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Yamuna Nagar News: बिजली कनेक्शन रोकने पर पुराने मकान मालिक से बकाया वसूली का आदेश

Fri, 20 Feb 2026 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Fri, 20 Feb 2026 01:04 AM IST
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Order to recover dues from old landlord for stopping electricity connection
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग कार्यालय। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बिजली कनेक्शन जारी न करने के मामले में फैसला सुनाते हुए उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने स्पष्ट कहा कि किसी संपत्ति के पूर्व मालिक के बिजली बिल बकाया का बोझ नए खरीदार पर डालना गलत है।
आयोग ने निगम को निर्देश दिए कि शिकायतकर्ता से जमा करवाई गई राशि उसके भविष्य के बिजली बिलों में समायोजित की जाए और मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा भी दिया जाए।यह मामला सेक्टर-18 हुडा निवासी नर सिंह पाल द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने मॉडल टाउन स्थित मकान नंबर 149-ए/एल के एक हिस्से की जमीन ट्रांसफर डीड के माध्यम से प्राप्त की थी।
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वहां शोरूम बनाने के लिए बिजली कनेक्शन के लिए 18 फरवरी 2025 को ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन के बावजूद बिजली निगम ने कनेक्शन जारी नहीं किया और परिसर को डिफॉल्टर बताते हुए कहा कि पहले पुराने बकाया का भुगतान किया जाए। जांच में सामने आया कि इस परिसर में पहले तीन बिजली कनेक्शन लगे थे, जिन पर कुल करीब 1,07,433 रुपये का बकाया था। निगम ने नियमों का हवाला देते हुए नया कनेक्शन देने से इनकार कर दिया।
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शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि उसने पूर्व उपभोक्ता का पूरा विवरण निगम को दिया था, लेकिन निगम ने बकाया वसूली के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। बिजली कनेक्शन न मिलने के कारण उसे 40 हजार रुपये खर्च कर जनरेटर खरीदना पड़ा और करीब 50 हजार रुपये डीजल पर खर्च करने पड़े।
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि निगम ने अपने ही सेल्स सर्कुलर का पालन नहीं किया। आयोग ने कहा कि यदि नए खरीदार ने पुराने उपभोक्ता की जानकारी दे दी है, तो पहले निगम का कर्तव्य है कि वह बकाया राशि की वसूली पूर्व मालिक से करे। केवल यह कह देना कि परिसर डिफॉल्टर है, पर्याप्त नहीं है।
आयोग ने यह भी कहा कि बिजली जैसी सुविधा जीवन की मूल आवश्यकताओं में शामिल है और केवल पुराने बकाया के आधार पर नए उपभोक्ता को कनेक्शन से वंचित करना अनुचित है। आयोग ने निगम की इस कार्यप्रणाली को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक प्रथा करार दिया।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता ने अंतरिम आदेश के तहत बकाया राशि का 30 प्रतिशत यानी 32,230 रुपये जमा कराए थे, जिसके बाद उसे कनेक्शन दिया गया। आयोग ने अपने अंतिम आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता किसी भी प्रकार के पुराने बकाया के लिए जिम्मेदार नहीं है। इसलिए जमा कराई गई 32,230 रुपये की राशि को उसके भविष्य के बिजली बिलों में समायोजित करने का निर्देश दिया गया।
इसके अलावा आयोग ने निगम को मानसिक उत्पीड़न, परेशानी और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए शिकायतकर्ता को 11 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही 11 हजार रुपये उपभोक्ता विधिक सहायता खाते में जमा कराने के निर्देश भी दिए गए। आयोग ने यह भी कहा कि बिजली निगम के अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं किया, जिससे राज्य के खजाने को भी नुकसान हुआ।

आयोग ने निगम को यह भी स्पष्ट छूट दी कि वह पूर्व उपभोक्ताओं से 1,07,433 रुपये की बकाया राशि की वसूली कानूनी प्रक्रिया के तहत कर सकता है। आदेश में कहा गया है कि निगम को 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन करना होगा। यदि निर्धारित समय में आदेश लागू नहीं किया गया तो देय राशि पर शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।
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