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Yamuna Nagar News: मानसून में जलभराव से बचाव की तैयारी सुस्त
Mon, 27 May 2024 03:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 27 May 2024 03:21 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मानसून की बारिश में शहर को जलभराव से बचाने को तैयारी खास नहीं दिख रही। एक माह बाद मानसून आने की संभावना है, पर अभी तक शहर के नालों की सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया है। ये काम न तो ठेके पर और न ही नगर निगम ने खुद अपने स्तर पर किया है, जिसमें गत वर्षों की तरह देरी हो रही है। इसका खामियाजा शहर के लोगों को मानसून में जलभराव के रूप में भुगतना पड़ सकता है।
नगर निगम यमुनानगर जगाधरी सदन की बैठकों में कार्यकाल रहते पार्षद कई बार मानसून से पूर्व ही नालों की सफाई की मांग कर चुके हैं। इस पर बकायदा पूरे साल छह-छह के ठेके देकर नालों की सफाई कराए जाने का प्रस्ताव भी पास कराया था, किंतु इस पर कार्रवाई कागजों में ही है। क्योंकि प्रस्ताव पास होने के बावजूद न तो नगर निगम द्वारा अपने स्तर पर नालों की सफाई की गई और न ही इसका ठेका दिया। हालात ये है कि शहर के ज्यादातर नाले गंदगी से अटे हैं, जिससे मानसून की बारिश में नालों से आसपास जलभराव होने की आशंका है।
नगर निगम यमुनानगर जगाधरी में 92 किलोमीटर लंबाई के 39 नाले हैं। जिनकी सफाई के लिए निगम अफसर दो जोन बांट ठेका देता है। इसमें जोन-1 में जगाधरी के वार्ड-1 से सात के 28.5 किमी. के 12 नाले हैं और जोन-दो में यमुनानगर के वार्ड-8 से 22 के 63.5 किमी. के 27 नाले हैं। दोनों जोन में नालों की ठेके पर सफाई कराने में एक से सवा करोड़ खर्च आने का अनुमान रहता है।
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निवर्तमान पार्षदों में वार्ड तीन से हरमीन कोहली, चार से देवेंद्र सिंह, पांच से विनय कांबोज, सात से रामआसरा भारद्वाज, आठ से विनोद मरवाह, 13 से निर्मल चौहान ने कहा कि निगम अफसरों को लोकसभा चुनाव बारे पता था, तब भी आचार संहिता लगने से पहले नालों की सफाई का ठेका नहीं दिया। और आचार संहिता में यह काम ठेके पर नहीं दिया जा सका।
आचार संहिता हटने पर नालों की सफाई के लिए पहली बार में ही टेंडर प्रक्रिया पूरी होती है तो भी उसमें एक-डेढ़ माह लग सकता है। यानी गत वर्षों जैसे इस बार भी मानसून के बीच नालों की सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर करोड़ों रुपये बर्बाद होंगे। यही देख सदन में पूरे साल नालों की सफाई का प्रस्ताव पास कराया था, जिस पर कार्रवाई नहीं हुई। हर साल जिला प्रशासन की ओर से 15 जून तक तीन चरणों में नाले साफ करने का लक्ष्य रहता है।
अभी तक इसके लिए न तो नगर निगम ने अपने स्तर पर नालों की सफाई शुरू की है और न इसका ठेका दिया है। जबकि नालों को समय रहते साफ न किया तो मानसून की बारिश में यह ओवरफ्लो होकर शहर में जलभराव की वजह बनेंगे। जिनकी सफाई कराना भी टेढ़ी खीर होगा, क्योंकि नाले अधिकांश जगह से सीमेंट स्लैब डाल कवर कर दिए हैं।
मानसून की बारिश से पहले यह कार्य पूरा कराने का प्रयास रहेगा। इसके लिए संबंधित अफसरों को दिशा निर्देश जारी देंगे। - आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।
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यमुनानगर। मानसून की बारिश में शहर को जलभराव से बचाने को तैयारी खास नहीं दिख रही। एक माह बाद मानसून आने की संभावना है, पर अभी तक शहर के नालों की सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया है। ये काम न तो ठेके पर और न ही नगर निगम ने खुद अपने स्तर पर किया है, जिसमें गत वर्षों की तरह देरी हो रही है। इसका खामियाजा शहर के लोगों को मानसून में जलभराव के रूप में भुगतना पड़ सकता है।
नगर निगम यमुनानगर जगाधरी सदन की बैठकों में कार्यकाल रहते पार्षद कई बार मानसून से पूर्व ही नालों की सफाई की मांग कर चुके हैं। इस पर बकायदा पूरे साल छह-छह के ठेके देकर नालों की सफाई कराए जाने का प्रस्ताव भी पास कराया था, किंतु इस पर कार्रवाई कागजों में ही है। क्योंकि प्रस्ताव पास होने के बावजूद न तो नगर निगम द्वारा अपने स्तर पर नालों की सफाई की गई और न ही इसका ठेका दिया। हालात ये है कि शहर के ज्यादातर नाले गंदगी से अटे हैं, जिससे मानसून की बारिश में नालों से आसपास जलभराव होने की आशंका है।
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नगर निगम यमुनानगर जगाधरी में 92 किलोमीटर लंबाई के 39 नाले हैं। जिनकी सफाई के लिए निगम अफसर दो जोन बांट ठेका देता है। इसमें जोन-1 में जगाधरी के वार्ड-1 से सात के 28.5 किमी. के 12 नाले हैं और जोन-दो में यमुनानगर के वार्ड-8 से 22 के 63.5 किमी. के 27 नाले हैं। दोनों जोन में नालों की ठेके पर सफाई कराने में एक से सवा करोड़ खर्च आने का अनुमान रहता है।
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निवर्तमान पार्षदों में वार्ड तीन से हरमीन कोहली, चार से देवेंद्र सिंह, पांच से विनय कांबोज, सात से रामआसरा भारद्वाज, आठ से विनोद मरवाह, 13 से निर्मल चौहान ने कहा कि निगम अफसरों को लोकसभा चुनाव बारे पता था, तब भी आचार संहिता लगने से पहले नालों की सफाई का ठेका नहीं दिया। और आचार संहिता में यह काम ठेके पर नहीं दिया जा सका।
आचार संहिता हटने पर नालों की सफाई के लिए पहली बार में ही टेंडर प्रक्रिया पूरी होती है तो भी उसमें एक-डेढ़ माह लग सकता है। यानी गत वर्षों जैसे इस बार भी मानसून के बीच नालों की सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर करोड़ों रुपये बर्बाद होंगे। यही देख सदन में पूरे साल नालों की सफाई का प्रस्ताव पास कराया था, जिस पर कार्रवाई नहीं हुई। हर साल जिला प्रशासन की ओर से 15 जून तक तीन चरणों में नाले साफ करने का लक्ष्य रहता है।
अभी तक इसके लिए न तो नगर निगम ने अपने स्तर पर नालों की सफाई शुरू की है और न इसका ठेका दिया है। जबकि नालों को समय रहते साफ न किया तो मानसून की बारिश में यह ओवरफ्लो होकर शहर में जलभराव की वजह बनेंगे। जिनकी सफाई कराना भी टेढ़ी खीर होगा, क्योंकि नाले अधिकांश जगह से सीमेंट स्लैब डाल कवर कर दिए हैं।
मानसून की बारिश से पहले यह कार्य पूरा कराने का प्रयास रहेगा। इसके लिए संबंधित अफसरों को दिशा निर्देश जारी देंगे। - आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।