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मन का आहार है भजन-सत्संग, इससे दूर होंगे तनाव और अवसाद : देवी चित्रलेखा
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श्री खाटू श्याम कीर्तन मंडल की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन सुनाती देवी चित्रलेखा।
करनाल। सेक्टर-12 स्थित गोल्डन मोमेंट्स में श्री खाटू श्याम कीर्तन मंडल की ओर से श्रीमद्भागवत कथा आयोजित की जा रही है। वीरवार को कथा सुनाते हुए देवी चित्रलेखा ने कहा कि जैसे शरीर को भोजन की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मन को भी सही आहार की जरूरत होती है। मन का वास्तविक आहार भजन, सत्संग और प्रभु का नाम है। यदि मन को यह नहीं मिलेगा तो व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर होकर तनाव और अवसाद की ओर बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक छोटे बच्चों में डिप्रेशन जैसी समस्याएं बहुत कम देखने को मिलती थीं, लेकिन आज चौथी-पांचवीं कक्षा के बच्चे भी तनाव से जूझ रहे हैं। यह समाज के लिए चिंताजनक संकेत है। उन्होंने कहा कि हम बच्चों के लिए धन-दौलत और सुविधाएं तो जुटा रहे हैं, लेकिन शुद्ध वातावरण और मानसिक संतुलन देने पर ध्यान नहीं दे रहे। यही कारण है कि आज स्कूलों में भी काउंसिलिंग की जरूरत पड़ रही है।
मोबाइल व सोशल मीडिया पर व्यर्थ गंवा रहे समय
देवी चित्रलेखा ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में लोग सत्संग से दूर होते जा रहे हैं और समय का बड़ा हिस्सा मोबाइल व सोशल मीडिया पर व्यर्थ कर रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन कम से कम 10 से 20 मिनट भगवान के नाम, कथा या सत्संग के लिए निकालें। इससे मन को शांति मिलेगी और जीवन में सकारात्मकता आएगी। उन्होंने श्रीमद्भागवत को केवल धार्मिक ग्रंथ न मानकर जीवन का मार्गदर्शक बताया। कहा कि इसके अध्ययन और श्रवण से व्यक्ति को जीवन के उद्देश्य का बोध होता है और वह सही दिशा में आगे बढ़ता है। भगवान की कथाएं प्रेम, करुणा, सेवा, त्याग और विनम्रता का संदेश देती हैं, जो समाज को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि परिवार में नियमित रूप से धार्मिक चर्चा और भगवान का स्मरण हो तो घर का वातावरण सकारात्मक और संस्कारवान बनता है। मौके पर अंकुर गुप्ता, आशीष गुप्ता, अंकुश गोयल, सौरभ गुप्ता, ऋषभ गुप्ता, अतुल जैन और सचिन मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक छोटे बच्चों में डिप्रेशन जैसी समस्याएं बहुत कम देखने को मिलती थीं, लेकिन आज चौथी-पांचवीं कक्षा के बच्चे भी तनाव से जूझ रहे हैं। यह समाज के लिए चिंताजनक संकेत है। उन्होंने कहा कि हम बच्चों के लिए धन-दौलत और सुविधाएं तो जुटा रहे हैं, लेकिन शुद्ध वातावरण और मानसिक संतुलन देने पर ध्यान नहीं दे रहे। यही कारण है कि आज स्कूलों में भी काउंसिलिंग की जरूरत पड़ रही है।
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मोबाइल व सोशल मीडिया पर व्यर्थ गंवा रहे समय
देवी चित्रलेखा ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में लोग सत्संग से दूर होते जा रहे हैं और समय का बड़ा हिस्सा मोबाइल व सोशल मीडिया पर व्यर्थ कर रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन कम से कम 10 से 20 मिनट भगवान के नाम, कथा या सत्संग के लिए निकालें। इससे मन को शांति मिलेगी और जीवन में सकारात्मकता आएगी। उन्होंने श्रीमद्भागवत को केवल धार्मिक ग्रंथ न मानकर जीवन का मार्गदर्शक बताया। कहा कि इसके अध्ययन और श्रवण से व्यक्ति को जीवन के उद्देश्य का बोध होता है और वह सही दिशा में आगे बढ़ता है। भगवान की कथाएं प्रेम, करुणा, सेवा, त्याग और विनम्रता का संदेश देती हैं, जो समाज को मजबूत बनाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि परिवार में नियमित रूप से धार्मिक चर्चा और भगवान का स्मरण हो तो घर का वातावरण सकारात्मक और संस्कारवान बनता है। मौके पर अंकुर गुप्ता, आशीष गुप्ता, अंकुश गोयल, सौरभ गुप्ता, ऋषभ गुप्ता, अतुल जैन और सचिन मौजूद रहे।
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श्री खाटू श्याम कीर्तन मंडल की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन सुनाती देवी चित्रलेखा।