{"_id":"6504bdcac5e62ec61d0df316","slug":"school-buses-found-unfit-childrens-safety-depended-on-ram-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-5756-2023-09-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: अनफिट मिलीं स्कूल बसें, बच्चों की सुरक्षा रामभरोसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: अनफिट मिलीं स्कूल बसें, बच्चों की सुरक्षा रामभरोसे
Sat, 16 Sep 2023 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 16 Sep 2023 01:55 AM IST
विज्ञापन
यमुनानगर। विद्यार्थियों को स्कूल लाने व ले जाने में लगाई गई बसें सुरक्षित नहीं हैं। पिछले तीन माह में जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी की टीम की ओर से की गई प्राइवेट स्कूलों की बसों की जांच में से एक चौथाई बसें अनफिट मिली। इस पर टीम ने 12 बसों के चालान कर दिए। जांच के दौरान 13 बस ऐसी मिली जो सड़क सुरक्षा के मानकों पर किसी भी एंगल से खरा नहीं उतरी।
जानकारी के अनुसार माता-पिता अपने बच्चों को स्कूलों के स्टाफ के भरोसे छोड़कर बेफिक्र हो जाते हैं। उन्हें नहीं पता कि जिस बस में वह बच्चे को बिठाकर आए हैं वह खुद मानकों पर खरी नहीं उतरती। वहीं निजी स्कूलों का ध्यान केवल अभिभावकों से फीस लेने पर तो है, जब बच्चों को सुरक्षा मुहैया कराने की बात आती है तो वह कंजूसी बरतने लगते हैं। डीटीओ ने पिछले तीन माह में 95 निजी स्कूलों की बसों की जांच की। चार माह में 47 बसों बसें जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र की टीम द्वारा पकड़ी गई। जांच के दौरान कई बसों में सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन यंत्र, ब्रेक लाइट का काम न करने समेत अन्य खामियां मिली। इन खामियों के चलते बसों में सवार बच्चों के साथ कोई बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तरत डीटीओ की टीम ने मई से अगस्त तक 45 बसों की जांच की। जिनमें 12 अनफिट मिली। जिले के कुछ निजी स्कूलों को छोड़कर कई स्कूल या उनके वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा। कई बसों और अन्य वाहनों में क्षमता से ज्यादा यानी बच्चों को ठूस कर बिठाया जाता है।
अब भी लिखा है 102 नंबर
सभी सरकारी व निजी स्कूलों को स्कूल के अलावा बसों पर भी आपातकालीन सेवाओं के नंबर लिखना जरूरी है। जिनमें महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन, पुलिस, एंबुलेंस व अग्निशमन सेवाओं के नंबर शामिल हैं। देश में पहले एंबुलेंस सेवाओं के लिए 102 नंबर डायल किया जाता था। वर्ष 2018 में 102 की जगह 108 नंबर डायल किया जाने लगा, लेकिन अब तक स्कूूलों के अंदर व बसों पर 102 ही लिखा हुआ है। इसी तरह प्रदेश की डायल 112 सर्विस का नंबर भी बसों पर नहीं लिखा गया है।
विज्ञापन
इन नियमों का पालन है जरूरी :
- सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार स्कूल बस पीले रंग से पेंट होने चाहिए।
- उसके आगे एवं पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
- बसों की सभी खिड़कियों में पकड़ने के लिए आगे छड़ लगे होने चाहिए।
- बस में अग्निशमन यंत्र लगा हो।
- बस में स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
- बस के दरवाजे में अच्छी क्वालिटी का ताला लगा हो।
- सीटों के बीच पर्याप्त जगह हो। बच्चों को बस में चढ़ाने व उतारने के लिए अनुभवी अटेंडेंट रहे।
- स्कूल बस में कोई अभिभावक या शिक्षक बच्चों के साथ रहे।
- स्कूल बस के चालक को कम से कम पांच साल का अनुभव हो।
वर्जन
जांच के दौरान कई बसें सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी पर खरी नहीं उतरी मिली। बसों में जो कमियां मिली हैं उन्हें दूर करने के लिए निजी स्कूल संचालकों को बोला गया है। जांच में यदि दोबारा कमी मिली तो स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उर्मिल श्योकंद, जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार माता-पिता अपने बच्चों को स्कूलों के स्टाफ के भरोसे छोड़कर बेफिक्र हो जाते हैं। उन्हें नहीं पता कि जिस बस में वह बच्चे को बिठाकर आए हैं वह खुद मानकों पर खरी नहीं उतरती। वहीं निजी स्कूलों का ध्यान केवल अभिभावकों से फीस लेने पर तो है, जब बच्चों को सुरक्षा मुहैया कराने की बात आती है तो वह कंजूसी बरतने लगते हैं। डीटीओ ने पिछले तीन माह में 95 निजी स्कूलों की बसों की जांच की। चार माह में 47 बसों बसें जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र की टीम द्वारा पकड़ी गई। जांच के दौरान कई बसों में सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन यंत्र, ब्रेक लाइट का काम न करने समेत अन्य खामियां मिली। इन खामियों के चलते बसों में सवार बच्चों के साथ कोई बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तरत डीटीओ की टीम ने मई से अगस्त तक 45 बसों की जांच की। जिनमें 12 अनफिट मिली। जिले के कुछ निजी स्कूलों को छोड़कर कई स्कूल या उनके वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा। कई बसों और अन्य वाहनों में क्षमता से ज्यादा यानी बच्चों को ठूस कर बिठाया जाता है।
विज्ञापन
अब भी लिखा है 102 नंबर
सभी सरकारी व निजी स्कूलों को स्कूल के अलावा बसों पर भी आपातकालीन सेवाओं के नंबर लिखना जरूरी है। जिनमें महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन, पुलिस, एंबुलेंस व अग्निशमन सेवाओं के नंबर शामिल हैं। देश में पहले एंबुलेंस सेवाओं के लिए 102 नंबर डायल किया जाता था। वर्ष 2018 में 102 की जगह 108 नंबर डायल किया जाने लगा, लेकिन अब तक स्कूूलों के अंदर व बसों पर 102 ही लिखा हुआ है। इसी तरह प्रदेश की डायल 112 सर्विस का नंबर भी बसों पर नहीं लिखा गया है।
विज्ञापन
इन नियमों का पालन है जरूरी :
- सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार स्कूल बस पीले रंग से पेंट होने चाहिए।
- उसके आगे एवं पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा हो।
- बसों की सभी खिड़कियों में पकड़ने के लिए आगे छड़ लगे होने चाहिए।
- बस में अग्निशमन यंत्र लगा हो।
- बस में स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
- बस के दरवाजे में अच्छी क्वालिटी का ताला लगा हो।
- सीटों के बीच पर्याप्त जगह हो। बच्चों को बस में चढ़ाने व उतारने के लिए अनुभवी अटेंडेंट रहे।
- स्कूल बस में कोई अभिभावक या शिक्षक बच्चों के साथ रहे।
- स्कूल बस के चालक को कम से कम पांच साल का अनुभव हो।
वर्जन
जांच के दौरान कई बसें सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी पर खरी नहीं उतरी मिली। बसों में जो कमियां मिली हैं उन्हें दूर करने के लिए निजी स्कूल संचालकों को बोला गया है। जांच में यदि दोबारा कमी मिली तो स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उर्मिल श्योकंद, जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी