{"_id":"69e3d5f110a2e253da007784","slug":"nisar-a-master-craftsman-of-musical-instruments-was-honored-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1020-154618-2026-04-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: वाद्य यंत्र बनाने के धनी निसार को किया सम्मानित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: वाद्य यंत्र बनाने के धनी निसार को किया सम्मानित
Sun, 19 Apr 2026 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 19 Apr 2026 12:35 AM IST
विज्ञापन
रादौर की कांबोज धर्मशाला में निसार अहमद के साथ सभा के सदस्य। सभा
संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। गांव चमरोडी निवासी निसार अहमद (53) को वर्षों से वाद्य यंत्र बनाने में महारत हासिल है। वाद्य यंत्र बनाने में उनके योगदान को लेकर शुक्रवार को शहीद उधम सिंह धर्मशाला रादौर में जिला हरियाणा कांबोज सभा की ओर से सम्मानित किया गया।
निसार इस प्राचीन कला को जिंदा रखने के लिए युवा पीढ़ी को भी इसका प्रशिक्षण दे रहे हैं। निसार अहमद ने बताया कि वह दशकों से वाद्य यंत्र बनाने का कार्य कर रहे हैं। गांव कुंडा कला, सहारनपुर निवासी उसके मामा के लड़के यासिन द्वारा लगभग 25 वर्ष पहले उन्हें इसका प्रशिक्षण दिया था। इसके बाद उसने सारंगी, बेंजो, ढोलक, डमरू, नगाड़ा आदि वाद्य यंत्र बनाने की कला हासिल की।
वह तुन की लकड़ी से सारंगी व डमरू, शीशम की लकड़ी से ढोलक, लोहे से नगाड़ा, पाइन की लकड़ी से बैंजो तैयार करते हैं। सारंगी बनाने में उसे लगभग चार दिन लगते हैं, जो लगभग 5 हजार रुपये तक बिकती है। बैंजो बनाने में लगभग 4 से 5 दिन, डमरू व ढोलक बनाने में एक दिन लगता है। डमरू करीब 800 रुपये व ढोलक दो हजार से लेकर 9 हजार रुपये में बिकता है।
विज्ञापन
नगाड़ा बनाने में दो दिन लगते है, जो लगभग पांच हजार रुपये का बिकता है। उन्होंने बताया कि यह सभी वाद्य यंत्र महाभारत काल से बनाए जाते आ रहे हैं। जो हमारी प्राचीन कला को पेश करते हैं। उसके द्वारा बनाए गए वाद्य यंत्र की हरियाणा, पंजाब व दिल्ली में बहुत मांग है।
विज्ञापन
रादौर। गांव चमरोडी निवासी निसार अहमद (53) को वर्षों से वाद्य यंत्र बनाने में महारत हासिल है। वाद्य यंत्र बनाने में उनके योगदान को लेकर शुक्रवार को शहीद उधम सिंह धर्मशाला रादौर में जिला हरियाणा कांबोज सभा की ओर से सम्मानित किया गया।
निसार इस प्राचीन कला को जिंदा रखने के लिए युवा पीढ़ी को भी इसका प्रशिक्षण दे रहे हैं। निसार अहमद ने बताया कि वह दशकों से वाद्य यंत्र बनाने का कार्य कर रहे हैं। गांव कुंडा कला, सहारनपुर निवासी उसके मामा के लड़के यासिन द्वारा लगभग 25 वर्ष पहले उन्हें इसका प्रशिक्षण दिया था। इसके बाद उसने सारंगी, बेंजो, ढोलक, डमरू, नगाड़ा आदि वाद्य यंत्र बनाने की कला हासिल की।
विज्ञापन
वह तुन की लकड़ी से सारंगी व डमरू, शीशम की लकड़ी से ढोलक, लोहे से नगाड़ा, पाइन की लकड़ी से बैंजो तैयार करते हैं। सारंगी बनाने में उसे लगभग चार दिन लगते हैं, जो लगभग 5 हजार रुपये तक बिकती है। बैंजो बनाने में लगभग 4 से 5 दिन, डमरू व ढोलक बनाने में एक दिन लगता है। डमरू करीब 800 रुपये व ढोलक दो हजार से लेकर 9 हजार रुपये में बिकता है।
विज्ञापन
नगाड़ा बनाने में दो दिन लगते है, जो लगभग पांच हजार रुपये का बिकता है। उन्होंने बताया कि यह सभी वाद्य यंत्र महाभारत काल से बनाए जाते आ रहे हैं। जो हमारी प्राचीन कला को पेश करते हैं। उसके द्वारा बनाए गए वाद्य यंत्र की हरियाणा, पंजाब व दिल्ली में बहुत मांग है।