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सत्रह दिन बाद कपालमोचन मेला, तैयारियां अधूरी
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Tue, 03 Nov 2015 12:33 AM IST
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राज्यस्तरीय कपालमोचन मेले को लेकर प्रशासनिक उदासीनता इस बार मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था पर भारी पड़ सकती है। मेला शुरू होने में करीब 17 दिन शेष हैं। इतने कम समय में श्रद्धालुओं को जरूरी सुविधाएं मुहैया करवाना असंभव लग रहा है।
हालात यह हैं कि कपालमोचन में एक भी शौचालय नहीं बना है। कपालमोचन सरोवर को छोड़ बाकी दोनों ऋणमोचन और सूरजकुंड सरोवर की हालत दयनीय है। पूरे क्षेत्र में गंदगी व बदबू का साम्राज्य है। सड़कों पर पैच वर्क भी अधूरा पड़ा है।
सरोवरों के किनारे लगी स्थायी लाइटें भी शोपीस बनकर रह गई हैं, जिनमें कुछ पोल तो बिना लाइट के ही खड़े हैं। मेला क्षेत्र में पीने के पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। बिजली सप्लाई के तार भी ढीले सड़कों पर झूल रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति के लिए क्षेत्र का दौरा कर चले जाते हैं।
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शौचालय समय पर न बनने से आ सकती है परेशानी
कपालमोचन क्षेत्र में हर वर्ष मेले के दौरान करीब तीन सौ हाईटेक अस्थायी शौचालयों को निर्माण कराया जाता था, लेकिन इस बार प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते लगभग 600 शौचालयों को बनाने के लिए सात अक्तूबर को टेंडर जारी कर दिया था। इस संबंध में ठेकेदार को शौचालय बनाने के आदेश जारी कर दिए थे, किंतु अब तक एक भी शौचालय पूरे कपालमोचन में न बनने से प्रश्नचिह्न लग रहा है।
सफाई पर भी ध्यान नहीं
मेला स्थल में सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऋणमोचन में आधी-अधूरी साफ-सफाई कर कीचड़ व सरोवर में उगी घास में ही पानी भरना शुरू कर दिया है। इससे भी बुरी स्थिति सूरजकुंड सरोवर की है, जिसकी न तो अभी सफाई हुई और न ही पानी भरना शुरू किया गया। जबकि श्राइन बोर्ड व अन्य प्रशासनिक अधिकारी सूरजकुंड पर बने कार्यालय में अकसर आते-जाते हैं।
शाम होते ही छा जाता अंधेरा
कपालमोचन क्षेत्र में स्थित तीनों सरोवरों के चारों ओर लगी स्थायी लाइटें खराब होने से शाम होते ही पूरे क्षेत्र में अंधेरा छा जाता है। लाइटों को दुरुस्त कराने का कार्य भी शुरू नहीं किया गया है। शाम होते ही पूरा मेला क्षेत्र अंधेरे की आगोश में आ जाता है। सरोवरों के किनारे लगीं लाइटों में से अधिकतर में बिजली के कनेक्शन नहीं हैं। कुछ पोल पर लाइटें गायब हैं।
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हालात यह हैं कि कपालमोचन में एक भी शौचालय नहीं बना है। कपालमोचन सरोवर को छोड़ बाकी दोनों ऋणमोचन और सूरजकुंड सरोवर की हालत दयनीय है। पूरे क्षेत्र में गंदगी व बदबू का साम्राज्य है। सड़कों पर पैच वर्क भी अधूरा पड़ा है।
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सरोवरों के किनारे लगी स्थायी लाइटें भी शोपीस बनकर रह गई हैं, जिनमें कुछ पोल तो बिना लाइट के ही खड़े हैं। मेला क्षेत्र में पीने के पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। बिजली सप्लाई के तार भी ढीले सड़कों पर झूल रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति के लिए क्षेत्र का दौरा कर चले जाते हैं।
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शौचालय समय पर न बनने से आ सकती है परेशानी
कपालमोचन क्षेत्र में हर वर्ष मेले के दौरान करीब तीन सौ हाईटेक अस्थायी शौचालयों को निर्माण कराया जाता था, लेकिन इस बार प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते लगभग 600 शौचालयों को बनाने के लिए सात अक्तूबर को टेंडर जारी कर दिया था। इस संबंध में ठेकेदार को शौचालय बनाने के आदेश जारी कर दिए थे, किंतु अब तक एक भी शौचालय पूरे कपालमोचन में न बनने से प्रश्नचिह्न लग रहा है।
सफाई पर भी ध्यान नहीं
मेला स्थल में सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऋणमोचन में आधी-अधूरी साफ-सफाई कर कीचड़ व सरोवर में उगी घास में ही पानी भरना शुरू कर दिया है। इससे भी बुरी स्थिति सूरजकुंड सरोवर की है, जिसकी न तो अभी सफाई हुई और न ही पानी भरना शुरू किया गया। जबकि श्राइन बोर्ड व अन्य प्रशासनिक अधिकारी सूरजकुंड पर बने कार्यालय में अकसर आते-जाते हैं।
शाम होते ही छा जाता अंधेरा
कपालमोचन क्षेत्र में स्थित तीनों सरोवरों के चारों ओर लगी स्थायी लाइटें खराब होने से शाम होते ही पूरे क्षेत्र में अंधेरा छा जाता है। लाइटों को दुरुस्त कराने का कार्य भी शुरू नहीं किया गया है। शाम होते ही पूरा मेला क्षेत्र अंधेरे की आगोश में आ जाता है। सरोवरों के किनारे लगीं लाइटों में से अधिकतर में बिजली के कनेक्शन नहीं हैं। कुछ पोल पर लाइटें गायब हैं।