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अपनों के सताए जाए तो कहां जाएं।

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jun 2021 01:48 AM IST
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old man gave child experience and culture
परिवार में बुजुर्ग होना सौभाग्य होता है। जिन परिवारों में बुजुर्ग होते हैं उन परिवारों की पीढ़ियों संस्कारों छांव और अनुभवों की धूप में पलती हैं। आज बुजुर्ग दुर्व्यवहार रोकथाम जागरूकता दिवस है। इस दिन लोग बुजुर्गों के प्रति प्रेम, स्नेह, सम्मान करने की कसम तो खाते हैं। इस पर शायद अमल नहीं करते। जिन्होंने उंगली पकड़कर चलना सिखाया। सेवानिवृत्त होने के बाद वहीं उन्हें घर से बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। उम्र के आखिरी पड़ाव में बुजुर्ग कहां जाए। ऐसे में वृद्धाश्रम ही वह जगह है जो उन्हें छांव प्रदान करती है। शहर में बने एक वृद्धाश्रम में 27 बुजुर्ग अपनों ही बच्चों के सताए हुए हैं और यहां जीवन काट रहे हैं। इनमें कई बुजुर्ग ऐसे भी हैं जिनके बच्चे विदेश में रहते हैं और लाचार मां को यहां छोड़ गए हैं।
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विश्राम सेवा ट्रस्ट (वृद्धाश्रम) के उपप्रधान पवन सोनी कई सालों से बुजुर्गों की देखरेख कर रहे हैं। पवन सोनी ने बताया कि बुजुर्गों पर अत्याचार के खिलाफ उनकी मुहिम चल रही है। लोगों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। ट्रस्ट साल 1990 से आश्रम चला रहा है और इसे कोई सरकारी व गैर सरकारी सहायता नहीं प्राप्त होती है। ट्रस्ट के दस सदस्य हैं, जिनमें से पांच की मौत हो गई है। सभी सदस्य अपने ही निजी कोष से सहायता करते हैं। वहीं अपने सामर्थ्य अनुसार व्यक्ति दान दे जाते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने बुजुर्गों से ऐसा दुर्व्यवहार भी देखा है, जिसे देखकर सुन रूह कांप उठे। उन्होंने कहा कि आज की आधुनिक पीढ़ी अपने बुजुर्गों को लावारिस छोड़ देती है, चूंकि वे उन्हें ऑउट डेटेड लगते हैं। उनकी मुहिम में अब कई लोग जुड़ गए हैं। इससे यह होगा कि कम से कम वे लोग अपनों बुजुर्गों को तो नहीं छोड़ेंगे और न अपने आसपास ऐसा होने देंगे। इससे सकारात्मक सोच का प्रवाह होगा।
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ट्रस्ट सदस्य राजेश सोनी करीब एक दशक से यहां सेवा कर रहे हैं। वे ही अपने सहयोगी के साथ पूरे आश्रम की व्यवस्था देखते हैं। राजेश सोनी ने बताया कि अपनों के सताए इन बुजुर्गों से वे ज्यादा उनकी परिस्थितियों के बारे ज्यादा कुछ नहीं पूछते हैं। कई बार ऐसा करके देखा तो बुजुर्ग फूट फूटकर रोने लगे। जिस कारण वे उनका दर्द न कुरेद कर उस पर मरहम लगाते हैं। वृद्धाश्रम में सभी त्योहार मनाए जाते हैं। उनकी हर जरूरत का ख्याल रखा जाता है। उन्हें बच्चों की कमी न महसूस हो इसलिए यहां विभिन्न स्कूलों के बच्चों को भी बुलाया जाता है। जिससे बुजुर्गों व बच्चों दोनों की भावनाएं तृप्ति होती हैं।
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कोषाध्यक्ष बलराम सेठी ने बताया कि नारी और बुजुर्ग हिंसा व अत्याचार के बेहद खिलाफ हैं। इसके लिए बड़े स्तर पर मुहिम चलाई जा रही है। आश्रम में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों से लोगों को जगारूक किया जाता है। इसका असर भी दिखाई दिया है। अब बुजुर्गों की संख्या कम हुई है। लोगों को घर में बुजुर्ग का महत्व बताया जा रहा है। यहां आश्रम में बुजुर्गों को परिवार का माहौल देने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ नागरिक दिवस पर यहां लोगों की भीड़ उमड़ती है। वे बुजुर्गों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, परंतु यह भाव सदा के लिए बनाना चाहिए। उन्होंने बताया कि अपनों के साथ ऐसा व्यवहार करने वालों के खिलाफ सख्त कानून की आवश्यकता है।

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बिना सहायता चला रहे
सदस्य शंटी छाबड़ा आश्रम में सालों से सेवा कर रहे हैं। शंटी ने बताया कि प्रेम के भूखे मां बाप को अपने ही बच्चों से तिरस्कार मिल रहा है। ट्रस्ट उनका पूरा ख्याल रखती है। तीस साल से यहां पर बुजुर्ग रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों को कोई परेशानी न हो इसके लिए आश्रम का हाल है। वहीं लोगों को बुजुर्गों की सेवार्थ जागरूक किया जाता है। जिसके तहत लोग 1500 रुपये देकर बुजुर्गों के लिए खाना, कपड़ा व अन्य जरूरत का सामान उपलब्ध करवा सकते हैं। हर माह दर्जनों लोग 1500 रुपये इन कार्यों के लिए दे जाते हैं। जिससे बुजुर्गों की सेवा की जाती है।
फोटो:- 5 से 8
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