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Yamuna Nagar News: छह साल पुराना 2.35 लाख का बिल रद्द कर दोबारा जारी करने के आदेश
Fri, 03 Apr 2026 03:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 03 Apr 2026 03:38 AM IST
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यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बिजली बिल के मामले में 2.35 लाख रुपये के विवादित बिल को निरस्त कर उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएनएल) को उपभोक्ता के बिजली खाते का पुनर्मूल्यांकन कर औसत खपत के आधार पर नया बिल जारी करने का आदेश दिया है। इसके अलावा निगम को उपभोक्ता को मानसिक उत्पीड़न व मुकदमेबाजी खर्च के लिए 11 हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश भी दिए हैं।
शिकायतकर्ता राजीव वोहरा ने आयोग में दायर याचिका में बताया कि उन्होंने अपने मकान का बिजली कनेक्शन अपने नाम ट्रांसफर करवाया था और नियमित रूप से बिलों का भुगतान करते रहे। इसके बाद भी लंबे समय तक बिल जारी नहीं किए गए और जून 2022 में निगम कर्मचारियों ने कनेक्शन काटने की धमकी देकर उनसे 3 लाख रुपये जमा करवा लिए। इसके बाद जुलाई, सितंबर और नवंबर 2022 में लाखों रुपये के बिल जारी किए गए, जिनमें भारी-भरकम बकाया राशि दिखाई गई।
सुनवाई के दौरान निगम की ओर से तर्क दिया गया कि उपभोक्ता नियमित भुगतान नहीं करता था और वर्षों से बकाया जमा होता गया। हालांकि आयोग ने पाया कि यदि उपभोक्ता डिफॉल्टर था तो 2015 से 2022 के बीच निगम ने कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की। साथ ही रिकॉर्ड में मीटर रीडिंग और यूनिट खपत में गंभीर विसंगतियां भी सामने आईं, जिससे बिलिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए।
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आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम की धारा 56(2) के तहत दो वर्ष से अधिक पुराने बकाया की वसूली नहीं की जा सकती, जब तक कि उसे लगातार बकाया के रूप में नहीं दिखाया गया हो। इस मामले में निगम यह साबित नहीं कर सका। निर्णय में आयोग ने कहा कि दोनों पक्षों की कुछ न कुछ गलती रही, लेकिन निगम की लापरवाही और सेवा में कमी स्पष्ट है। ऐसे में 22 नवंबर 2022 का 2,35,170 रुपये का बिल रद्द किया जाता है। आयोग ने निगम को निर्देश दिए कि 16 अगस्त 2015 से 22 दिसंबर 2022 तक की अवधि के लिए बिजली खाते का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और मार्च 2023 से जनवरी 2025 तक की औसत मासिक खपत के आधार पर नया बिल जारी किया जाए। साथ ही पहले से जमा की गई राशि को समायोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा आयोग ने निगम को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 11 हजार रुपये एकमुश्त मुआवजा दे। यह राशि 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी, अन्यथा इस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन तय समय में न होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी। संवाद
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शिकायतकर्ता राजीव वोहरा ने आयोग में दायर याचिका में बताया कि उन्होंने अपने मकान का बिजली कनेक्शन अपने नाम ट्रांसफर करवाया था और नियमित रूप से बिलों का भुगतान करते रहे। इसके बाद भी लंबे समय तक बिल जारी नहीं किए गए और जून 2022 में निगम कर्मचारियों ने कनेक्शन काटने की धमकी देकर उनसे 3 लाख रुपये जमा करवा लिए। इसके बाद जुलाई, सितंबर और नवंबर 2022 में लाखों रुपये के बिल जारी किए गए, जिनमें भारी-भरकम बकाया राशि दिखाई गई।
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सुनवाई के दौरान निगम की ओर से तर्क दिया गया कि उपभोक्ता नियमित भुगतान नहीं करता था और वर्षों से बकाया जमा होता गया। हालांकि आयोग ने पाया कि यदि उपभोक्ता डिफॉल्टर था तो 2015 से 2022 के बीच निगम ने कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की। साथ ही रिकॉर्ड में मीटर रीडिंग और यूनिट खपत में गंभीर विसंगतियां भी सामने आईं, जिससे बिलिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए।
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आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम की धारा 56(2) के तहत दो वर्ष से अधिक पुराने बकाया की वसूली नहीं की जा सकती, जब तक कि उसे लगातार बकाया के रूप में नहीं दिखाया गया हो। इस मामले में निगम यह साबित नहीं कर सका। निर्णय में आयोग ने कहा कि दोनों पक्षों की कुछ न कुछ गलती रही, लेकिन निगम की लापरवाही और सेवा में कमी स्पष्ट है। ऐसे में 22 नवंबर 2022 का 2,35,170 रुपये का बिल रद्द किया जाता है। आयोग ने निगम को निर्देश दिए कि 16 अगस्त 2015 से 22 दिसंबर 2022 तक की अवधि के लिए बिजली खाते का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और मार्च 2023 से जनवरी 2025 तक की औसत मासिक खपत के आधार पर नया बिल जारी किया जाए। साथ ही पहले से जमा की गई राशि को समायोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा आयोग ने निगम को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 11 हजार रुपये एकमुश्त मुआवजा दे। यह राशि 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी, अन्यथा इस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन तय समय में न होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी। संवाद