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एकजुट होकर करना होगा प्रकृति को संरक्षित : सुयशा
Mon, 19 Aug 2024 05:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 19 Aug 2024 05:21 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रक्षाबंधन पर्व मनाया गया। प्रवक्ता सुयशा भारती ने उपस्थित संगत से कहा कि हमारी प्रकृति संपूर्ण मानव जाति से सुरक्षा की गुहार कर रही है। धरती माता की दुर्दशा छिपी नहीं है। कहीं जल स्तर निरंतर घट रहा है और कहीं बाढ़ जैसी स्थिति होने के कारण सामान्य जीवन भी अस्त व्यस्त हो चुका है।
उन्होंने कहा कि ये आपदा प्रकृति की पीड़ा का संकेत हैं, जिन्हें प्रकृति संपूर्ण मानव जाति को चेतावनी दे रही है। भारत भूमि में आज भी कई स्थान ऐसे हैं, जहां जीवन में प्रकृति के संरक्षण को ही प्रथम स्थान दिया जाता है। राजस्थान के राजसमंद जिले के पिपलांत्री गांव में बेटी के जन्म होने पर 111 पौधे लगाए जाते है और निरंतर उनकी देखभाल की जाती है।
उस ग्राम की सभी बेटियां पेड़-पौधों को राखी बांधती है। ऐसे ग्राम को आदर्श बनाकर उसका अनुसरण हम सभी को करना होगा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान संरक्षण प्रकल्प द्वारा प्रकृति को पुनः उसके वास्तविक स्वरूप में लाने का अथक प्रयास कर रहा है। सभी को एकजुट होकर प्रकृति एवं पर्यावरण को संरक्षित करना होगा, तभी भावी पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य प्रदान कर सकते हैं।
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जल, वायु और अन्न सहज अवश्य ही मिल जाते हैं, पर यह अनमोल हैं। इनके बिना धरती पर जीवन संभव नहीं है। जब मनुष्य अपने कर्तव्य को भूलकर स्वार्थ के पीछे लग जाता है, तब उसके जीवन का पतन होता है। हम अपना कर्तव्य पूर्ण निष्ठा व दृढ़ संकल्पित होकर निभाएंगे तो प्रकृति व पर्यावरण स्वयं ही संरक्षित हो जाएंगे।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रक्षाबंधन पर्व मनाया गया। प्रवक्ता सुयशा भारती ने उपस्थित संगत से कहा कि हमारी प्रकृति संपूर्ण मानव जाति से सुरक्षा की गुहार कर रही है। धरती माता की दुर्दशा छिपी नहीं है। कहीं जल स्तर निरंतर घट रहा है और कहीं बाढ़ जैसी स्थिति होने के कारण सामान्य जीवन भी अस्त व्यस्त हो चुका है।
उन्होंने कहा कि ये आपदा प्रकृति की पीड़ा का संकेत हैं, जिन्हें प्रकृति संपूर्ण मानव जाति को चेतावनी दे रही है। भारत भूमि में आज भी कई स्थान ऐसे हैं, जहां जीवन में प्रकृति के संरक्षण को ही प्रथम स्थान दिया जाता है। राजस्थान के राजसमंद जिले के पिपलांत्री गांव में बेटी के जन्म होने पर 111 पौधे लगाए जाते है और निरंतर उनकी देखभाल की जाती है।
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उस ग्राम की सभी बेटियां पेड़-पौधों को राखी बांधती है। ऐसे ग्राम को आदर्श बनाकर उसका अनुसरण हम सभी को करना होगा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान संरक्षण प्रकल्प द्वारा प्रकृति को पुनः उसके वास्तविक स्वरूप में लाने का अथक प्रयास कर रहा है। सभी को एकजुट होकर प्रकृति एवं पर्यावरण को संरक्षित करना होगा, तभी भावी पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य प्रदान कर सकते हैं।
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जल, वायु और अन्न सहज अवश्य ही मिल जाते हैं, पर यह अनमोल हैं। इनके बिना धरती पर जीवन संभव नहीं है। जब मनुष्य अपने कर्तव्य को भूलकर स्वार्थ के पीछे लग जाता है, तब उसके जीवन का पतन होता है। हम अपना कर्तव्य पूर्ण निष्ठा व दृढ़ संकल्पित होकर निभाएंगे तो प्रकृति व पर्यावरण स्वयं ही संरक्षित हो जाएंगे।