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Yamuna Nagar News: शनि की वक्री चाल के कारण तपेगा नौतपा
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संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। नौतपा से पहले ही गर्मी अपना प्रचंड रूप दिखा रही है। इस बार नौतपा 25 मई से शुरू हो जाएगा। इन नौ दिनों की अवधि में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। इस कारण सूर्यदेव की तपिश काफी ज्यादा महसूस होगी।
डॉ. रामराज कौशिक के अनुसार सूर्य 25 मई को 3.15 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसके बाद नौ दिन का नौतपा रहेगा। इसके साथ ही सूर्य देव आठ जून को 1.04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे। इसी दिन सूर्य देव मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश के साथ ही नौतपा प्रारंभ हो जाएंगे। ज्येष्ठ मास की ग्रीष्म ऋतु नौतपा को अधिक गर्मी का संकेत माना जाता है।
नौतपा शुक्ल पक्ष में आर्द्रा नक्षत्र से नौ नक्षत्रों तक यानी नौ दिनों तक रहता है। यह आवश्यक नहीं है कि नौतपा में अधिक गर्मी हो। आर्द्रा के नौ नक्षत्रों तक जो सबसे अधिक गर्मी प्राप्त करता है, बाद में सूर्य उस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहता है और अच्छी वर्षा होती है। नौतपा की शुरुआत भी रोहिणी नक्षत्र से होगी। नौतपा में तेज हवा के साथ बवंडर और बारिश की संभावना रहती है।
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नौतपा से आशय सूर्य का नौ दिनों तक अपने सबसे अधिक ताप में होना है। यानी इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है। चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी है, जो शीतलता का कारक है, परंतु इस समय में ये सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है इन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सबसे अधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है। नौतपा के दौरान तापमान 44 से 45 डिग्री तक पहुंच जाता है। सूर्य की गर्मी के चलते समुद्र और नदियों का जल वाष्प बनकर उड़ जाता है और यही वाष्प बादल का रूप ले लेती हैं।
खगोल विज्ञान के अनुसार इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधे लंबी पड़ती है। इस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है। यदि नौतपा के सभी दिन पूरे रहे तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आने का प्रभाव ज्योतिष गणना के मुताबिक शनि की वक्री चाल के चलते नौतपा खूब तपेगा। हालांकि नौतपा के आखिरी दो दिनों के भीतर आंधी तूफान व बारिश होने की संभावना रहेगी।
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साढौरा। नौतपा से पहले ही गर्मी अपना प्रचंड रूप दिखा रही है। इस बार नौतपा 25 मई से शुरू हो जाएगा। इन नौ दिनों की अवधि में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। इस कारण सूर्यदेव की तपिश काफी ज्यादा महसूस होगी।
डॉ. रामराज कौशिक के अनुसार सूर्य 25 मई को 3.15 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसके बाद नौ दिन का नौतपा रहेगा। इसके साथ ही सूर्य देव आठ जून को 1.04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेंगे। इसी दिन सूर्य देव मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश के साथ ही नौतपा प्रारंभ हो जाएंगे। ज्येष्ठ मास की ग्रीष्म ऋतु नौतपा को अधिक गर्मी का संकेत माना जाता है।
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नौतपा शुक्ल पक्ष में आर्द्रा नक्षत्र से नौ नक्षत्रों तक यानी नौ दिनों तक रहता है। यह आवश्यक नहीं है कि नौतपा में अधिक गर्मी हो। आर्द्रा के नौ नक्षत्रों तक जो सबसे अधिक गर्मी प्राप्त करता है, बाद में सूर्य उस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहता है और अच्छी वर्षा होती है। नौतपा की शुरुआत भी रोहिणी नक्षत्र से होगी। नौतपा में तेज हवा के साथ बवंडर और बारिश की संभावना रहती है।
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नौतपा से आशय सूर्य का नौ दिनों तक अपने सबसे अधिक ताप में होना है। यानी इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है। चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी है, जो शीतलता का कारक है, परंतु इस समय में ये सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है इन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सबसे अधिक गर्मी वाले होते हैं। इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है। नौतपा के दौरान तापमान 44 से 45 डिग्री तक पहुंच जाता है। सूर्य की गर्मी के चलते समुद्र और नदियों का जल वाष्प बनकर उड़ जाता है और यही वाष्प बादल का रूप ले लेती हैं।
खगोल विज्ञान के अनुसार इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधे लंबी पड़ती है। इस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है। यदि नौतपा के सभी दिन पूरे रहे तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आने का प्रभाव ज्योतिष गणना के मुताबिक शनि की वक्री चाल के चलते नौतपा खूब तपेगा। हालांकि नौतपा के आखिरी दो दिनों के भीतर आंधी तूफान व बारिश होने की संभावना रहेगी।