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Yamuna Nagar News: शिविर में पहुचीं आठ शिकायतों में से एक का भी समाधान नहीं
Tue, 03 Feb 2026 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 03 Feb 2026 01:24 AM IST
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जिला सचिवालय में अधिकारियों को अपनी शिकायत देते लोग। डीआईपीआरओ
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। प्रदेश सरकार की ओर से आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से शुरू किए गए समाधान शिविर जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं। वहीं सोमवार को आयोजित शिविर में पहुंची आठ शिकायतों में एक का भी मौके पर निपटारा नहीं हो सका।
डीआरओ तरुण सहोता ने समाधान शिविर में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविर में आने वाले प्रत्येक प्रार्थी की समस्या का मौके पर ही समाधान करने का भरसक प्रयास किया जाए। यदि किसी शिकायत का समाधान दस्तावेजों या जांच पर आधारित है, तो उसका समयबद्ध निपटान सुनिश्चित किया जाए। बावजूद इसके संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शिकायतों पर केवल आश्वासन देकर लोगों को लौटाने का काम कर रहे हैं। सोमवार को आयोजित शिविर में कुल आठ शिकायतें दर्ज की गईं।
इनमें यमुनानगर निवासी कर्ण शर्मा ने प्रॉपर्टी आईडी ठीक करवाने, वार्ड नंबर पांच के कॉलोनी निवासियों ने सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने, कामेश्वर शर्मा ने क्वार्टर कॉलोनी में स्ट्रीट लाइट लगवाने, सेवा राम ने वार्ड नंबर 20 में नालियां खुलवाने और राकेश कुमार ने अवैध निर्माण हटवाने की शिकायत रखी। ये सभी ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर हो सकता है।
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शिविर में पहुंचे लोगों का कहना था कि वे पहले संबंधित गांव और वार्ड स्तर के अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन सुनवाई न होने के कारण उन्हें जिला सचिवालय आना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने बताया कि बार-बार शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है।
इस अवसर पर डीडीपीओ नरेंद्र सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद समाधान शिविर लोगों के लिए उम्मीद से ज्यादा औपचारिकता बनकर रह गए हैं। लोगों का कहना है कि जब तक स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक समाधान शिविरों का उद्देश्य अधूरा ही रहेगा।
डीआरओ ने बताया कि प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत समाधान शिविरों की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब ये शिविर सप्ताह में दो दिन सोमवार और वीरवार को सुबह 10 से 12 बजे तक आयोजित किए जा रहे हैं। शिविर जिला और उपमंडल दोनों स्तरों पर लगाए जा रहे हैं, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
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यमुनानगर। प्रदेश सरकार की ओर से आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से शुरू किए गए समाधान शिविर जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं। वहीं सोमवार को आयोजित शिविर में पहुंची आठ शिकायतों में एक का भी मौके पर निपटारा नहीं हो सका।
डीआरओ तरुण सहोता ने समाधान शिविर में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविर में आने वाले प्रत्येक प्रार्थी की समस्या का मौके पर ही समाधान करने का भरसक प्रयास किया जाए। यदि किसी शिकायत का समाधान दस्तावेजों या जांच पर आधारित है, तो उसका समयबद्ध निपटान सुनिश्चित किया जाए। बावजूद इसके संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शिकायतों पर केवल आश्वासन देकर लोगों को लौटाने का काम कर रहे हैं। सोमवार को आयोजित शिविर में कुल आठ शिकायतें दर्ज की गईं।
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इनमें यमुनानगर निवासी कर्ण शर्मा ने प्रॉपर्टी आईडी ठीक करवाने, वार्ड नंबर पांच के कॉलोनी निवासियों ने सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने, कामेश्वर शर्मा ने क्वार्टर कॉलोनी में स्ट्रीट लाइट लगवाने, सेवा राम ने वार्ड नंबर 20 में नालियां खुलवाने और राकेश कुमार ने अवैध निर्माण हटवाने की शिकायत रखी। ये सभी ऐसी समस्याएं हैं, जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर हो सकता है।
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शिविर में पहुंचे लोगों का कहना था कि वे पहले संबंधित गांव और वार्ड स्तर के अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन सुनवाई न होने के कारण उन्हें जिला सचिवालय आना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों ने बताया कि बार-बार शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है।
इस अवसर पर डीडीपीओ नरेंद्र सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद समाधान शिविर लोगों के लिए उम्मीद से ज्यादा औपचारिकता बनकर रह गए हैं। लोगों का कहना है कि जब तक स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक समाधान शिविरों का उद्देश्य अधूरा ही रहेगा।
डीआरओ ने बताया कि प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत समाधान शिविरों की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब ये शिविर सप्ताह में दो दिन सोमवार और वीरवार को सुबह 10 से 12 बजे तक आयोजित किए जा रहे हैं। शिविर जिला और उपमंडल दोनों स्तरों पर लगाए जा रहे हैं, ताकि आमजन को राहत मिल सके।