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Yamuna Nagar News: अब विद्यालयों में मिड-डे-मील के सैंपल लेगा खाद्य सुरक्षा विभाग
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जगाधरी। राजकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को परोसे जाने वाले भोजन की नियमित रूप से जांच करवाई जाएगी। अब मिड-डे-मील में बने खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग भी की जाएगी। यही नहीं भोजन पकाने में उपयोग किए जाने वाले राशन व सामान की गुणवत्ता भी जांच होगी। मिड-डे-मील की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन बेहद सख्त है और डीसी ने इसके आदेश दिए हैं। वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नियमित निरीक्षण व निगरानी के आदेश दिए हैं। जिले में मिड-डे-मील की सैंपलिंग कभी नहीं की गई है।
मिड-डे-मील की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहते हैं। ऐसे में शिक्षा निदेशालय के साथ जिला प्रशासन भी इसके प्रति सख्त हो गया है। इसे लेकर डीसी ने मिड-डे-मील की नियमित सैंपलिंग करने के आदेश दिए हैं। इसका उद्देश्य भोजन की गुणवत्ता और बच्चों को पोषण मुहैया करवाना सुनिश्चित करना है। डीसी प्रीति ने यह आदेश जिलास्तरीय सलाहकार समिति खाद्य सुरक्षा की बैठक में दिए। उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग को इसके प्रति गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए हैं। डीसी ने स्पष्ट किया है कि इसमें किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसमें लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जिले में कई बार मिड-डे-मील की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें हो चुकी हैं। गुणवत्ता युक्त भोजन न मिलने से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसे लेकर निदेशालय की ओर से निगरानी के लिए कमेटी बनाने के भी आदेश दिए गए हैं। जिले में बाल वाटिका से आठवीं तक के 65,150 विद्यार्थियों को दोपहर का भोजन दिया जाता है। वहीं, स्कूल ड्रॉप आउट करीब 1,500 बच्चों को भी भोजन दिया जा रहा है।
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सभी खंडों में बनाई गई है कमेटी
मिड-डे-मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निदेशालय के आदेश पर जिलास्तर पर निगरानी समितियां बनाई गई हैं। यह समितियां खंड और जिलास्तर पर बनाई गई हैं। जिलास्तर की समिति में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक, जिला मिड-डे-मील प्रभारी निरीक्षण करेंगे। वहीं, खंड स्तर पर यह समितियां खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान रसोई की सफाई, राशन का भंडारण, पकाने के तरीके, इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री, भोजन की गुणवत्ता देखी जाएगी। बता दें कि जिले में कभी भी मिड-डे-मील की सैंपलिंग नहीं हुई है। वहीं, अब डीसी के आदेशों के बाद मिड-डे-मील की नियमित सैंपलिंग की जाएंगी। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी लगाई गई है। बाल वाटिका में करीब 3,100 हैं। वहीं, प्राथमिक में 32 हजार और माध्यमिक विद्यालय में 30 हजार बच्चे हैं।
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वर्जन
मिड-डे-मील की गुणवत्ता को लेकर विभाग गंभीर है और इस पर सख्ती से काम कर रहा है। मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला व खंड पर अधिकारियों की समितियां बनाई गई हैं। वहीं, क्लस्टर हेड को भी इस बारे निर्देश दिए गए हैं। डीसी ने भी मील की नियमित सैंपलिंग करवाने के आदेश दिए हैं। इससे भोजन की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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मिड-डे-मील की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहते हैं। ऐसे में शिक्षा निदेशालय के साथ जिला प्रशासन भी इसके प्रति सख्त हो गया है। इसे लेकर डीसी ने मिड-डे-मील की नियमित सैंपलिंग करने के आदेश दिए हैं। इसका उद्देश्य भोजन की गुणवत्ता और बच्चों को पोषण मुहैया करवाना सुनिश्चित करना है। डीसी प्रीति ने यह आदेश जिलास्तरीय सलाहकार समिति खाद्य सुरक्षा की बैठक में दिए। उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग को इसके प्रति गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए हैं। डीसी ने स्पष्ट किया है कि इसमें किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसमें लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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जिले में कई बार मिड-डे-मील की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें हो चुकी हैं। गुणवत्ता युक्त भोजन न मिलने से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसे लेकर निदेशालय की ओर से निगरानी के लिए कमेटी बनाने के भी आदेश दिए गए हैं। जिले में बाल वाटिका से आठवीं तक के 65,150 विद्यार्थियों को दोपहर का भोजन दिया जाता है। वहीं, स्कूल ड्रॉप आउट करीब 1,500 बच्चों को भी भोजन दिया जा रहा है।
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सभी खंडों में बनाई गई है कमेटी
मिड-डे-मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निदेशालय के आदेश पर जिलास्तर पर निगरानी समितियां बनाई गई हैं। यह समितियां खंड और जिलास्तर पर बनाई गई हैं। जिलास्तर की समिति में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परियोजना समन्वयक, जिला मिड-डे-मील प्रभारी निरीक्षण करेंगे। वहीं, खंड स्तर पर यह समितियां खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के विद्यालयों का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान रसोई की सफाई, राशन का भंडारण, पकाने के तरीके, इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री, भोजन की गुणवत्ता देखी जाएगी। बता दें कि जिले में कभी भी मिड-डे-मील की सैंपलिंग नहीं हुई है। वहीं, अब डीसी के आदेशों के बाद मिड-डे-मील की नियमित सैंपलिंग की जाएंगी। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी लगाई गई है। बाल वाटिका में करीब 3,100 हैं। वहीं, प्राथमिक में 32 हजार और माध्यमिक विद्यालय में 30 हजार बच्चे हैं।
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मिड-डे-मील की गुणवत्ता को लेकर विभाग गंभीर है और इस पर सख्ती से काम कर रहा है। मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला व खंड पर अधिकारियों की समितियां बनाई गई हैं। वहीं, क्लस्टर हेड को भी इस बारे निर्देश दिए गए हैं। डीसी ने भी मील की नियमित सैंपलिंग करवाने के आदेश दिए हैं। इससे भोजन की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।