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Yamuna Nagar News: आरटीआई से खुला फर्जी प्रॉपर्टी आईडी का खेल, प्राथमिकी दर्ज
Mon, 09 Mar 2026 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 09 Mar 2026 01:16 AM IST
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यमुनानगर। नगर निगम क्षेत्र में फर्जी प्रॉपर्टी आईडी बनाकर संपत्तियों की खरीद-फरोख्त करने का मामला सामने आया है। बूड़िया गेट निवासी हरविंद्र सिंह की दुकान से जुड़ा यह मामला आरटीआई के माध्यम से सामने आया, जिसके बाद नगर निगम प्रशासन ने जांच कराकर शहर यमुनानगर थाना पुलिस को शिकायत दी है। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार हरविंद्र सिंह को अपनी दुकान से संबंधित रिकॉर्ड में गड़बड़ी का संदेह हुआ था। इसके बाद उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत नगर निगम से संपत्ति से जुड़ा रिकॉर्ड मांगा। आरटीआई में प्राप्त जानकारी से सामने आया कि उनकी दुकान से संबंधित एक अलग प्रॉपर्टी आईडी तैयार कर दी गई थी, जबकि नगर निगम कार्यालय में उससे जुड़े मूल दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे।
जांच में सामने आया कि कैंप निवासी श्याम सुंदर ने नगर निगम के संपत्ति कर रिकॉर्ड में एक नई प्रॉपर्टी आईडी बनवाई थी। जब उसे इस संपत्ति से संबंधित मलकीयत के दस्तावेज पेश करने के लिए बुलाया गया तो वह कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। आरोप है कि यह आईडी निगम के लिपिक असलम से मिलीभगत कर तैयार कराई गई थी। हरविंद्र सिंह के अनुसार बूड़िया गेट जगाधरी स्थित यह दुकान उन्होंने वर्ष 2006 में रूपनगर निवासी कमलेश कुमार से खरीदी थी। उस समय सेल डीड नंबर 5914 के आधार पर संपत्ति उनके नाम दर्ज हुई थी और तब से वह नगर निगम में नियमित रूप से कर भी जमा कर रहे हैं। वर्तमान में दुकान किराये पर दी हुई है, जहां एक डॉक्टर का क्लीनिक संचालित हो रहा है।
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उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले श्याम सुंदर उक्त दुकान पर कब्जा लेने के लिए पहुंच गया। इस पर विवाद खड़ा हो गया और मौके पर पुलिस को बुलाना पड़ा। पुलिस ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच की, लेकिन मौके पर कोई फैसला नहीं हो सका। इसके बाद हरविंद्र सिंह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और इस मामले में वाद दायर किया। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। स्थानीय लोगों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे प्लॉट हैं जिनका पूरा रिकॉर्ड निगम के पास उपलब्ध नहीं है। अनुमान है कि करीब 55 हजार से अधिक प्लॉट ऐसे हैं जिनका स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे प्लॉटों पर भूमाफिया की नजर रहती है और कई बार फर्जी प्रॉपर्टी आईडी तैयार कराकर उन्हें बेचने के मामले सामने आते हैं। जब असली मालिक या खरीदार कब्जा लेने पहुंचते हैं तो विवाद खड़ा हो जाता है और मामला पुलिस व अदालत तक पहुंच जाता है।
इससे पहले भी शहर में इसी तरह का एक मामला सामने आ चुका है। दस अगस्त 2024 को शहर यमुनानगर थाना पुलिस ने एनआरआई राकेश कपूर की मॉडल टाउन स्थित 409 वर्ग गज संपत्ति को फर्जी तरीके से बेचने के मामले में केस दर्ज किया था। आरोप था कि उनकी संपत्ति की आईडी बदलवाकर जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई और जमीन बेच दी गई। इस मामले में उर्दू अनुवादक इस्लाम, परमजीत कौर, प्रॉपर्टी डीलर अश्विनी कुमार, एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी राम मेहर, करनैल सिंह और नंबरदारों सहित 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
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जानकारी के अनुसार हरविंद्र सिंह को अपनी दुकान से संबंधित रिकॉर्ड में गड़बड़ी का संदेह हुआ था। इसके बाद उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत नगर निगम से संपत्ति से जुड़ा रिकॉर्ड मांगा। आरटीआई में प्राप्त जानकारी से सामने आया कि उनकी दुकान से संबंधित एक अलग प्रॉपर्टी आईडी तैयार कर दी गई थी, जबकि नगर निगम कार्यालय में उससे जुड़े मूल दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे।
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जांच में सामने आया कि कैंप निवासी श्याम सुंदर ने नगर निगम के संपत्ति कर रिकॉर्ड में एक नई प्रॉपर्टी आईडी बनवाई थी। जब उसे इस संपत्ति से संबंधित मलकीयत के दस्तावेज पेश करने के लिए बुलाया गया तो वह कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। आरोप है कि यह आईडी निगम के लिपिक असलम से मिलीभगत कर तैयार कराई गई थी। हरविंद्र सिंह के अनुसार बूड़िया गेट जगाधरी स्थित यह दुकान उन्होंने वर्ष 2006 में रूपनगर निवासी कमलेश कुमार से खरीदी थी। उस समय सेल डीड नंबर 5914 के आधार पर संपत्ति उनके नाम दर्ज हुई थी और तब से वह नगर निगम में नियमित रूप से कर भी जमा कर रहे हैं। वर्तमान में दुकान किराये पर दी हुई है, जहां एक डॉक्टर का क्लीनिक संचालित हो रहा है।
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उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले श्याम सुंदर उक्त दुकान पर कब्जा लेने के लिए पहुंच गया। इस पर विवाद खड़ा हो गया और मौके पर पुलिस को बुलाना पड़ा। पुलिस ने दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच की, लेकिन मौके पर कोई फैसला नहीं हो सका। इसके बाद हरविंद्र सिंह ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और इस मामले में वाद दायर किया। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। स्थानीय लोगों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे प्लॉट हैं जिनका पूरा रिकॉर्ड निगम के पास उपलब्ध नहीं है। अनुमान है कि करीब 55 हजार से अधिक प्लॉट ऐसे हैं जिनका स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे प्लॉटों पर भूमाफिया की नजर रहती है और कई बार फर्जी प्रॉपर्टी आईडी तैयार कराकर उन्हें बेचने के मामले सामने आते हैं। जब असली मालिक या खरीदार कब्जा लेने पहुंचते हैं तो विवाद खड़ा हो जाता है और मामला पुलिस व अदालत तक पहुंच जाता है।
इससे पहले भी शहर में इसी तरह का एक मामला सामने आ चुका है। दस अगस्त 2024 को शहर यमुनानगर थाना पुलिस ने एनआरआई राकेश कपूर की मॉडल टाउन स्थित 409 वर्ग गज संपत्ति को फर्जी तरीके से बेचने के मामले में केस दर्ज किया था। आरोप था कि उनकी संपत्ति की आईडी बदलवाकर जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की गई और जमीन बेच दी गई। इस मामले में उर्दू अनुवादक इस्लाम, परमजीत कौर, प्रॉपर्टी डीलर अश्विनी कुमार, एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी राम मेहर, करनैल सिंह और नंबरदारों सहित 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।