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टार्च के सहारे चला रेसक्यू ऑपरेशन
राहुल शर्मा /अमर उजाला यमुनानगर
Updated Tue, 05 Aug 2014 12:48 AM IST
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रविवार रात बाड़ीमाजरा पुल के समीप पश्चिमी यमुना नहर में गिरी कार और उसमें सवार लोगों की तलाश के लिए प्रशासन द्वारा शुरू किए गए रेसक्यू ऑपरेशन में प्रशासनिक खामियां बड़ी बाधा बनी।
रेसक्यू ऑपरेशन करीब 45 मिनट देरी से शुरू हुआ, उस पर घटनास्थल पर रोशनी का कोई प्रबंध न होने के कारण पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी ट्रॉर्चों का सहारा लेते दिखे, जो नहर में दूर तक प्रकाश कर पाने में नाकाफी साबित हुई।
जिसकी वजह से रेसक्यू ऑपरेशन टीम में शामिल गोताखोरों में सुखराम, राजीव, अमर, वीरेंद्र को नहर में कार व उसमें सवार लोगों की तलाश में परेशानी हुई।
हालांकि रात साढ़े ग्यारह बजे गोताखोरों को नहर में कार दिखाई दे गई और करीब एक बजे तक क्रेन की मदद से उसे बाहर निकालने की जद्दोजहद चलती रही। लेकिन नहर में पानी के तेज बहाव के कारण कार में क्रेन का एंगल नहीं फंस पाया।
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रेसक्यू टीम ने रात में कार को नहर से बाहर निकालने में असमर्थता जताई। जिसके बाद सोमवार सुबह रेसक्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू किया गया और घंटों की मशक्कत के बाद दोपहर करीब बारह बजे कार को बाहर निकाला जा सका।
चेतावनी बोर्ड तो लगाए, पर आज तक नहीं लगी रेलिंग
पश्चिमी यमुना नहर में लोगों के डूबने की बढ़ती घटनाओं को लेकर प्रशासन की ओर से बाड़ीमाजरा पुल पर चेतावनी बोर्ड लगाए थे। जिन पर नहर में और उसके किनारों पर नहाने व कपड़े धोने पर पाबंदी के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इन निर्देशों का पालन कराने के लिए कोई वहां मौजूद नहीं है।
कहने को पुल के समीप ही एक पुलिस नाका के लिए क्वार्टर बना है, लेकिन वह भी सुबह-शाम सुनसान रहता है। जिसका अंदाजा इस पर लगे तालों पर लगे जंग को देखकर सहज ही लगाया जा सकता है।
इसके अलावा बाड़ीमाजरा पुल के एक ओर तो रेलिंग बनी है, दूसरी ओर अब तक रेलिंग नहीं बनाई जा सकी है। जबकि इस ओर ओपी जिंदल पार्क में पहुंचने वाले लोग गाड़ी पार्क करते हैं।
स्थानीय लोगों की मानें तो रविवार रात जिस जगह हादसा हुआ, वहां रेलिंग या बड़े थडे़ बने होते तो यह हादसा नहीं होता और इसमें लोगों की जान बच पाती।
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रेसक्यू ऑपरेशन करीब 45 मिनट देरी से शुरू हुआ, उस पर घटनास्थल पर रोशनी का कोई प्रबंध न होने के कारण पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी ट्रॉर्चों का सहारा लेते दिखे, जो नहर में दूर तक प्रकाश कर पाने में नाकाफी साबित हुई।
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जिसकी वजह से रेसक्यू ऑपरेशन टीम में शामिल गोताखोरों में सुखराम, राजीव, अमर, वीरेंद्र को नहर में कार व उसमें सवार लोगों की तलाश में परेशानी हुई।
हालांकि रात साढ़े ग्यारह बजे गोताखोरों को नहर में कार दिखाई दे गई और करीब एक बजे तक क्रेन की मदद से उसे बाहर निकालने की जद्दोजहद चलती रही। लेकिन नहर में पानी के तेज बहाव के कारण कार में क्रेन का एंगल नहीं फंस पाया।
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रेसक्यू टीम ने रात में कार को नहर से बाहर निकालने में असमर्थता जताई। जिसके बाद सोमवार सुबह रेसक्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू किया गया और घंटों की मशक्कत के बाद दोपहर करीब बारह बजे कार को बाहर निकाला जा सका।
चेतावनी बोर्ड तो लगाए, पर आज तक नहीं लगी रेलिंग
पश्चिमी यमुना नहर में लोगों के डूबने की बढ़ती घटनाओं को लेकर प्रशासन की ओर से बाड़ीमाजरा पुल पर चेतावनी बोर्ड लगाए थे। जिन पर नहर में और उसके किनारों पर नहाने व कपड़े धोने पर पाबंदी के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इन निर्देशों का पालन कराने के लिए कोई वहां मौजूद नहीं है।
कहने को पुल के समीप ही एक पुलिस नाका के लिए क्वार्टर बना है, लेकिन वह भी सुबह-शाम सुनसान रहता है। जिसका अंदाजा इस पर लगे तालों पर लगे जंग को देखकर सहज ही लगाया जा सकता है।
इसके अलावा बाड़ीमाजरा पुल के एक ओर तो रेलिंग बनी है, दूसरी ओर अब तक रेलिंग नहीं बनाई जा सकी है। जबकि इस ओर ओपी जिंदल पार्क में पहुंचने वाले लोग गाड़ी पार्क करते हैं।
स्थानीय लोगों की मानें तो रविवार रात जिस जगह हादसा हुआ, वहां रेलिंग या बड़े थडे़ बने होते तो यह हादसा नहीं होता और इसमें लोगों की जान बच पाती।