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दो महीने में प्लाइवुड इंडस्ट्री को दिए जाएंगे नए लाइसेंस

अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर। Updated Wed, 24 May 2017 12:35 AM IST
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यमुनानगर। प्रदेश सरकार द्वारा प्लाइवुड इंडस्ट्री में नए लाइसेंस देने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में वुड इंडस्ट्री से जुड़े उद्योगपति और किसान मंगलवार को पंचकूला मेें वन विभाग के प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर पीपी भोज वैद सहित अन्य वन विभाग के अन्य उच्चाधिकारियों से मिलें। अधिकारियों ने दो महीने में नए लाइसेंस दिए जाने का आश्वासन दिया है। बैठक मेें हरियाणा प्लाइवुड मेन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने एसोसिएशन के प्रेजीडेंट अजय मानिकटाला की अध्यक्षता में बैठक में हिस्सा लिया। अजय मानिकटाला ने बताया कि एसोसिएशन ने प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर के समक्ष प्रमुख मांग रखी प्लाइवुड प्रेस को डिलाइट-फ्री और चीपर को लाइसेंस फ्री किया जाए। प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ने इस पर सहमति जताई। इसके अलावा नए लाइसेंस मे आठ 8 फुटी पीलिंग और स्लाइसर की मांग तथा लाइसेंस फार्म के सरलीकरण की मांग भी रखी गई। प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ने इस मांग को मानते हुए सभी मांगों को स्टेट लेवल कमेटी में रखने की बात कही। वन विभाग अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि नए लाइसेंस के फार्म का सरलीकरण भी किया जाएगा और अगले दो महीने में नए लाइसेंस भी जारी कर दिए जाएंगे। प्रतिनिधिमंडल में महासचिव जेके बियानी, उपाध्यक्ष रामप्रकाश, सतीश चौपाल, संजीव बिट्टा, संदीप जिंदल, अनिल गुप्ता और सतीश सैनी शामिल थे।
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किसान को मिले लाभकारी मूल्य
हरियाणा पाप्लर-सफेदा उत्पादक किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारी भी वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मिलें और जल्द से जल्द नए लाइसेंस देने की मांग की। समिति की ओर से प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर को मांगपत्र भी दिया गया। समिति सदस्य सतपाल कौशिक ने बताया कि मांगपत्र के माध्यम से कहा गया कि वन विभाग ने किसान के खेतों में एग्रो-फोरेस्ट्री को बढ़ावा तो दिलवाया है, लेकिन पिछले कई वर्षों से इस बात की तरफ ध्यान नहीं दिया कि खेतों में जो पाप्पर-सफेदा की फसल लगवाई जा रही है उसका उपयोग और किसान को उसकी फसल का लाभकारी मूल्य कैसे मिलेगा। जब तक प्रदेश में पाप्लर-सफेदा आधारित प्लाइबोर्ड से संबंधित इकाईयां अधिक से अधिक नहीं लगाई जाएंगी, तब तक पाप्लर-सफेदा की मांग नहीं बढ़ेगी और जब तक मांग नहीं बढ़ेगी तब तक पाप्लर-सफेदा का लाभकारी मूल्य किसान को नहीं मिलेगा।


समिति ने दिए ये सुझाव
1. प्लाइबोर्ड इकाई में प्रैस (पेस्टिंग) को लाइसेंस से मुक्त होना चाहिए क्योंकि इसमें सीधे रूप से लकड़ी का प्रयोग नहीं होता है। इसमें आरा और पीलिंग द्वारा संशोधित लकड़ी को ग्लू के साथ पेस्ट किया जाता है और इससे बोर्ड प्लाई बनती है।
2. यदि वन विभाग देश और प्रदेश में पर्यावरण को संतुलित रखना अपनी जिम्मेदारी समझता है तो एग्रो-फोरेस्ट्री की खेती करने वालों को अपनी उगाई जाने वाली फसल का लाभकारी मूल्य मिलने का भरोसा होना चाहिए।
3. वन विभाग द्वारा पाप्लर-सफेदा की आमद का अवलोकन करने के उपरांत लाइसेंसों में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है, जो बहुत कम है क्योंकि लकड़ी की गणना के अनुसार अकेली यमुनानगर-जगाधरी लकड़ी मंडियों में अढ़ाई लाख क्विंटल अधिक प्रतिदिन पाप्लर-सफेदा लकड़ी की आमद है और इकाइयां एक लाख क्विंटल से भी कम की हैं।
4. एलएलसी द्वारा 900 से अधिक इकाईयां मंजूर की हुई हैं, लेकिन लाइसेंस देने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि पिछले सात महीने में एक भी लाइसेंस नहीं दिया गया है।
5.पाप्लर-सफेदा की फसल कृषि उपज है। सरकार इस पर मार्केट फीस इकट्ठी कर रही है इसलिए इस पर आधारित सभी उद्योगों को लाइसेंस मुक्त करना चाहिए।
6. वर्ष 2007 में सीईसी द्वारा 5036 कास्ट की इकाईयां स्वीकृति की हुई है, लेकिन उनमें से 400 से अधिक अभी भी जारी नहीं हुई हैं। जबकि लाइसेंस आजकल मार्केट में करोड़ों रुपयों में बिक रहे हैं।
7. उन लोगों को नई इकाई लगाने की अनुमति दी जाए जो छह माह में उद्योग लगाएं और उनसे गारंटी भी ली जाए कि यदि वे 6 महीने में उद्योग नहीं लगाएंगे तो उनकी दी गई गारंटी जब्त कर ली जाएगी।
 
नए लाइसेंस मिलने से हजारों को मिलेगा रोजगार
देश में प्लाइवुड उत्पादन में यमुनानगर जिला पहले नंबर पर है। जिले में प्लाइवुड आधारित 300 से अधिक इकाइयां हैं, जिनमें लाखों की संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं। प्लाई और बोर्ड बनाने में पाप्लर-सफेदा कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। जिले के हजारों किसानों के अलावा हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के किसान अपना पाप्लर-सफेदा जिले की मंडियों में लेकर आते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से पाप्लर-सफेदा के दामों काफी गिर गए हैं। किसान और आढ़ती काफी समय से प्लाइवुड के नए लाइसेंस दिए जाने की मांग कर रहे हैं। नए लाइसेंस दिए जाने पर यमुनानगर जिले में हजारों श्रमिकों और लोगों को रोजगार मिलेगा।

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