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दिवाली के सातवें दिन बाद और जहरीली हुई शहर की हवा, प्रदूषण लेवल 500 के पार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 04 Nov 2019 01:15 AM IST
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Pollution
करनाल: प्रदूषण के चलते करनाल शहर का हाल। लोगो को जीना हुआ मुहाल।
टिवनसिटी में प्रदूषण का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। एयर क्वालिटी इंडेक्स 500 के उच्चतम स्तर को भी पार कर गया है। सुबह 11 बजे का औसत स्तर 408 रहा, जो दिवाली के सात दिन बाद सबसे ज्यादा रिकार्ड किया गया। वहीं पीएम 10 का अधिकतम स्तर 500, न्यूनतम स्तर 167 और औसत स्तर 368 दर्ज किया गया। इससे शहर में स्मॉग की घनी चादर छाई रही और हवा गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर स्तर के बीच रहने से लोगों को दमघोंटू हवा में सांस लेने को मजबूर होना पड़ा। अभी बारिश की भी कोई संभावना नहीं है, ऐसे में अगले सप्ताह तक खराब प्रदूषण का संकट बरकरार रहेगा। सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार हवा की तेज गति के बावजूद प्रदूषण स्तर में कुछ सुधार नहीं हुआ बल्कि इंडस्ट्री, पराली और अन्य तरह का धुआं शहर के वातावरण में शामिल हो गया। अचानक एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ने की वजह तेज हवा चलना माना जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ का भी असर दिखाई दे रहा है।
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रविवार को रिकार्ड स्तर
सुबह 8 बजे 399
9 बजे 403
10 बजे 406
11 बजे 408
12 बजे 406
एक बजे 404
दो बजे 402
तापमान में हो रही है गिरावट
-मौसम विभाग के अनुसार रविवार सुबह साढ़े आठ बजे सापेक्ष आर्द्रता 85 प्रतिशत दर्ज की गई। अब अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भी गिरावट शुरू हो गई है और अगले दो से तीन दिन अधिकतमान 28 डिग्री के आस पास बने रहने का अनुमान है। सोमवार और मंगलवार को दिन में तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है जिससे धुंध से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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बॉक्स
एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक
-एक्यूआई को 0-50 के बीच बेहतर, 51-100 के बीच संतोषजनक, 101 से 200 के बीच सामान्य, 201 से 300 के बीच खराब, 301 से 400 के बीच बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है। वहीं, हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 60 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
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प्रदूषण बढ़ाने के ये तीन बड़े कारण
पराली
जिले में धान की कटाई हो चुकी है और खेतों में पड़ी पराली और अवशेषों को किसान जला रहे हैं। दिवाली पर पटाखों के धुएं के बाद फिलहाल सबसे ज्यादा प्रदूषण पराली से ही हो रहा है।
इंडस्ट्री
जिले में स्थित प्लाईवुड, मेटल, स्टोन क्रशर, स्क्रिनिंग प्लांट के दो हजार से ज्यादा उद्योग हैं। जो धुएं और धूल कण भी प्रदूषण को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।
वाहन
बड़ी संख्या में वाहनों का धुआं भी वायु प्रदूषण की बड़ी वजह है। शहर की सड़कों पर खटारा वाहनों को धुआं उगलते देखा जा सकता है। कभी भी धुआं उगलते वाहनों को रोककर कार्रवाई नहीं की जाती है।
दो जगह पराली जलाने की शिकायत मिली
कृषि विभाग के कंट्रोल रूम पर रविवार को दो जगह पराली जलने की शिकायत मिली। जिनमें से एक खारवन गांव में दूसरी रादौर क्षेत्र की थी। कृषि विभाग की टीम दोनों मामलों की जांच कर रही है। इससे पहले हरसैक सेंटर हिसार की तरफ से सेटेलाइट के माध्यम से जिले में निगरानी की जा रही है और रोजाना पराली जलाने की कई लोकेशन शेयर की जाती है। जिसके आधार पर कृषि अधिकारी कानूनी कार्रवाई अमल में लाते हैं।

जिले में पराली जलाने के मामले इस बार काफी कम हो गए हैं। लगातार किसानों को जागरूक भी कर रहे हैं। उनसे अपील है कि वे पराली को जलाने की बजाय अन्य कामों में प्रयोग करें। ताकि पर्यावरण ठीक रहे और जमीन की उर्वरक शक्ति भी बनी रहे। -डॉ. सुरेंद्र यादव, कृषि उपनिदेशक
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