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निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ एकजुट हुए अभिभावक, खोला मोर्चा
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यमुनानगर। निजी स्कूलों व अभिभावकों के बीच तनातनी कम होती दिखाई नहीं दे रही है। अब अभिभावकों ने मनमानी कर रहे निजी स्कूलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अभिभावकों का कहना है कि वे इस लड़ाई को अंत तक जारी रखेंगे। वहीं प्रशासन व सरकार को भी चेतावनी दी है कि यदि स्कूलों की मनमानी पर नकेल नहीं कसी गई, तो आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। निजी स्कूलों की तरह अभिभावकों ने भी संगठन बना लिया है और इसके बैनर तले ही सभी सदस्यों से निर्णय लेकर काम करेंगे। अभिभावकों ने पेरेंट्स एसोसिएशन बनाई है। इसी कड़ी में बुधवार को पेरेंट्स एसोसिएशन के सदस्यों ने पत्रकारवार्ता की। जिसमें उन्होंने निजी स्कूलों द्वारा लिए जा रहे शुल्क, विभाग व सरकार के नियम, कुछ मामलों में आए विभिन्न न्यायालयों के आदेशों के बारे में बात की। यहां पर सुमित मित्तल, कपिल आनंद, विजय धीमान, नयन कमल, ज्योति गुप्ता, पूनम शर्मा, शिवानी बंसल, विपिन गुप्ता, बलराम गुप्ता, संदीप गांधी, अविनाश ने बताया कि निजी स्कूल अपनी मनमानी कर रहे हैं। सरकार व विभागीय आदेशों का उन पर कोई असर होता नहीं दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आयुक्त के आदेशों के बाद भी वार्षिक शुल्क, डेवलपमेंट चार्ज, निजी प्रकाशन की किताबें, वर्दी इत्यादि के नाम पर अभिभावकों की जेब काटी जा रही है।
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि लॉकडाउन में पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था रुक गई थी। परंतु यहां पर स्कूलों का विकास बिल्कुल नहीं रुका। अभिभावकों ने कहा कि दो साल से बच्चे स्कूल नहीं गए। पिछले साल के अंतिम महीनों में स्कूल खोलने के आदेश हुए, लेकिन संक्रमण की रफ्तार देखते हुए फिर से बंद कर दिए गए। ऐसे में बच्चे स्कूल नहीं गए, फिर भी सभी तरह के शुल्क लिए जा रहे हैं। अभिभावकों ने कहा कि जब बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही थी, तो स्कूल अपने लिए कंप्यूटर, अन्य उपकरण, इमारत इत्यादि के नाम पर डेवलपमेंट चार्ज ले रहा है। जबकि इनका प्रयोग तो हुआ नहीं न ही उस समय आवश्यकता थी। यह सभी केवल लोगों को बहकाने के लिए किया जा रहा है।
बाक्स
आदेशों के बाद भी नहीं मान रहे स्कूल
यहां अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कुछ स्कूलों की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से की गई थी। शिकायत में स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने, वार्षिक शुल्क व डेवलपमेंट चार्ज लेने बारे में बताया गया था। इसी को लेकर एमएल पब्लिक स्कूल में अभिभावकों ने प्रदर्शन भी किया था। जिस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने पत्र जारी कर डेवलपमेंट चार्ज न लेने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके स्कूल संचालक यह चार्ज वसूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्कूलों ने डेवलपमेंट चार्ज वापस न किया तो वे कानून की शरण लेंगे।
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फार्म छह के अनुसार फीस लेने का अधिकार
अभिभावकों ने बताया कि स्कूल संचालकों को स्कूलों को फार्म छह के अनुसार ही फीस लेने का अधिकार है, परंतु स्कूल अपनी मर्जी से फीस ले रहे हैं। स्कूल मासिक फीस लेने के बाद वार्षिक शुल्क, डेवलपमेंट चार्ज इत्यादि पेन ने मैनुअल लिखकर अभिभावकों को दे रहे हैं। सभी लोगों को स्कूल के नियमों के बारे में पता नहीं है। फार्म छह स्कूल के नोटिस बोर्ड पर चस्पा रखने का नियम है, परंतु किसी स्कूल में ऐसा नहीं किया जा रहा है। ऐसे स्कूलों के खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी, मंडलायुक्त, शिक्षा निदेशक से शिकायत करेंगे।
बाक्स
बच्चों को प्रताड़ित करते हैं स्कूल
अभिभावकों ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगया कि स्कूलों की मनमानी का विरोध करने वाले अभिभावकों पर दबाव बनाया जाता है। जिसके लिए उनके बच्चों को स्कूल में विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित किया जाता है। अभिभावकों को प्रैक्टिकल इत्यादि के नंबर कम देने की धमकी तक दी जाती है। अब स्कूल ऐसा करेंगे तो उनके खिलाफ विभिन्न कार्रवाई की जाएगी।
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अभिभावकों ने आरोप लगाया कि लॉकडाउन में पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था रुक गई थी। परंतु यहां पर स्कूलों का विकास बिल्कुल नहीं रुका। अभिभावकों ने कहा कि दो साल से बच्चे स्कूल नहीं गए। पिछले साल के अंतिम महीनों में स्कूल खोलने के आदेश हुए, लेकिन संक्रमण की रफ्तार देखते हुए फिर से बंद कर दिए गए। ऐसे में बच्चे स्कूल नहीं गए, फिर भी सभी तरह के शुल्क लिए जा रहे हैं। अभिभावकों ने कहा कि जब बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही थी, तो स्कूल अपने लिए कंप्यूटर, अन्य उपकरण, इमारत इत्यादि के नाम पर डेवलपमेंट चार्ज ले रहा है। जबकि इनका प्रयोग तो हुआ नहीं न ही उस समय आवश्यकता थी। यह सभी केवल लोगों को बहकाने के लिए किया जा रहा है।
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आदेशों के बाद भी नहीं मान रहे स्कूल
यहां अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कुछ स्कूलों की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से की गई थी। शिकायत में स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने, वार्षिक शुल्क व डेवलपमेंट चार्ज लेने बारे में बताया गया था। इसी को लेकर एमएल पब्लिक स्कूल में अभिभावकों ने प्रदर्शन भी किया था। जिस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने पत्र जारी कर डेवलपमेंट चार्ज न लेने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके स्कूल संचालक यह चार्ज वसूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि स्कूलों ने डेवलपमेंट चार्ज वापस न किया तो वे कानून की शरण लेंगे।
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फार्म छह के अनुसार फीस लेने का अधिकार
अभिभावकों ने बताया कि स्कूल संचालकों को स्कूलों को फार्म छह के अनुसार ही फीस लेने का अधिकार है, परंतु स्कूल अपनी मर्जी से फीस ले रहे हैं। स्कूल मासिक फीस लेने के बाद वार्षिक शुल्क, डेवलपमेंट चार्ज इत्यादि पेन ने मैनुअल लिखकर अभिभावकों को दे रहे हैं। सभी लोगों को स्कूल के नियमों के बारे में पता नहीं है। फार्म छह स्कूल के नोटिस बोर्ड पर चस्पा रखने का नियम है, परंतु किसी स्कूल में ऐसा नहीं किया जा रहा है। ऐसे स्कूलों के खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी, मंडलायुक्त, शिक्षा निदेशक से शिकायत करेंगे।
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बच्चों को प्रताड़ित करते हैं स्कूल
अभिभावकों ने पत्रकार वार्ता में आरोप लगया कि स्कूलों की मनमानी का विरोध करने वाले अभिभावकों पर दबाव बनाया जाता है। जिसके लिए उनके बच्चों को स्कूल में विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित किया जाता है। अभिभावकों को प्रैक्टिकल इत्यादि के नंबर कम देने की धमकी तक दी जाती है। अब स्कूल ऐसा करेंगे तो उनके खिलाफ विभिन्न कार्रवाई की जाएगी।