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सेवाभाव : अध्यापक से रिटायर होने के बाद 73 की उम्र में बच्चों को दे रहे शिक्षा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 May 2022 01:21 AM IST
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Service : After retiring from teacher, giving education to children at the age of 73
बेगमपुरा के राजकीय स्कूल में बच्चों को पढ़ाते जयकुमार सिंह रोहिल्ला। - फोटो : Yamuna Nagar
प्रतापनगर। ऐसे बहुत ही कम लोग होते हैं जिनमें कुछ अच्छा करने का जुनून होता है। इन्हीं में से एक हैं गांव देवधर निवासी जय कुमार सिंह रोहिल्ला। जिन्होंने शिक्षा विभाग में 38 साल अध्यापक के रूप में सेवाएं दीं। 13 अगस्त 2009 कोे रिटायर होने के बाद भी उनमें बच्चों को शिक्षित करने का जुनून बना रहा। इसी जुनून के चलते वे पिछले 13 वर्षों से बच्चों को निशुल्क पढ़ाने के साथ कॅरिअर काउंसलिंग दे रहे हैं। साथ ही शिक्षा से वंचित बच्चों व किशोरों को सरकारी स्कूलों में दाखिले दिलवा रहे हैं। उनके पढ़ाए कई बच्चे बड़े पदों पर पहुंच चुके हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके इसी योगदान के लिए राष्ट्रपति अवॉर्ड सहित दर्जनों अवार्ड से सम्मानित किए जा चुके हैं। इन्हें जानने वाले अधिकांश लोग गुरुजी कहकर बुलाने लगे हैं।
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देवधर के जय कुमार सिंह रोहिला 73 साल की उम्र में भी बेगमपुरा सहित जिले के जिस सरकारी स्कूल में मौका मिलते ही वहां जाकर बच्चों को पढ़ाते रहे हैं। साथ ही स्कूलों में अध्यापकों को भी शिक्षण के गुर दे रहे हैं। शिक्षा से वंचित सैकड़ों बच्चों के सरकारी स्कूलों में दाखिले करवा चुके हैं।
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पढ़ाए बच्चों में लॉ ऑफिस तो कोई जेई और अध्यापक
रोहिला ने बताया कि उनके पढ़ाए बच्चे आज बड़े पदों पर हैं, जिन पर उन्हें गर्व महसूस होता है। उनके पढ़ाए विद्यार्थियों में एडवोकेट अनिल कुमार गढ़वा हरियाणा विधानसभा के लॉ ऑफिसर हैं। बनारसी दास हिंदी प्रवक्ता, नरेश कुमार जेई, सुरेंद्र कुमार अध्यापक हैं। ऐसे ही कई बच्चे बड़े पदों पर हैं। जयकुमार रोहिला का कहना है कि वह सप्ताह में तीन से चार दिन छछरौली व खिजराबाद के सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों की क्लास लेते हैं और बच्चों को समझाते हैं कि आज के वक्त में पढ़ाई एक ऐसा हुनर है, जिसे कोई छीन नहीं सकता। इसलिए ज्यादा से ज्यादा शिक्षा ग्रहण करें और परिवार व समाज के लिए मिसाल कायम करें।
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मरणोपरांत देहदान का संकल्प
नेशनल अवॉर्डी जयकुमार रोहिला ने जिला रेडक्रॉस समिति यमुनानगर व समाजसेवी कमल धमीजा की प्रेरणा से प्रेरित होकर पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर दोनों आंखें व 2012 को मरणोपरांत देहदान का संकल्प लिया। उनका कहना है कि मरकर जलने के बाद मानव शरीर का कुछ नहीं बनता और न ही यह किसी के काम आता है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी को देहदान करने का संकल्प लेना चाहिए। हमारे शरीर के अंग किसी इंसान को जिंदगी दे सकते हैं।
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