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Yamuna Nagar News: होला महल्ला समागम में उमड़ी संगत
Mon, 17 Mar 2025 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 17 Mar 2025 12:34 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। पिछले छह दिनों से चल रहे होला महल्ला समागम के अंतिम दिन बड़ी संख्या में अलग-अलग जगहों से आई संगत डेरा संत निश्चल सिंह थड़ा साहिब जोड़ियां में नतमस्तक हुई। गुरमत समागम में आई संगत को विशेष तौर पर पहुंचे संत महापुरुषों, कीर्तनी जत्थों व कथा वाचकों ने शबद कीर्तन व गुरमत विचारों से निहाल किया।
सजे दीवान में संत जोगा सिंह करनाल, संत चमकौर सिंह,संत सुरिंद्र सिंह मीठा टीवाना, संत कुलदीप सिंह,भाई हरविंद्रपाल सिंह, भाई अमनदीप सिंह, भाई ओंकार सिंह, भाई सतनाम सिंह कोहाड़का, भाई गुरकीरत सिंह कोहाड़का, भाई जसबीर सिंह पांवटा साहिब, भाई जगतेश्वर सिंह पटियाला, भाई बलप्रीत सिंह लुधियाना, भाई सतनाम सिंह के अलावा सिख कौम के संत महापुरुष, प्रसिद्ध रागी व प्रचारक संगत को गुरबाणी कीर्तन गुरु इतिहास से जोड़ा।
डेरा संत निश्चल सिंह थड़ा साहिब जोड़ियां के मुख्य प्रबंधक महंत कर्मजीत सिंह ने समागम में पहुंची संगत का धन्यवाद करते हुए कहा यह महान समागम समूह इलाके की संगतों, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों व सिख जत्थेबंदियों के विशेष सहयोग से ही संपन्न होते हैं, इसलिए संगत बधाई की पात्र हैं।
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यमुनानगर। पिछले छह दिनों से चल रहे होला महल्ला समागम के अंतिम दिन बड़ी संख्या में अलग-अलग जगहों से आई संगत डेरा संत निश्चल सिंह थड़ा साहिब जोड़ियां में नतमस्तक हुई। गुरमत समागम में आई संगत को विशेष तौर पर पहुंचे संत महापुरुषों, कीर्तनी जत्थों व कथा वाचकों ने शबद कीर्तन व गुरमत विचारों से निहाल किया।
सजे दीवान में संत जोगा सिंह करनाल, संत चमकौर सिंह,संत सुरिंद्र सिंह मीठा टीवाना, संत कुलदीप सिंह,भाई हरविंद्रपाल सिंह, भाई अमनदीप सिंह, भाई ओंकार सिंह, भाई सतनाम सिंह कोहाड़का, भाई गुरकीरत सिंह कोहाड़का, भाई जसबीर सिंह पांवटा साहिब, भाई जगतेश्वर सिंह पटियाला, भाई बलप्रीत सिंह लुधियाना, भाई सतनाम सिंह के अलावा सिख कौम के संत महापुरुष, प्रसिद्ध रागी व प्रचारक संगत को गुरबाणी कीर्तन गुरु इतिहास से जोड़ा।
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डेरा संत निश्चल सिंह थड़ा साहिब जोड़ियां के मुख्य प्रबंधक महंत कर्मजीत सिंह ने समागम में पहुंची संगत का धन्यवाद करते हुए कहा यह महान समागम समूह इलाके की संगतों, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों व सिख जत्थेबंदियों के विशेष सहयोग से ही संपन्न होते हैं, इसलिए संगत बधाई की पात्र हैं।
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