वंचित रखा जा रहा है।
शौचालय न होने से दिक्कत: ग्रामीणों का कहना है कि घरों में शौचालय न होने से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर गांव की महिला को मजबूरन खुले में शौच जाने की दिक्कत से दो-चार होना पड़ रहा है।
महिलाए खुले में दिन में शौच के लिए नहीं जा पाती हैं और दिन ढलते ही खेतों में जहरीले जीव बाहर निकल आते हैं। इन्हीं परेशानियों चलते ग्रामीण सरकार की योजना के तहत घरों में शौचालय बनवाना चाहते हैं लेकिन सरकरी रिकॉर्ड के मुताबिक वह पहले योजना का लाभ ले चुके हैं और दोबारा योजना लाभ नहीं ले सकते हैं।