{"_id":"69adf1fe1d84c3f53e0b1c04","slug":"recession-in-jagadhris-pottery-city-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1018-152495-2026-03-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: जगाधरी की बर्तन नगरी में छाई मंदी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: जगाधरी की बर्तन नगरी में छाई मंदी
Mon, 09 Mar 2026 03:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 09 Mar 2026 03:32 AM IST
विज्ञापन
जगाधरी में फैक्टरी के अंदर तैयार किए गए बर्तन। आर्काइव
सुरेश सैनी
यमुनानगर। अमेरिका-इस्रराइल और ईरान के बीच युद्ध का असर अब हरियाणा की प्रसिद्ध जगाधरी बर्तन नगरी पर भी दिखाई देने लगा है। विदेशों से कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने और धातुओं के दाम बढ़ने से यहां का कारोबार प्रभावित हो रहा है। अब कई इकाइयों में उत्पादन घटकर करीब 25 प्रतिशत तक ही रह गया है।
जगाधरी को देश-विदेश में बर्तन उद्योग के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है। यहां स्टील, एल्युमिनियम, पीतल और तांबे के बर्तन बड़े पैमाने पर तैयार किए जाते हैं, लेकिन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने से कच्चा माल आयात प्रभावित हो गया है। जगाधरी में तैयार स्टील, पीतल और एल्युमिनियम के बर्तन सऊदी अरब, अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप समेत 12 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। लेकिन इनमें अमेरिका से कच्चा माल आता है। उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण उत्पादन करना मुश्किल होता जा रहा है और मुनाफा लगभग खत्म हो गया है। संवाद
कच्चा माल न मिलने से उत्पादन पर असर
युद्ध के कारण अमेरिका समेत कई देशों से कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। पहले नियमित रूप से आने वाला कच्चा माल मुंबई आता था, लेकिन अब रुक-रुक कर पहुंच रहा है या बिल्कुल बंद हो गया है। इसके चलते फैक्ट्रियों में उत्पादन कम करना पड़ा है। कई छोटे उद्योगों ने फिलहाल सीमित उत्पादन शुरू रखा है, जबकि कुछ इकाइयों ने अस्थायी रूप से काम धीमा कर दिया है। बता दें जगाधरी बर्तन नगरी में स्टील के बर्तन बनाने की लगभग 450 से 500 छोटी-बड़ी इकाइयां संचालित हैं। इसके अलावा एल्युमिनियम की 125 से अधिक फैक्टरियां और पीतल व तांबे की करीब 100 इकाइयां भी काम कर रही हैं। इतनी बड़ी संख्या में उद्योग होने के कारण हजारों लोगों की रोजी-रोटी इस कारोबार पर निर्भर है।
विज्ञापन
-- -- --
धातुओं के दाम बढ़ने से बढ़ी लागत
युद्ध के चलते धातुओं के दामों में भारी उछाल आया है। कारोबारियों के अनुसार तांबे का भाव पहले करीब 500 रुपये प्रति किलो था, जो अब 800 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह एल्युमिनियम के दाम भी 150 रुपये से बढ़कर करीब 300 रुपये प्रति किलो तक हो गए हैं। जानकारी के अनुसार तांबा और जस्ता को मिलाकर पीतल तैयार किया जाता है, जबकि तांबा और कली के मिश्रण से कांस्य बनता है। वहीं कांस्य भी लगभग 1200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इन धातुओं की कीमत बढ़ने से बर्तनों के निर्माण की लागत काफी बढ़ गई है।
-- -- --
1500 करोड़ के उद्योग पर मंडराया संकट
जगाधरी बर्तन उद्योग का सालाना टर्नओवर करीब 1500 करोड़ रुपये के आसपास माना जाता है। यहां से बने बर्तन देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी भेजे जाते हैं। लगभग 250 से अधिक इकाइयां बर्तनों का निर्यात करती हैं, जिनमें से करीब 100 इकाइयां अरब देशों में सक्रिय हैं। जगाधरी में तैयार स्टील, पीतल और एल्युमिनियम के बर्तन सऊदी अरब, अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप समेत 12 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। लेकिन इनमें अमेरिका से कच्चा माल आता है। इस समय शादी का सीजन शुरू हो चुका है, जिसके चलते आमतौर पर बर्तनों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इस बार बाजार में अपेक्षित रौनक नहीं है।
-- -- --
दी जगाधरी मेटल मैन्युफैक्चरर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदर लाल का कहना है अमेरिका-इस्रराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर बर्तन नगरी पर असर दिखाई दे रहा है। 25 प्रतिशत ही कारोबार रह गया, इसका मुख्यकारण अमेरिका से कच्चा माल का न आना है। ऐसे में कई उद्योगपतियों के सामने उत्पादन लागत निकालना भी चुनौती बन गया है।
वहीं, मानकपुर इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उप प्रधान देवेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार उद्योगों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही। कच्चे माल के रेट लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे कई इकाइयां घाटे में चल रही हैं। व्यापारी समय पर टैक्स जमा करा रहे हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिल रहा।
विज्ञापन
यमुनानगर। अमेरिका-इस्रराइल और ईरान के बीच युद्ध का असर अब हरियाणा की प्रसिद्ध जगाधरी बर्तन नगरी पर भी दिखाई देने लगा है। विदेशों से कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने और धातुओं के दाम बढ़ने से यहां का कारोबार प्रभावित हो रहा है। अब कई इकाइयों में उत्पादन घटकर करीब 25 प्रतिशत तक ही रह गया है।
जगाधरी को देश-विदेश में बर्तन उद्योग के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है। यहां स्टील, एल्युमिनियम, पीतल और तांबे के बर्तन बड़े पैमाने पर तैयार किए जाते हैं, लेकिन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने से कच्चा माल आयात प्रभावित हो गया है। जगाधरी में तैयार स्टील, पीतल और एल्युमिनियम के बर्तन सऊदी अरब, अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप समेत 12 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। लेकिन इनमें अमेरिका से कच्चा माल आता है। उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण उत्पादन करना मुश्किल होता जा रहा है और मुनाफा लगभग खत्म हो गया है। संवाद
विज्ञापन
कच्चा माल न मिलने से उत्पादन पर असर
युद्ध के कारण अमेरिका समेत कई देशों से कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। पहले नियमित रूप से आने वाला कच्चा माल मुंबई आता था, लेकिन अब रुक-रुक कर पहुंच रहा है या बिल्कुल बंद हो गया है। इसके चलते फैक्ट्रियों में उत्पादन कम करना पड़ा है। कई छोटे उद्योगों ने फिलहाल सीमित उत्पादन शुरू रखा है, जबकि कुछ इकाइयों ने अस्थायी रूप से काम धीमा कर दिया है। बता दें जगाधरी बर्तन नगरी में स्टील के बर्तन बनाने की लगभग 450 से 500 छोटी-बड़ी इकाइयां संचालित हैं। इसके अलावा एल्युमिनियम की 125 से अधिक फैक्टरियां और पीतल व तांबे की करीब 100 इकाइयां भी काम कर रही हैं। इतनी बड़ी संख्या में उद्योग होने के कारण हजारों लोगों की रोजी-रोटी इस कारोबार पर निर्भर है।
विज्ञापन
धातुओं के दाम बढ़ने से बढ़ी लागत
युद्ध के चलते धातुओं के दामों में भारी उछाल आया है। कारोबारियों के अनुसार तांबे का भाव पहले करीब 500 रुपये प्रति किलो था, जो अब 800 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह एल्युमिनियम के दाम भी 150 रुपये से बढ़कर करीब 300 रुपये प्रति किलो तक हो गए हैं। जानकारी के अनुसार तांबा और जस्ता को मिलाकर पीतल तैयार किया जाता है, जबकि तांबा और कली के मिश्रण से कांस्य बनता है। वहीं कांस्य भी लगभग 1200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इन धातुओं की कीमत बढ़ने से बर्तनों के निर्माण की लागत काफी बढ़ गई है।
1500 करोड़ के उद्योग पर मंडराया संकट
जगाधरी बर्तन उद्योग का सालाना टर्नओवर करीब 1500 करोड़ रुपये के आसपास माना जाता है। यहां से बने बर्तन देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी भेजे जाते हैं। लगभग 250 से अधिक इकाइयां बर्तनों का निर्यात करती हैं, जिनमें से करीब 100 इकाइयां अरब देशों में सक्रिय हैं। जगाधरी में तैयार स्टील, पीतल और एल्युमिनियम के बर्तन सऊदी अरब, अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप समेत 12 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। लेकिन इनमें अमेरिका से कच्चा माल आता है। इस समय शादी का सीजन शुरू हो चुका है, जिसके चलते आमतौर पर बर्तनों की मांग बढ़ जाती है, लेकिन इस बार बाजार में अपेक्षित रौनक नहीं है।
दी जगाधरी मेटल मैन्युफैक्चरर्स एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के महासचिव सुंदर लाल का कहना है अमेरिका-इस्रराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर बर्तन नगरी पर असर दिखाई दे रहा है। 25 प्रतिशत ही कारोबार रह गया, इसका मुख्यकारण अमेरिका से कच्चा माल का न आना है। ऐसे में कई उद्योगपतियों के सामने उत्पादन लागत निकालना भी चुनौती बन गया है।
वहीं, मानकपुर इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उप प्रधान देवेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार उद्योगों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही। कच्चे माल के रेट लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे कई इकाइयां घाटे में चल रही हैं। व्यापारी समय पर टैक्स जमा करा रहे हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिल रहा।