{"_id":"6161f5798ebc3e05f132c28a","slug":"no-drinking-water-no-pucca-phad-no-lifting-of-wheat-in-the-mandis-yamunanagar-yamuna-nagar-news-knl860025187","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंडियों में न पेयजल, न पक्का फड़, गेहूं का उठान भी नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंडियों में न पेयजल, न पक्का फड़, गेहूं का उठान भी नहीं
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
यमुनानगर। जिले की सभी 13 मंडियों में धान की आवक जारी है। वहीं मंडियों में अव्यवस्थाओं का आलम है। मंडियों में न तो पीने का पानी है और न ही साफ शौचालय की व्यवस्था है। कई मंडियों में तो किसानों के लिए मौसम से बचने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। यही नहीं मंडियों में आग से बचने के लिए भी व्यवस्था नहीं है। गेहूं सीजन में रणजीतपुर मंडी में आग लग चुकी है। सबसे ज्यादा हालात जठलाना और रणजीतपुर मंडी के खराब हैं।
डीसी पार्थ गुप्ता के अनुसार सभी खरीद एजेंसियों को निर्देश दिए कि मंडियों से धान का जल्द उठाने की व्यवस्था करें, जिससे किसान सुविधापूर्ण तरीके से अपनी फसल बेच सकें। उन्होंने कहा कि किसान अनाज मंडी में फसल को सुखाकर लाएं ताकि उन्हें फसल बेचने में कोई दिक्कत न हो। उन्होंने मार्केट कमेटी के अधिकारियों को भी आदेश दिए कि वे मंडियों में बिजली, पानी, शौचालय और साफ सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि समय पर वह स्वयं अनाज मंडियों का दौरा करके खरीद कार्य का जायजा भी ले रहे हैं।
डीसी गुप्ता के मुताबिक जिले की 13 मंडियों में अब तक ग्रेड ए किस्म का 112807 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 62457 मीट्रिक टन, हैफेड ने 24719 मीट्रिक टन, हरियाणा वेयर कारपोरेशन ने 25631 मीट्रिक टन धान खरीदा है। बिलासपुर अनाज मंडी में कुल 8748 मीट्रिक टन, छछरौली में 13466 मीट्रिक टन, गुमथला राव में 1389 मीट्रिक टन, जगाधरी अनाज मंडी में 18647 मीट्रिक टन, जठलाना में 1135 मीट्रिक टन, खारवन में 2078 मीट्रिक टन, प्रतापनगर में 12458 मीट्रिक टन, सरस्वती नगर में 30142 मीट्रिक टन, रादौर में 9754 मीट्रिक टन, रणजीतपुर में 2456 मीट्रिक टन, रसूलपुर में 4185 मीट्रिक टन, साढौरा में 8255 मीट्रिक टन धान व यमुनानगर में मात्र 94 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है।
विज्ञापन
उठान न होने से धान से मंडियां अटीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। धान खरीद अपने चरम पर है और मंडियों से उठान नहीं हो रहा है। ऐसे में मंडियों में जगह कम पड़ गई है। कस्बे की मंडी में जगह की कमी के कारण आढ़तियों व किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी के शेड व फड़ खरीद शुरू होने के चार दिन बाद भी खाली नहीं करवाए गए हैं, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान दलजीत सिंह बाजवा, शिव कुमार बंसल का कहना है कि कुछ दिन पूर्व डीसी ने मंडी का दौरा कर किसानों और आढ़तियों की समस्याओं को सुनकर दो दिन में उठान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक शेड व फड़ों से उठान न होने के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान अशोक कुमार, रण सिंह, सर्बजीत सिंह, बलविंद्र सिंह ने बताया कि उनके घरों में भंडारण की जगह की कमी है। खेत से धान की कटाई कर सीधे मंडी में लेकर आते हैं।
धान को अधिक दिनों तक ट्राली में रखने से धान काली पड़ जाती है जिसके कारण आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। लेकिन मंडी में अधिकतर फड़ों व शेड में गेहूं भरा होने के कारण मंडी में धान सुखाने के लिए जगह कम पड़ रही है। इस बारे में अनेक बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया है। किसानों का कहना है अचानक मौसम में परिवर्तन होने पर बारिश से हजारों क्विंटल धान पानी की भेंट चढ़ जाएगा। किसानों और आढ़तियों ने शेड व फड़ खाली करवाने की मांग की है।
विज्ञापन
यमुनानगर। जिले की सभी 13 मंडियों में धान की आवक जारी है। वहीं मंडियों में अव्यवस्थाओं का आलम है। मंडियों में न तो पीने का पानी है और न ही साफ शौचालय की व्यवस्था है। कई मंडियों में तो किसानों के लिए मौसम से बचने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। यही नहीं मंडियों में आग से बचने के लिए भी व्यवस्था नहीं है। गेहूं सीजन में रणजीतपुर मंडी में आग लग चुकी है। सबसे ज्यादा हालात जठलाना और रणजीतपुर मंडी के खराब हैं।
डीसी पार्थ गुप्ता के अनुसार सभी खरीद एजेंसियों को निर्देश दिए कि मंडियों से धान का जल्द उठाने की व्यवस्था करें, जिससे किसान सुविधापूर्ण तरीके से अपनी फसल बेच सकें। उन्होंने कहा कि किसान अनाज मंडी में फसल को सुखाकर लाएं ताकि उन्हें फसल बेचने में कोई दिक्कत न हो। उन्होंने मार्केट कमेटी के अधिकारियों को भी आदेश दिए कि वे मंडियों में बिजली, पानी, शौचालय और साफ सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि समय पर वह स्वयं अनाज मंडियों का दौरा करके खरीद कार्य का जायजा भी ले रहे हैं।
विज्ञापन
डीसी गुप्ता के मुताबिक जिले की 13 मंडियों में अब तक ग्रेड ए किस्म का 112807 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 62457 मीट्रिक टन, हैफेड ने 24719 मीट्रिक टन, हरियाणा वेयर कारपोरेशन ने 25631 मीट्रिक टन धान खरीदा है। बिलासपुर अनाज मंडी में कुल 8748 मीट्रिक टन, छछरौली में 13466 मीट्रिक टन, गुमथला राव में 1389 मीट्रिक टन, जगाधरी अनाज मंडी में 18647 मीट्रिक टन, जठलाना में 1135 मीट्रिक टन, खारवन में 2078 मीट्रिक टन, प्रतापनगर में 12458 मीट्रिक टन, सरस्वती नगर में 30142 मीट्रिक टन, रादौर में 9754 मीट्रिक टन, रणजीतपुर में 2456 मीट्रिक टन, रसूलपुर में 4185 मीट्रिक टन, साढौरा में 8255 मीट्रिक टन धान व यमुनानगर में मात्र 94 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है।
विज्ञापन
उठान न होने से धान से मंडियां अटीं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। धान खरीद अपने चरम पर है और मंडियों से उठान नहीं हो रहा है। ऐसे में मंडियों में जगह कम पड़ गई है। कस्बे की मंडी में जगह की कमी के कारण आढ़तियों व किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी के शेड व फड़ खरीद शुरू होने के चार दिन बाद भी खाली नहीं करवाए गए हैं, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
आढ़ती एसोसिएशन के पूर्व प्रधान दलजीत सिंह बाजवा, शिव कुमार बंसल का कहना है कि कुछ दिन पूर्व डीसी ने मंडी का दौरा कर किसानों और आढ़तियों की समस्याओं को सुनकर दो दिन में उठान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक शेड व फड़ों से उठान न होने के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान अशोक कुमार, रण सिंह, सर्बजीत सिंह, बलविंद्र सिंह ने बताया कि उनके घरों में भंडारण की जगह की कमी है। खेत से धान की कटाई कर सीधे मंडी में लेकर आते हैं।
धान को अधिक दिनों तक ट्राली में रखने से धान काली पड़ जाती है जिसके कारण आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। लेकिन मंडी में अधिकतर फड़ों व शेड में गेहूं भरा होने के कारण मंडी में धान सुखाने के लिए जगह कम पड़ रही है। इस बारे में अनेक बार संबंधित विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया है। किसानों का कहना है अचानक मौसम में परिवर्तन होने पर बारिश से हजारों क्विंटल धान पानी की भेंट चढ़ जाएगा। किसानों और आढ़तियों ने शेड व फड़ खाली करवाने की मांग की है।