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ईमानदारी की कमाई और अच्छी नीयत से होती बरकत : उमाकांत
Wed, 24 Jun 2026 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 24 Jun 2026 12:19 AM IST
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जड़ौदा में आयोजित सत्संग में उपस्थित संगत। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। संत बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि लोगों के जीवन में बरकत न होने का मुख्य कारण उनकी अनंत होती इच्छाएं और गलत कमाई है। व्यक्ति अपने प्रारब्ध और भाग्य को समझने के बजाय अधिक से अधिक धन-संपत्ति जुटाने की दौड़ में लगा रहता है, जिसके कारण उसे मानसिक शांति और वास्तविक सुख नहीं मिल पाता। वह मंगलवार को जड़ौदा में आयोजित सत्संग में प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं कभी समाप्त नहीं होतीं। लखपति, करोड़पति बनना चाहता है, करोड़पति अरबपति और अरबपति इससे भी अधिक धन पाने की इच्छा रखता है। कई लोग झूठ, बेईमानी, चोरी, लूट और जीवों को कष्ट पहुंचाकर धन एकत्रित कर लेते हैं, लेकिन ऐसा धन उनके पास टिकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां कभी अरबों-खरबों की संपत्ति रखने वाले लोग समय के साथ आर्थिक संकट में आ गए। इसलिए बरकत केवल धन इकट्ठा करने से नहीं, बल्कि अच्छी नीयत और ईमानदार कमाई से मिलती है। जब व्यक्ति सत्य और परिश्रम के मार्ग पर चलता है तो उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
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बाबा उमाकांत ने कहा कि वर्तमान समय में घर-परिवार छोड़कर भगवान की तलाश में निकलने से भगवान नहीं मिलेंगे। उन्होंने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए गृहस्थ जीवन का त्याग करना आवश्यक नहीं है। व्यक्ति अपने परिवार, समाज और कार्यों का निर्वहन करते हुए भी आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है।
उन्होंने नए श्रद्धालुओं को नामदान प्रदान करते हुए बताया कि नामदान आत्मा के कल्याण का मार्ग है। नामदान लेने वाले व्यक्ति को अपना घर, परिवार, संपत्ति, जाति या धर्म छोड़ने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने अनुयायियों को शाकाहारी, नशामुक्त और चरित्रवान जीवन अपनाने का संदेश दिया तथा प्रतिदिन कुछ समय साधना और आत्मचिंतन के लिए निकालने की प्रेरणा दी। सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
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जगाधरी। संत बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि लोगों के जीवन में बरकत न होने का मुख्य कारण उनकी अनंत होती इच्छाएं और गलत कमाई है। व्यक्ति अपने प्रारब्ध और भाग्य को समझने के बजाय अधिक से अधिक धन-संपत्ति जुटाने की दौड़ में लगा रहता है, जिसके कारण उसे मानसिक शांति और वास्तविक सुख नहीं मिल पाता। वह मंगलवार को जड़ौदा में आयोजित सत्संग में प्रवचन कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं कभी समाप्त नहीं होतीं। लखपति, करोड़पति बनना चाहता है, करोड़पति अरबपति और अरबपति इससे भी अधिक धन पाने की इच्छा रखता है। कई लोग झूठ, बेईमानी, चोरी, लूट और जीवों को कष्ट पहुंचाकर धन एकत्रित कर लेते हैं, लेकिन ऐसा धन उनके पास टिकता नहीं है।
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उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां कभी अरबों-खरबों की संपत्ति रखने वाले लोग समय के साथ आर्थिक संकट में आ गए। इसलिए बरकत केवल धन इकट्ठा करने से नहीं, बल्कि अच्छी नीयत और ईमानदार कमाई से मिलती है। जब व्यक्ति सत्य और परिश्रम के मार्ग पर चलता है तो उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
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बाबा उमाकांत ने कहा कि वर्तमान समय में घर-परिवार छोड़कर भगवान की तलाश में निकलने से भगवान नहीं मिलेंगे। उन्होंने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए गृहस्थ जीवन का त्याग करना आवश्यक नहीं है। व्यक्ति अपने परिवार, समाज और कार्यों का निर्वहन करते हुए भी आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है।
उन्होंने नए श्रद्धालुओं को नामदान प्रदान करते हुए बताया कि नामदान आत्मा के कल्याण का मार्ग है। नामदान लेने वाले व्यक्ति को अपना घर, परिवार, संपत्ति, जाति या धर्म छोड़ने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने अनुयायियों को शाकाहारी, नशामुक्त और चरित्रवान जीवन अपनाने का संदेश दिया तथा प्रतिदिन कुछ समय साधना और आत्मचिंतन के लिए निकालने की प्रेरणा दी। सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

जड़ौदा में आयोजित सत्संग में उपस्थित संगत। प्रवक्ता