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Ram Mandir: टेंट से बने मंदिर की बनाई थीं सीढ़ियां, यमुनानगर के अश्वनी शर्मा गिराए गुंबद की दो ईंट साथ लेकर आए

Tue, 16 Jan 2024 11:19 AM IST
नवीन दलाल राहुल शर्मा, यमुनानगर (हरियाणा)
राहुल शर्मा, यमुनानगर (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Tue, 16 Jan 2024 11:19 AM IST
सार

यमुनानगर के कारसेवक अश्वनी शर्मा ने बताया कि वर्ष 1990 में दो अक्तूबर को अयोध्या पहुंचने का आह्वान हुआ। अश्वनी शर्मा ने बताया कि पहली बार विवादित ढांचे पर पहुंचने से पहले ही उन्हें व बाकी साथियों को लौटना पड़ा।

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Ram Mandir, Stairs made for temple made of tents, Ashwani Sharma of Yamunanagar told story
कार सेवक अश्वनी शर्मा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारियां देख कारसेवक गर्व महसूस कर रहे हैं, वहीं अक्तूबर-1990 व दिसंबर-1992 के दौरान आंखों देखे संघर्ष के क्षण व आपबीती घटनाएं याद कर सिहर जा रहे हैं। इन्हीं में एक रामपुरा निवासी 66 वर्षीय अश्वनी शर्मा हैं। उनकी मानें तो अयोध्या में श्रीराम लला के लिए टेंट से बने मंदिर की सीढ़ियां बनाई फिर यादगारी के लिए गिराए गुंबद की दो ईंट साथ लेकर आए। शहर लौटने पर रामपुरा के हनुमान मंदिर में फोटो भी खिंचवाई।

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अश्वनी शर्मा ने बताया कि वर्ष 1990 में दो अक्तूबर को अयोध्या पहुंचने का आह्वान हुआ। इसके लिए वह और अन्य साथी 27 सितंबर को शहर के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में इकट्ठे हुए। यहां से एक ट्रक अंबाला के लिए चला। जिसे पुलिस द्वारा रोका न जाए, इसलिए आगे सत्संग का बैनर लगाया गया था। अंबाला में उन्हें अयोध्या की ट्रेन के लिए टिकटें दी गईं।
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इसके बाद ट्रेन आते ही सभी बोगियों में चढ़ गए। लेकिन ट्रेन के उत्तरप्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही हर स्टेशन पर पुलिस कारसेवकों को उतारती गई। इस तरह लखनऊ पहुंचने तक बहुत कम कारसेवक रह गए, जो लखनऊ से गोरखपुर की ट्रेन में बैठ गए। यह ट्रेन लखनऊ से चलते ही रास्ते में रुकी। इससे पहले ट्रेन से पुलिस पकड़ती, सभी कार सेवक ट्रेन से उतर कर खेतों में घुस गए। जहां से जंगल के रास्ते तीन दिन व रात पैदल चले।
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गांवों में ग्रामीणों ने पत्तल पर भोजन में दाल-चावल दिए। ऐसे करते सभी कारसेवक गोंडा पहुंचे, पर यहां पुलिस ने पकड़ लिया। सभी को बसों से ले जाया जाने लगा, पर उनमें काफी लोग खिड़कियों से कूदकर निकल एक अक्तूबर को अयोध्या पहुंचे। यहां सरयू नदी समीप जंगल में रहे। तभी ऊपर हेलीकॉप्टर के जरिए उन पर नजर रखी जाने लगी। देखते ही पुलिस ने कारसेवकों को घेर लिया। संवाद

विवादित ढांचे को देखा फिर अखाड़े में ठहरे
अश्वनी शर्मा ने बताया कि पहली बार विवादित ढांचे पर पहुंचने से पहले ही उन्हें व बाकी साथियों को लौटना पड़ा। लेकिन वर्ष-1992 में तीन दिसंबर फिर अयोध्या रवाना हुए, जहां चार दिसंबर को पहुंच गए थे। पहले दिन सभी ने विवादित ढांचे को देखा फिर एक अखाड़े में ठहरे। पांच दिसंबर को जय श्री राम के जयकारों से गूंजने लगे और गुंबद गिरा दिए गए।


इसके बाद जो मंदिर टेंट से बनाया गया, उसमें रेता-बजरी से उन्होंने व अन्य साथियों ने सीढ़ियां बनाई। साथ ही यादगारी के लिए गिराए गुंबद के मलबा से दो ईंट ले ली, जिसे अयोध्या से यमुनानगर लौट स्टोर में रख दिया। साथ ही रामपुरा हनुमान मंदिर में साथियों के साथ फोटो भी कराई।

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