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न अतिक्रमण हटा, न होर्डिंग
यमुनानगर, अमर उजाला
Updated Thu, 17 Oct 2013 12:36 AM IST
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रोड सेफ्टी की बैठक के बाद सीनियर अधिकारियों के निर्देशों को जूनियर अधिकारी कितनी तवज्जो देते हैं और मीटिंग में लिए निर्णयों पर कितना काम होता है यह सच बुधवार को देखने को मिला। मंगलवार को डीसी की अध्यक्षता में रोड सेफ्टी यानी ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर बैठक हुई थी।
बैठक में कुछ ऐसे निर्देश दिए गए थे, जिन्हें विभिन्न विभागों के अधिकारियों को बुधवार को ही पूरा करना था, लेकिन न अधिकारियों ने कदम उठाया और न ही हालात बदले। जो स्थिति शहर में ट्रैफिक व्यवस्था की बैठक से पहले थी, मीटिंग के बाद भी हालात वैसे ही रहे। बुधवार को ईद होने से ज्यादातर स्कूलों की छुट्टी थी, लेकिन कुछ स्कूल खुले हुए थे, जो स्कूल खुले हुए थे उनके बच्चे वैसे ही लटकर जा रहे थे जैसे ओम सेवा संस्थान के चेयरमैन सुशील आर्य ने रोड सेफ्टी की बैठक में तस्वीरें अधिकारियों के सामने रखी थी।
शहर के विभिन्न चौक पर वाहन चालक ट्रैफिक नियमों को दरकिनार कर ड्राइविंग कर रहे थे। शहर की विभिन्न सड़कों के साथ-साथ चौक के आसपास पर भी वाहन सड़कों के किनारे आड़े तिरछे खड़े थे। बात अगर शहर में लगे होर्डिंग की कि जाए तो अपनी पब्लिसिटी के लिए जहां जिसे जगह मिली वहां उसका होर्डिंग लगे थे। इन्हें उतारने के लिए भी बुधवार दोपहर तीन बजे तक कोई अभियान शहर में नहीं चल पाया था।
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ऑटो में भरे थे बच्चे
बुधवार को वैसे तो स्कूलों की छुट्टी थी, लेकिन कुछ स्कूल खुले थे। इनमें बच्चे ऑटो में ठूंस-ठूंसकर भरे थे। आठ से दस साल के बच्चों को ऑटो में ड्राइवर सीट के साथ वाली सीट पर बैठकर स्कूल से घर छोड़ने ऑटो दौड़ रहे थे। ड्राइवर की सीट के पास वाली सीट पर एक-एक बच्चा ही नहीं बल्कि दो-दो बच्चों को बैठाया था। अगर यह ऑटो गलती से थोड़ा सा भी अनबैलेंस हो जाए तो इन बच्चों के साथ घटना होने में कोई ज्यादा समय नहीं लगता। इस ऑटो में 18 बच्चे थे।
अपनी मर्जी से निकल रहे वाहन
बात अगर शहर के विभिन्न चौक पर ट्रैफिक व्यवस्था की कि जाए, तो स्थिति यहां भी नहीं सुधरी। सिग्नल लाइट लगी है, लेकिन जिस वाहन चालक को जैसे ही निकलने का मौका मिला वह निकल लिया, उसे ट्रैफिक सिग्नल लाइट से कुछ लेना ही नहीं था। वाहन चालक अपनी मनमर्जी से निकल रहे थे, और ट्रैफिक व्यवस्था यहां पूरी तरह चौपट दिख रही थी। ऑटो चालकों की मनमानी तो यहां प्रशासन पर भारी पड़ती दिख रही थी। सवारी चढ़ाने के चक्कर में ऑटो चालक बीच सड़क पर ही ऑटो खड़ा कर रहे हैं, जिससे पीछे जाम की स्थिति बन रही थी, लेकिन ऐसा करने पर इन ऑटो चालकों पर कार्रवाई करता कोई दूर तक नजर नहीं आया।
ट्रैफिक व्यवस्था पर भारी सड़क किनारे खड़े वाहन
अगर शहर के फुव्वारा चौक की बात कही जाए, तो यहां आसपास सड़क पर आड़े तिरछे वाहन खड़े थे। हालांकि प्रशासन की ओर से यहां पर सफेद पट्टी भी लगाई है, लेकिन सफेद पट्टी से कई-कई फीट पीछे तक वाहन खड़े थे। इससे लंबी चौड़ी सड़क भी संकरी हो गई थी। इन पर भी पूरे शहर में कहीं कोई कार्रवाई करता नहीं दिखा।
नहीं हट पाए होर्डिंग
रोड सेफ्टी की बैठक में डीसी और से निगम अधिकारियों को जगाधरी बस स्टैंड के पास लगे होर्डिंग हटाने के लिए बुधवार सुबह दस बजे तक का समय दिया गया था, लेकिन दोपहर तीन बजे तक ये भी वैसे ही लगे थे, जैसे मंगलवार को लगे थे। इसके साथ ही शहर का कोई भी ऐसा चौक नहीं दिखा जहां पर विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ताआें और धार्मिक संस्थान के होर्डिंग न लगे हों। यहां निगम की ओर से कोई कार्रवाई भी होती नहीं दिखी।
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बैठक में कुछ ऐसे निर्देश दिए गए थे, जिन्हें विभिन्न विभागों के अधिकारियों को बुधवार को ही पूरा करना था, लेकिन न अधिकारियों ने कदम उठाया और न ही हालात बदले। जो स्थिति शहर में ट्रैफिक व्यवस्था की बैठक से पहले थी, मीटिंग के बाद भी हालात वैसे ही रहे। बुधवार को ईद होने से ज्यादातर स्कूलों की छुट्टी थी, लेकिन कुछ स्कूल खुले हुए थे, जो स्कूल खुले हुए थे उनके बच्चे वैसे ही लटकर जा रहे थे जैसे ओम सेवा संस्थान के चेयरमैन सुशील आर्य ने रोड सेफ्टी की बैठक में तस्वीरें अधिकारियों के सामने रखी थी।
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शहर के विभिन्न चौक पर वाहन चालक ट्रैफिक नियमों को दरकिनार कर ड्राइविंग कर रहे थे। शहर की विभिन्न सड़कों के साथ-साथ चौक के आसपास पर भी वाहन सड़कों के किनारे आड़े तिरछे खड़े थे। बात अगर शहर में लगे होर्डिंग की कि जाए तो अपनी पब्लिसिटी के लिए जहां जिसे जगह मिली वहां उसका होर्डिंग लगे थे। इन्हें उतारने के लिए भी बुधवार दोपहर तीन बजे तक कोई अभियान शहर में नहीं चल पाया था।
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ऑटो में भरे थे बच्चे
बुधवार को वैसे तो स्कूलों की छुट्टी थी, लेकिन कुछ स्कूल खुले थे। इनमें बच्चे ऑटो में ठूंस-ठूंसकर भरे थे। आठ से दस साल के बच्चों को ऑटो में ड्राइवर सीट के साथ वाली सीट पर बैठकर स्कूल से घर छोड़ने ऑटो दौड़ रहे थे। ड्राइवर की सीट के पास वाली सीट पर एक-एक बच्चा ही नहीं बल्कि दो-दो बच्चों को बैठाया था। अगर यह ऑटो गलती से थोड़ा सा भी अनबैलेंस हो जाए तो इन बच्चों के साथ घटना होने में कोई ज्यादा समय नहीं लगता। इस ऑटो में 18 बच्चे थे।
अपनी मर्जी से निकल रहे वाहन
बात अगर शहर के विभिन्न चौक पर ट्रैफिक व्यवस्था की कि जाए, तो स्थिति यहां भी नहीं सुधरी। सिग्नल लाइट लगी है, लेकिन जिस वाहन चालक को जैसे ही निकलने का मौका मिला वह निकल लिया, उसे ट्रैफिक सिग्नल लाइट से कुछ लेना ही नहीं था। वाहन चालक अपनी मनमर्जी से निकल रहे थे, और ट्रैफिक व्यवस्था यहां पूरी तरह चौपट दिख रही थी। ऑटो चालकों की मनमानी तो यहां प्रशासन पर भारी पड़ती दिख रही थी। सवारी चढ़ाने के चक्कर में ऑटो चालक बीच सड़क पर ही ऑटो खड़ा कर रहे हैं, जिससे पीछे जाम की स्थिति बन रही थी, लेकिन ऐसा करने पर इन ऑटो चालकों पर कार्रवाई करता कोई दूर तक नजर नहीं आया।
ट्रैफिक व्यवस्था पर भारी सड़क किनारे खड़े वाहन
अगर शहर के फुव्वारा चौक की बात कही जाए, तो यहां आसपास सड़क पर आड़े तिरछे वाहन खड़े थे। हालांकि प्रशासन की ओर से यहां पर सफेद पट्टी भी लगाई है, लेकिन सफेद पट्टी से कई-कई फीट पीछे तक वाहन खड़े थे। इससे लंबी चौड़ी सड़क भी संकरी हो गई थी। इन पर भी पूरे शहर में कहीं कोई कार्रवाई करता नहीं दिखा।
नहीं हट पाए होर्डिंग
रोड सेफ्टी की बैठक में डीसी और से निगम अधिकारियों को जगाधरी बस स्टैंड के पास लगे होर्डिंग हटाने के लिए बुधवार सुबह दस बजे तक का समय दिया गया था, लेकिन दोपहर तीन बजे तक ये भी वैसे ही लगे थे, जैसे मंगलवार को लगे थे। इसके साथ ही शहर का कोई भी ऐसा चौक नहीं दिखा जहां पर विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ताआें और धार्मिक संस्थान के होर्डिंग न लगे हों। यहां निगम की ओर से कोई कार्रवाई भी होती नहीं दिखी।