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रमा एकादशी के व्रत से मिलता है मोक्ष : शारदा
Fri, 06 Nov 2026 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 06 Nov 2026 01:39 AM IST
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प्रवचन करते आचार्य शारदा मिश्रा। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने व व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह बात श्री हनुमान मंदिर रामपुरा कॉलोनी के आचार्य शारदा मिश्रा ने कार्तिक मास की कथा सुनाते हुए कही।
आचार्य मिश्रा ने कहा कि रमा एकादशी का व्रत करने से घर में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि आती है। इस दिन व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और भगवान विष्णु का ध्यान कर पूजा-अर्चना करनी चाहिए। तुलसी के पौधे के सामने दीपदान करने का भी विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि व्रत के दौरान अन्न का त्याग कर फलाहार ग्रहण किया जाता है।
श्रद्धालुओं को दिनभर भजन-कीर्तन में मन लगाना चाहिए और रात को जागरण करना चाहिए। अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन करवाकर तथा दान-दक्षिणा देने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए। कथा के प्रसंग में उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में राजा मुचुकुंद ने रमा एकादशी का व्रत किया था। इसके प्रभाव से उन्हें पापों से मुक्ति मिली और अंत में बैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई।
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उन्होंने बताया कि इसी कारण रमा एकादशी को पाप नाशिनी एकादशी भी कहा जाता है। आचार्य ने श्रद्धालुओं से कार्तिक मास में दान-पुण्य करने, दीपदान करने और भगवान विष्णु का नाम जपने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यों और भक्ति से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
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यमुनानगर। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रमा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने व व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह बात श्री हनुमान मंदिर रामपुरा कॉलोनी के आचार्य शारदा मिश्रा ने कार्तिक मास की कथा सुनाते हुए कही।
आचार्य मिश्रा ने कहा कि रमा एकादशी का व्रत करने से घर में सुख-शांति, धन-धान्य और समृद्धि आती है। इस दिन व्रती को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और भगवान विष्णु का ध्यान कर पूजा-अर्चना करनी चाहिए। तुलसी के पौधे के सामने दीपदान करने का भी विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि व्रत के दौरान अन्न का त्याग कर फलाहार ग्रहण किया जाता है।
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श्रद्धालुओं को दिनभर भजन-कीर्तन में मन लगाना चाहिए और रात को जागरण करना चाहिए। अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन करवाकर तथा दान-दक्षिणा देने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए। कथा के प्रसंग में उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में राजा मुचुकुंद ने रमा एकादशी का व्रत किया था। इसके प्रभाव से उन्हें पापों से मुक्ति मिली और अंत में बैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई।
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उन्होंने बताया कि इसी कारण रमा एकादशी को पाप नाशिनी एकादशी भी कहा जाता है। आचार्य ने श्रद्धालुओं से कार्तिक मास में दान-पुण्य करने, दीपदान करने और भगवान विष्णु का नाम जपने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यों और भक्ति से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है तथा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

प्रवचन करते आचार्य शारदा मिश्रा। संवाद