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Yamuna Nagar News: साध्वी ने बताया जीवन में गुरु सेवा का महत्व
Mon, 11 Aug 2025 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 11 Aug 2025 12:41 AM IST
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में रविवार का साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी नीलम भारती ने श्रद्धालुओं को जीवन में गुरु सेवा का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि गुरु सेवा का अर्थ यह नहीं है कि हम किसी अपने जैसे दिखने वाले मनुष्य के लिए ही जीवन की ऊर्जा शक्ति लगा दें अपितु उस हमारे जैसी दिखने वाली परमसत्ता, जो मानव से महामानव बन चुका है, उसकी आज्ञा में रहकर अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दें, ये ही गुरु सेवा का पर्याय है। मानव तन तभी सार्थक हो सकता है जब इसे परोपकार एवं सामाजिक कल्याण के कार्य में लगाया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि हम आजीवन केवल स्वार्थ पूर्ति एवं विषय भोग के लिए ही इस मानव तन का उपयोग करते हैं तो यह मानव जीवन की दुर्गति है। वह परब्रह्म सत्ता साकार स्वरूप धारण करके गुरु रूप में धरा पर अवतरित होती है, तो वह अपनी निजी सेवा हेतु किसी जीवात्मा को नहीं लगाता अपितु वह संपूर्ण जीव जगत के कल्याण एवं परोपकार के लिए कुछ सौभाग्यशाली जीवात्मा को चुनकर कुछ कार्यों में संलग्न करता है।
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इससे उनके कर्म संस्कारों का बोझ कम हो जाता है और फिर उस गुरु सेवा में लगे हुए साधक के लिए साधना एवं भक्ति का मार्ग अति सरल एवं सहज हो जाता है, जिस पर निरंतर चलते हुए वह अपने परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति कर लेता है। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से गुरु व ईश्वर की महिमा का गुणगान किया।
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जगाधरी। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम हनुमान गेट में रविवार का साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी नीलम भारती ने श्रद्धालुओं को जीवन में गुरु सेवा का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि गुरु सेवा का अर्थ यह नहीं है कि हम किसी अपने जैसे दिखने वाले मनुष्य के लिए ही जीवन की ऊर्जा शक्ति लगा दें अपितु उस हमारे जैसी दिखने वाली परमसत्ता, जो मानव से महामानव बन चुका है, उसकी आज्ञा में रहकर अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दें, ये ही गुरु सेवा का पर्याय है। मानव तन तभी सार्थक हो सकता है जब इसे परोपकार एवं सामाजिक कल्याण के कार्य में लगाया जाए।
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उन्होंने कहा कि यदि हम आजीवन केवल स्वार्थ पूर्ति एवं विषय भोग के लिए ही इस मानव तन का उपयोग करते हैं तो यह मानव जीवन की दुर्गति है। वह परब्रह्म सत्ता साकार स्वरूप धारण करके गुरु रूप में धरा पर अवतरित होती है, तो वह अपनी निजी सेवा हेतु किसी जीवात्मा को नहीं लगाता अपितु वह संपूर्ण जीव जगत के कल्याण एवं परोपकार के लिए कुछ सौभाग्यशाली जीवात्मा को चुनकर कुछ कार्यों में संलग्न करता है।
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इससे उनके कर्म संस्कारों का बोझ कम हो जाता है और फिर उस गुरु सेवा में लगे हुए साधक के लिए साधना एवं भक्ति का मार्ग अति सरल एवं सहज हो जाता है, जिस पर निरंतर चलते हुए वह अपने परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति कर लेता है। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से गुरु व ईश्वर की महिमा का गुणगान किया।