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राज्य पुरस्कार के लिए हुआ चयन, अब ओलंपिक में दौड़ने का सपना
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राज्य पुरस्कार के लिए चयनित सेक्टर-17 निवासी एथलीट दिव्यांका चौधरी का सपना अब ओलंपिक में दौड़ने का है। इसके लिए वह कड़ी मेहनत भी कर रही है। बातचीत में उन्होंने बताया कि वे रोजाना सुबह तीन घंटे और शाम को चार घंटे अभ्यास करती हैं।
दिव्यांका चौधरी का दौड़ में कोई सानी नहीं है। जब वे दौड़ती हैं तो हवा से बातें करती हैं। बांग्लादेश के ढाका में 10 जनवरी 2021 को हुई साउथ एशियन मैराथन में उन्होंने कांस्य पदक जीता था। 42 किलोमीटर 195 मीटर की दौड़ उन्होंने तीन घंटे सात मिनट में पूरी की थी। इसके अलावा दिल्ली में हुई एयरटेल मैराथन में 21 किलोमीटर की दौड़ एक घंटा 27 सेकेंड में पूरी कर जीत हासिल की थी। 23 वर्षीय दिव्यांका जिले से राष्ट्रीय स्तर की दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेकर नकद पुरस्कार भी जीत चुकी हैं। गत माह 24 फरवरी को ओड़िसा के भुवनेश्वर में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी एथलेटिक चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीता। इसके आधार पर उनका चयन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए हुआ है जो 26 जून को चीन के चेंगडू में होगी। उक्त उपलब्धियां उन्हें यूं ही हासिल नहीं हुई, बल्कि इसके लिए उन्होंने कठिन परिश्रम किया है। साथ ही पढ़ाई भी करतीं हैं।
दिव्यांका ने वर्ष 2012 में दौड़ना शुरू किया था। शुरू में 100 मीटर बड़ी मुश्किल से दौड़ पाती थी। उनके कोच प्रवीण कुमार साथ रहते थे। उन्होंने दौड़ के लिए दिव्यांका को प्रेरित किया। फिर जहां भी मैराथन होती थी, वहां उसका प्रवेश कराते थे। दिव्यांका मूल रूप से यूपी के जिला सहारनपुर के गांव जबिरन की रहने वाली है। वह हरियाणा के लिए खेलती है।
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जिले के एथलेटिक्स कोच प्रवीण कुमार ने बताया कि दिव्यांका ने काफी मेहनत की है। यह अवार्ड उसकी मेहनत का फल है। बेटी की सफलता से वह खुश हैं। कोरोना महामारी में भी वह अपना अभ्यास करती रही।
2016- नेशनल क्रॉस कंट्री में ब्रांज
2017- यमुनानगर मैराथन में गोल्ड
2018- नेशनल क्रॉस कंट्री में ब्रांज
2019- एमटी मैराथन में गोल्ड
2019- हैदराबाद मैराथन में ब्रांज
2020- नेशनल मैराथन में सिल्वर
2020- आसाम इंटरनेशनल मैराथन में गोल्ड
ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी मैराथन में 2017 में ब्रांज व 2018 में गोल्ड मेडल।
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दिव्यांका चौधरी का दौड़ में कोई सानी नहीं है। जब वे दौड़ती हैं तो हवा से बातें करती हैं। बांग्लादेश के ढाका में 10 जनवरी 2021 को हुई साउथ एशियन मैराथन में उन्होंने कांस्य पदक जीता था। 42 किलोमीटर 195 मीटर की दौड़ उन्होंने तीन घंटे सात मिनट में पूरी की थी। इसके अलावा दिल्ली में हुई एयरटेल मैराथन में 21 किलोमीटर की दौड़ एक घंटा 27 सेकेंड में पूरी कर जीत हासिल की थी। 23 वर्षीय दिव्यांका जिले से राष्ट्रीय स्तर की दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेकर नकद पुरस्कार भी जीत चुकी हैं। गत माह 24 फरवरी को ओड़िसा के भुवनेश्वर में हुई ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी एथलेटिक चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीता। इसके आधार पर उनका चयन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए हुआ है जो 26 जून को चीन के चेंगडू में होगी। उक्त उपलब्धियां उन्हें यूं ही हासिल नहीं हुई, बल्कि इसके लिए उन्होंने कठिन परिश्रम किया है। साथ ही पढ़ाई भी करतीं हैं।
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दिव्यांका ने वर्ष 2012 में दौड़ना शुरू किया था। शुरू में 100 मीटर बड़ी मुश्किल से दौड़ पाती थी। उनके कोच प्रवीण कुमार साथ रहते थे। उन्होंने दौड़ के लिए दिव्यांका को प्रेरित किया। फिर जहां भी मैराथन होती थी, वहां उसका प्रवेश कराते थे। दिव्यांका मूल रूप से यूपी के जिला सहारनपुर के गांव जबिरन की रहने वाली है। वह हरियाणा के लिए खेलती है।
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जिले के एथलेटिक्स कोच प्रवीण कुमार ने बताया कि दिव्यांका ने काफी मेहनत की है। यह अवार्ड उसकी मेहनत का फल है। बेटी की सफलता से वह खुश हैं। कोरोना महामारी में भी वह अपना अभ्यास करती रही।
2016- नेशनल क्रॉस कंट्री में ब्रांज
2017- यमुनानगर मैराथन में गोल्ड
2018- नेशनल क्रॉस कंट्री में ब्रांज
2019- एमटी मैराथन में गोल्ड
2019- हैदराबाद मैराथन में ब्रांज
2020- नेशनल मैराथन में सिल्वर
2020- आसाम इंटरनेशनल मैराथन में गोल्ड
ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी मैराथन में 2017 में ब्रांज व 2018 में गोल्ड मेडल।