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Yamuna Nagar News: अब शिक्षक भी बच्चों के लिए मंगवा सकेंगे किताब
Tue, 24 Dec 2024 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 24 Dec 2024 12:26 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। शिक्षकों को अब विभाग से विद्यार्थियों के लिए पुस्तकों की डिमांड भेजने के लिए परेशान नहीं होना पड़ा। अब एक क्लिक पर शिक्षक अपनी कक्षा व विषय की पुस्तकें मंगवाने की मांग कर सकते हैं। विभाग ने इसके लिए पुस्तकों की मांग की प्रक्रिया सरल बना दी है।
अब शिक्षक एमआईएस पोर्टल पर ऑनलाइन डिमांड भेज सकते हैं। इस प्रक्रिया से जहां शिक्षकों को डिमांड भेजने में आसानी होगी। वहीं, विभाग को भेजी डिमांड भी तुरंत मिल जाएगी। इसके लिए विभाग ने एमआईएस पोर्टल में डिमांड ऑफ बुक्स का विकल्प जोड़ दिया है। इसके लिए पहले शिक्षकों को इस माह के पहले सप्ताह तक डिमांड देनी थी।
लेकिन इस बार पाठ्य पुस्तक में किए जा रहे बदलाव के कारण दोबारा डिमांड मांगी गई है। प्रक्रिया सरल होने के चलते शिक्षक तेजी से डिमांड भेज रहे हैं। बता दें कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चों को निशुल्क पुस्तकें दी जाती हैं। हर साल पुस्तकें भेजने में देरी हो जाती है।
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ऐसे में इस बार विभाग ने यह डिमांड जल्दी मांगी है, ताकि सत्र शुरू होने पर विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध करवाई जा सके। परंतु इस बार विभाग पाठ्य पुस्तक में बदलाव कर रहा है। विभाग ने एमआईएस पोर्टल में डिमांड ऑफ बुक्स का ऑप्शन दिया है। इसमें अलग-अलग कॉलम दिए गए हैं। जो शिक्षकों को भरकर ओके करना है। इस में विद्यार्थियों की संख्या, कक्षा, विषय, पुस्तक का नाम और कुल पुस्तक के ऑप्शन दिए गए हैं।
यह भरने के बाद शिक्षक को डिजिटल तरीके से इसकी तस्दीक करनी होगी। इसके लिए बुक्स इंचार्ज या प्रभारी के पास ओटीपी आएगा। यह ओटीपी भरने के बाद डिमांड ओके होकर सेंड हो जाएगी। वहीं, इससे अधिकारियों का काम भी आसान हो गया है। पुस्तक के लिए की जाने वाली कसरत कम होगी और डिमांड सीधे मुख्यालय के पास होगी।
इसका लाभ यह होगा कि पहले की तरह डिमांड पास करने के लिए इधर से उधर भेजनी नहीं पड़ेगी। बल्कि समीक्षक, प्रभारी सहित अधिकारी एक बार भी यह डिमांड देखकर अपनी स्वीकृति दे सकते हैं। जिससे पुस्तकें भेजने में विलंब नहीं होगा।
विभाग ने इस बार पुस्तक डिमांड की प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया है। अब शिक्षकों को एमआईएस पोर्टल पर किताबों की डिमांड भेजनी होगी। इससे लंबी प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा और समय पर किताबें उपलब्ध करवाई जा सकेंगी। - संजीव सैनी, जिला एफएलएन समन्वयक।
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जगाधरी। शिक्षकों को अब विभाग से विद्यार्थियों के लिए पुस्तकों की डिमांड भेजने के लिए परेशान नहीं होना पड़ा। अब एक क्लिक पर शिक्षक अपनी कक्षा व विषय की पुस्तकें मंगवाने की मांग कर सकते हैं। विभाग ने इसके लिए पुस्तकों की मांग की प्रक्रिया सरल बना दी है।
अब शिक्षक एमआईएस पोर्टल पर ऑनलाइन डिमांड भेज सकते हैं। इस प्रक्रिया से जहां शिक्षकों को डिमांड भेजने में आसानी होगी। वहीं, विभाग को भेजी डिमांड भी तुरंत मिल जाएगी। इसके लिए विभाग ने एमआईएस पोर्टल में डिमांड ऑफ बुक्स का विकल्प जोड़ दिया है। इसके लिए पहले शिक्षकों को इस माह के पहले सप्ताह तक डिमांड देनी थी।
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लेकिन इस बार पाठ्य पुस्तक में किए जा रहे बदलाव के कारण दोबारा डिमांड मांगी गई है। प्रक्रिया सरल होने के चलते शिक्षक तेजी से डिमांड भेज रहे हैं। बता दें कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चों को निशुल्क पुस्तकें दी जाती हैं। हर साल पुस्तकें भेजने में देरी हो जाती है।
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ऐसे में इस बार विभाग ने यह डिमांड जल्दी मांगी है, ताकि सत्र शुरू होने पर विद्यार्थियों को पुस्तकें उपलब्ध करवाई जा सके। परंतु इस बार विभाग पाठ्य पुस्तक में बदलाव कर रहा है। विभाग ने एमआईएस पोर्टल में डिमांड ऑफ बुक्स का ऑप्शन दिया है। इसमें अलग-अलग कॉलम दिए गए हैं। जो शिक्षकों को भरकर ओके करना है। इस में विद्यार्थियों की संख्या, कक्षा, विषय, पुस्तक का नाम और कुल पुस्तक के ऑप्शन दिए गए हैं।
यह भरने के बाद शिक्षक को डिजिटल तरीके से इसकी तस्दीक करनी होगी। इसके लिए बुक्स इंचार्ज या प्रभारी के पास ओटीपी आएगा। यह ओटीपी भरने के बाद डिमांड ओके होकर सेंड हो जाएगी। वहीं, इससे अधिकारियों का काम भी आसान हो गया है। पुस्तक के लिए की जाने वाली कसरत कम होगी और डिमांड सीधे मुख्यालय के पास होगी।
इसका लाभ यह होगा कि पहले की तरह डिमांड पास करने के लिए इधर से उधर भेजनी नहीं पड़ेगी। बल्कि समीक्षक, प्रभारी सहित अधिकारी एक बार भी यह डिमांड देखकर अपनी स्वीकृति दे सकते हैं। जिससे पुस्तकें भेजने में विलंब नहीं होगा।
विभाग ने इस बार पुस्तक डिमांड की प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया है। अब शिक्षकों को एमआईएस पोर्टल पर किताबों की डिमांड भेजनी होगी। इससे लंबी प्रक्रिया से छुटकारा मिलेगा और समय पर किताबें उपलब्ध करवाई जा सकेंगी। - संजीव सैनी, जिला एफएलएन समन्वयक।