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Yamuna Nagar News: समय से पहले हो रही धान की रोपाई, जिम्मेदार बने अनजान
Sat, 07 Jun 2025 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 07 Jun 2025 11:59 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में धान न लगाकर जल बचाने के दावे हवा हवाई होते दिख रहे हैं। किसानों ने निर्धारित समय से पहले ही खेतों में धान की रोपाई शुरू कर दी है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
सरकार ने 15 जून के बाद ही धान की रोपाई करने के निर्देश दे रखे हैं। समय से पहले धान की रोपाई पर रोक इसलिए लगाई गई है, क्योंकि इससे तीन गुना ज्यादा पानी लगता है। गर्मियों में मानसून आने से पहले तेज गर्मी के कारण पानी जल्दी सूखता है। पर ट्यूबवेल चलाकर ज्यादा सिंचाई करनी पड़ती है, जिससे जलस्तर और तेजी से गिरता है। इस वर्ष जिले में में 87.60 हेक्टेयर में धान रोपाई की जानी है। भूजल हर वर्ष करीब एक मीटर नीचे जा रहा है। जगाधरी में भूजल स्तर करीब 16 मीटर, साढौरा में करीब 11, प्रतापनगर में करीब 16, बिलासपुर में करीब 11, छछरौली में नौ व रादौर में करीब 17 मीटर पर पहुंच गया है। जिन ब्लॉकों में पानी का स्तर बहुत तेजी से गिर रहा है, वहां पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इन अत्यधिक दोहन वाले क्षेत्रों को उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र घोषित किया गया है। यही वजह है कि इन जगहों में किसानों से धान की खेती छोड़ कर अन्य फसलें लगाने की अपील की जा रही है।
पहले रोपाई से विकसित नहीं होते पौधे : डॉ. संदीप रावल
कृषि विज्ञान केंद्र दामला के समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने बताया कि धान की परंपरागत रोपाई की अपेक्षा सीधी बिजाई में पानी कम लगता है और फसल की जड़ें भी बेहतर तरीके से विकसित होती हैं। इससे उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। धान की रोपाई का उपयुक्त समय 15 जून के बाद का माना जाता है। इससे पहले की गई रोपाई से पौधे ठीक से विकसित नहीं हो पाते और किसान को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सीधी बिजाई को बढ़ावा देने के लिए सरकार सब्सिडी भी दे रही है। अगर किसान इस विधि को अपनाते हैं तो उन्हें आर्थिक लाभ के साथ-साथ पानी की बचत और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। सही समय पर और सही विधि से की गई खेती ही किसानों के लिए फायदेमंद साबित होती है।
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15 जून से पहले रोपाई करना पूरी तरह से मना है। यदि कोई किसान नियम तोड़ता है, तो जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। किसानों से धान की जगह अन्य फसलें उगाने की अपील की जा रही है। इस बारे में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। - डॉ. आदित्य डबास, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग यमुनानगर।
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यमुनानगर। जिले में धान न लगाकर जल बचाने के दावे हवा हवाई होते दिख रहे हैं। किसानों ने निर्धारित समय से पहले ही खेतों में धान की रोपाई शुरू कर दी है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
सरकार ने 15 जून के बाद ही धान की रोपाई करने के निर्देश दे रखे हैं। समय से पहले धान की रोपाई पर रोक इसलिए लगाई गई है, क्योंकि इससे तीन गुना ज्यादा पानी लगता है। गर्मियों में मानसून आने से पहले तेज गर्मी के कारण पानी जल्दी सूखता है। पर ट्यूबवेल चलाकर ज्यादा सिंचाई करनी पड़ती है, जिससे जलस्तर और तेजी से गिरता है। इस वर्ष जिले में में 87.60 हेक्टेयर में धान रोपाई की जानी है। भूजल हर वर्ष करीब एक मीटर नीचे जा रहा है। जगाधरी में भूजल स्तर करीब 16 मीटर, साढौरा में करीब 11, प्रतापनगर में करीब 16, बिलासपुर में करीब 11, छछरौली में नौ व रादौर में करीब 17 मीटर पर पहुंच गया है। जिन ब्लॉकों में पानी का स्तर बहुत तेजी से गिर रहा है, वहां पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इन अत्यधिक दोहन वाले क्षेत्रों को उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र घोषित किया गया है। यही वजह है कि इन जगहों में किसानों से धान की खेती छोड़ कर अन्य फसलें लगाने की अपील की जा रही है।
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पहले रोपाई से विकसित नहीं होते पौधे : डॉ. संदीप रावल
कृषि विज्ञान केंद्र दामला के समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने बताया कि धान की परंपरागत रोपाई की अपेक्षा सीधी बिजाई में पानी कम लगता है और फसल की जड़ें भी बेहतर तरीके से विकसित होती हैं। इससे उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। धान की रोपाई का उपयुक्त समय 15 जून के बाद का माना जाता है। इससे पहले की गई रोपाई से पौधे ठीक से विकसित नहीं हो पाते और किसान को नुकसान उठाना पड़ सकता है। सीधी बिजाई को बढ़ावा देने के लिए सरकार सब्सिडी भी दे रही है। अगर किसान इस विधि को अपनाते हैं तो उन्हें आर्थिक लाभ के साथ-साथ पानी की बचत और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। सही समय पर और सही विधि से की गई खेती ही किसानों के लिए फायदेमंद साबित होती है।
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15 जून से पहले रोपाई करना पूरी तरह से मना है। यदि कोई किसान नियम तोड़ता है, तो जांच करने के बाद कार्रवाई की जाएगी। किसानों से धान की जगह अन्य फसलें उगाने की अपील की जा रही है। इस बारे में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। - डॉ. आदित्य डबास, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग यमुनानगर।