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अढ़ाई दशक की चौधर पर अब लगेगी ब्रेक
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
Updated Sun, 27 Dec 2015 12:19 AM IST
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क्षेत्र के गांव गुलाबगढ़ की सरपंची के इतिहास में अब दूसरी बार किसी अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के सर सरपंची की चौधर होगी। गुलाबगढ़ में सरपंची की चौधर अढ़ाई दशक से एक ही परिवार के पास थी। खास बात यह भी है कि यहां जिले के गठन से लेकर अब तक दो बार ही सरपंच के लिए वोटिंग हुई, जबकि अन्य पंचायत चुनावों में आपसी सहमति से ग्राम पंचायत का सरपंच चुना गया।
ग्राम पंचायत गुलाबगढ़ में पिछले लगभग 27 साल से सरपंची का ताज एक ही परिवार पहनता आ रहा है। लेकिन अब की बार ग्राम पंचायत के सरपंच का पद आरक्षित होने के कारण इस गांव की चौधर का दावेदार अनुसूचित जाति का होगा।
पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही पंचायती सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रत्येक पंच, सरपंच के उम्मीदवार ने अपने हिसाब से वोट जुटाने के लिए जोड़-तोड़ शुरू कर दी है। पिछले पांच पंचायत चुनावों में एक ही परिवार से सरपंच बनता आ रहा था।
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नरेश के परिवार के सदस्य बनते रहे सरपंच
इस गांव को निर्मल गांव का दर्जा भी प्राप्त है। वर्ष 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद ने जिले में आगमन के दौरान अपने हाथों से इस ग्राम पंचायत को निर्मल ग्राम पुरस्कार दिया था। गुलाबगढ़ गांव में 450 वोट व गांव की आबादी करीब 1500 है। पहली बार वर्ष 1988 से सरपंची की चौधर की पगड़ी अपने सिर सजाने वाले नरेश लगातार दस साल तक सहमति से सरपंच रहे।
उसके बाद 1998 में दलित वर्ग से गेंदा राम को सहमति से गांव का सरपंच बना दिया गया जो कि वर्ष 2002 तक सरपंच रहे। उसके बाद वर्ष 2003 में सर्व सहमति से नरेश की माता सुरजी देवी को गांव की सरपंच बना दिया गया, जो कि वर्ष 2008 तक सरपंच रहीं। उसके बाद वर्ष 2009 में पंचायत चुनाव के दौरान यहां वोटिंग हुई, जिसमें नरेश की पत्नी स्लेलता देवी गांव की सरपंच बनी।
गुलाबगढ़ गांव में 1988 के बाद केवल वर्ष 2009 में चुनाव हुआ था। गुलाबगढ़ में एक निर्मल ग्राम की सभी सुविधाएं मुहैया हैं। गांव में ज्यादातर गुर्जर बिरादरी के लोग हैं और गुर्जर बिरादरी की ही चौधर है। गांव में 27 साल से सरपंची की चौधर पर काबिज परिवार भी गुर्जर बिरादरी से है। यह ग्राम पंचायत रिजर्व होने के बाद इस बार तीसरी बार सरपंच के लिए वोटिंग होगी। हालांकि कुछ मौजिज ग्रामीण सर्व सम्मति से सरपंच चुनने की वकालत कर रहे हैं।
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ग्राम पंचायत गुलाबगढ़ में पिछले लगभग 27 साल से सरपंची का ताज एक ही परिवार पहनता आ रहा है। लेकिन अब की बार ग्राम पंचायत के सरपंच का पद आरक्षित होने के कारण इस गांव की चौधर का दावेदार अनुसूचित जाति का होगा।
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पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही पंचायती सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रत्येक पंच, सरपंच के उम्मीदवार ने अपने हिसाब से वोट जुटाने के लिए जोड़-तोड़ शुरू कर दी है। पिछले पांच पंचायत चुनावों में एक ही परिवार से सरपंच बनता आ रहा था।
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नरेश के परिवार के सदस्य बनते रहे सरपंच
इस गांव को निर्मल गांव का दर्जा भी प्राप्त है। वर्ष 2003 में तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद ने जिले में आगमन के दौरान अपने हाथों से इस ग्राम पंचायत को निर्मल ग्राम पुरस्कार दिया था। गुलाबगढ़ गांव में 450 वोट व गांव की आबादी करीब 1500 है। पहली बार वर्ष 1988 से सरपंची की चौधर की पगड़ी अपने सिर सजाने वाले नरेश लगातार दस साल तक सहमति से सरपंच रहे।
उसके बाद 1998 में दलित वर्ग से गेंदा राम को सहमति से गांव का सरपंच बना दिया गया जो कि वर्ष 2002 तक सरपंच रहे। उसके बाद वर्ष 2003 में सर्व सहमति से नरेश की माता सुरजी देवी को गांव की सरपंच बना दिया गया, जो कि वर्ष 2008 तक सरपंच रहीं। उसके बाद वर्ष 2009 में पंचायत चुनाव के दौरान यहां वोटिंग हुई, जिसमें नरेश की पत्नी स्लेलता देवी गांव की सरपंच बनी।
गुलाबगढ़ गांव में 1988 के बाद केवल वर्ष 2009 में चुनाव हुआ था। गुलाबगढ़ में एक निर्मल ग्राम की सभी सुविधाएं मुहैया हैं। गांव में ज्यादातर गुर्जर बिरादरी के लोग हैं और गुर्जर बिरादरी की ही चौधर है। गांव में 27 साल से सरपंची की चौधर पर काबिज परिवार भी गुर्जर बिरादरी से है। यह ग्राम पंचायत रिजर्व होने के बाद इस बार तीसरी बार सरपंच के लिए वोटिंग होगी। हालांकि कुछ मौजिज ग्रामीण सर्व सम्मति से सरपंच चुनने की वकालत कर रहे हैं।