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एक को जानो, एक को मानो और एक हो जाओ : उपासक
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
Updated Wed, 03 Feb 2016 12:15 AM IST
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शास्त्री कॉलोनी में संत निरंकारी मिशन द्वारा विशेष संत समागम का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता इंग्लैंड से आए प्रचारक महात्मा एचएस उपासक ने की। मंच संचालन महात्मा जय कुमार नारंग ने किया। समागम में अनेकों वक्ताओं, कवियों व गीतकारों ने अपने रचनायें प्रस्तुत कर मानव एकता का संदेश दिया।
जोन प्रभारी टेक चंद ने इंग्लैंड से आए महापुरुषों का निरंकारी मिशन का प्रतीक सफेद दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। महात्मा एचएस उपासक अपने प्रवचनों में कहा कि ये निराकार परम पिता परमात्मा एक है। आज धर्म के नाम पर इंसान को बांटा जा रहा है, जिससे अनेक प्रकार के झगड़े हो रहे हैं।
आज का इंसान धर्म ग्रंथों को तो मान रहा है, किंतु उनके संदेशों को नहीं मान रहा है। धर्म ग्रंथ के माध्यम से गुरुओं, पीरों और पैगंबरों को पहचाना जा सकता है। इंसान भक्ति तो कर रहा है पर परमात्मा को बिना जाने कर रहा है। किसी भी धर्म के अराध्य चाहे वह राम हो, गुरु नानक, हो या फिर जीजस क्राईस हो, वे सभी मानवता का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण जी की बांसुरी इसलिए सबको पसंद है क्योंकि उसमें गांठें नहीं होती।
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इसी तरह इंसान के मन में वैर, ईर्ष्या व नफरत की जो दीवार रूपी गांठें बनी हुई हैं, उन्हें तोड़ने की जरूरत है। हमें उन दीवारों को तोड़ कर प्यार के पुल बनाने हैं।
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जोन प्रभारी टेक चंद ने इंग्लैंड से आए महापुरुषों का निरंकारी मिशन का प्रतीक सफेद दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। महात्मा एचएस उपासक अपने प्रवचनों में कहा कि ये निराकार परम पिता परमात्मा एक है। आज धर्म के नाम पर इंसान को बांटा जा रहा है, जिससे अनेक प्रकार के झगड़े हो रहे हैं।
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आज का इंसान धर्म ग्रंथों को तो मान रहा है, किंतु उनके संदेशों को नहीं मान रहा है। धर्म ग्रंथ के माध्यम से गुरुओं, पीरों और पैगंबरों को पहचाना जा सकता है। इंसान भक्ति तो कर रहा है पर परमात्मा को बिना जाने कर रहा है। किसी भी धर्म के अराध्य चाहे वह राम हो, गुरु नानक, हो या फिर जीजस क्राईस हो, वे सभी मानवता का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण जी की बांसुरी इसलिए सबको पसंद है क्योंकि उसमें गांठें नहीं होती।
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इसी तरह इंसान के मन में वैर, ईर्ष्या व नफरत की जो दीवार रूपी गांठें बनी हुई हैं, उन्हें तोड़ने की जरूरत है। हमें उन दीवारों को तोड़ कर प्यार के पुल बनाने हैं।