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Yamuna Nagar News: जिले की राजनीति में महिलाओं की अनदेखी

Fri, 17 Apr 2026 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Fri, 17 Apr 2026 11:45 PM IST
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Neglect of Women in District Politics
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। देशभर में नारी शक्ति वंदन और महिलाओं के राजनीतिक आरक्षण को लेकर बहस तेज है, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग नजर आ रही है। जिले में सक्रिय राजनीतिक दलों की कार्यकारिणियों पर नजर डालें तो महिलाओं की भागीदारी बेहद सीमित है। अधिकांश दलों में जिला स्तर की निर्णय लेने वाली इकाइयों में महिला नेताओं को पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा।
सत्ता पक्ष भाजपा और कांग्रेस की शहरी इकाइयों को छोड़ दें तो अन्य दलों में महिलाओं की भागीदारी लगभग नगण्य है। कांग्रेस ने अपनी 31 सदस्यीय शहरी इकाई में चार महिलाओं को शामिल किया है, जिनमें महासचिव, उपाध्यक्ष और सचिव जैसे पद दिए गए हैं। कांग्रेस की ग्रामीण कमेटी में किसी भी महिला को स्थान नहीं दिया गया, जिसको लेकर पार्टी के अंदर ही कुछ नेताओं ने गठन के समय विरोध भी जताया था।
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भाजपा की बात करें तो जिला कार्यकारिणी में महिलाओं को कुछ हद तक प्रतिनिधित्व दिया गया है। पार्टी ने जिला उपाध्यक्ष पद पर तीन महिलाओं और जिला मंत्री पद पर दो महिलाओं को शामिल किया है। इसके बावजूद कुल संख्या के अनुपात में यह भागीदारी अभी भी सीमित मानी जा रही है।
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वहीं, अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों की स्थिति और भी कमजोर है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की जिला कार्यकारिणी में एक भी महिला पदाधिकारी शामिल नहीं है। इसी तरह आम आदमी पार्टी की जिला इकाई में भी किसी महिला को कार्यकारिणी में स्थान नहीं दिया गया है। यह स्थिति तब है जब जिला कार्यकारिणी को पार्टी का सबसे अहम निर्णय लेने वाला मंच माना जाता है, जहां संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं।
लगभग सभी दलों ने महिला मोर्चा या महिला विंग के नाम से अलग संगठन बना रखे हैं, लेकिन मुख्य कार्यकारिणी में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जा रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला विंग बनाना केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, जबकि असल शक्ति और निर्णय लेने की प्रक्रिया से महिलाओं को दूर रखा जा रहा है।

संगठन में बराबरी का अवसर मिले : डाॅ. अंजू
समाजसेविका डाॅ. अंजू बाजपेयी का कहना है कि जब तक महिलाओं को मुख्य कार्यकारिणी में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक वास्तविक सशक्तिकरण संभव नहीं है। केवल महिला मोर्चा तक सीमित रखने के बजाय मुख्य संगठन में भी बराबरी का अवसर दिया जाना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि राजनीतिक दल केवल नारों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीनी स्तर पर महिलाओं को नेतृत्व में उचित स्थान देकर उनके सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
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