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आठ लोगों के हत्यारे संजीव ने नेपाल में बिताए थे सात दिन, फिर पहुंचा था गुजरात
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murder of the Reluram puniya gilty Sanjeev Arrested by police
- फोटो : Yamuna Nagar
यमुनानगर। बरवाला के पूर्व विधायक रेलूराम पुनिया समेत परिवार के आठ लोगों के हत्यारे संजीव को सीआईए टू पुलिस बुधवार को उसके घर सहारनपुर की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी ले गई। क्लीन सेव रहने वाले संजीव की दाड़ी बढ़ी देख उसकी मां भी उसे पहचान नहीं पाई। जब पुलिस व संजीव ने अपने बारे में बताया तो उसकी मां ने उससे बात की। रिमांड के दौरान पूछताछ में संजीव ने बताया कि जेल से फरार होने के बाद वह अंबाला से ट्रेन में बैठकर सबसे पहले कोलकाता के हावड़ा चला गया। यहां दो दिन रहने के बाद नेपाल चला गया। वहां करीब एक सप्ताह रहने के बाद गुजरात व मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी का भ्रमण किया।
नदी किनारे धार्मिक स्थलों पर वह रुक जाता था। जब उससे कोई वहां पर पहचान पत्र मांगता था तो वह से भाग जाता था। कुछ दिनों बाद ही उसने दाड़ी बढ़ाकर बाबा का रूप बना लिया और मंदिरों में रहने लगा। इसके बाद वह यूपी व महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों पर भेष बदलकर रहा। मेरठ में जब वह भेष बदलकर रह रहा था तो 31 जनवरी को एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। सीआईए टू इंचार्ज महरूफ अली ने बताया कि संजीव पर फर्जी दस्तावेज देकर पैरोल लेकर फरार होने के साथ अंबाला जेल में सुरंग बनाकर भागने के प्रयास के मामले में भी केस दर्ज है। उस केस में वह भगौड़ा है। संजीव को दो दिन के रिमांड पर लिया हुआ है। वीरवार को उसे दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।
पैरोल लेने के लिए बीमार मां का हवाले देकर मकान की मरम्मत करवाने की दी थी एप्लीकेशन:
जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे संजीव ने पैरोल लेने के लिए अपनी बीमार मां का हवाला देते हुए कुरुक्षेत्र जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुभाषचंद को एप्लीकेशन दी थी। इसमें उसने मकान की मरम्मत की बात कही थी। तब संजीव ने जिला जेल में दुष्कर्म के केस में बंद बिलासपुर के चंगनौली के पूर्व सरपंच के बेटे से मुलाकात करके उनके मकान पर मां को किराये पर रहने का फर्जी इकरारनामा बनवाया था। इसी पते पर संजीव ने पैरोल ली थी। मई 2018 में संजीव की पैरोल मंजूर हुई। 31 मई 2018 को उसे वापस जेल में जाना था, लेकिन जेल में जाने की बजाय वह फरार हो गया। तब कुरुक्षेत्र जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुभाष चंद की शिकायत पर बिलासपुर पुलिस ने 10 जून 2018 को संजीव के खिलाफ प्रीजनर एक्ट धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। करीब दो साल आठ माह बाद एसटीएफ की टीम ने मेरठ से उसे गिरफ्तार कर सीआईए टू के हवाले किया था।
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ये है पूरा मामला
सहारनपुर की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी निवासी संजीव कुमार बरवाला के पूर्व विधायक अंबाला के प्रभुवाला गांव निवासी रेलूराम पुनिया का दामाद था। उसने साल 1998 में रेलूराम की पुत्री सोनिया से लव मैरिज की थी। 23 अगस्त 2001 को उसने अपनी पत्नी सोनिया के साथ मिलकर बरवाला में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उनके परिवार के आठ लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मृतकों में रेलूराम पूनिया के अलावा उनकी पत्नी कृष्णा, बेटे सुनील, बहू शकुंतला, बेटी प्रियंका, 4 साल के पोते लोकेश, ढाई साल की पोती शिवानी और डेढ़ महीने की प्रीति शामिल थे। तब उकलाना थाने में केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने संजीव, सोनिया व उसके माता पिता, भाई, मामा के लड़के व चाचा को गिरफ्तार किया था।
31 मई 2004 को सेशन जज की अदालत ने मृतक की बेटी सोनिया और दामाद संजीव को फांसी की सजा सुनाई थी। जबकि बाकी आरोपियों को बरी कर दिया था। दो अप्रैल 2005 को हाईकोर्ट ने संजीव व सोनिया की सजा को उम्रकैद में बदला। 15 फरवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने सेशन जज की सजा बरकरार रखने का फैसला दिया। 23 अगस्त 2007 को समीक्षा याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज हुई। सेशन जज ने 26 नवंबर 2007 को फांसी देने की तारीख मुकर्रर की। सोनिया और संजीव ने राष्ट्रपति के पास दया के लिए याचिका लगाई। तीन अप्रैल 2013 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दया याचिका खारिज कर दी थी। जनवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी थी। इसके बाद संजीव व सोनिया अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, झज्जर, रोहतक व फरीदाबाद की जेलों में रहे। मई 2018 में वह कुरुक्षेत्र जेल से पैरोल पर बाहर आया था। लेकिन उसके बाद वह फरार हो गया था। फरार होने के बाद वह भेष बदलकर यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब व अन्य राज्यों में रहा। 31 जनवरी को मेरठ से एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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नदी किनारे धार्मिक स्थलों पर वह रुक जाता था। जब उससे कोई वहां पर पहचान पत्र मांगता था तो वह से भाग जाता था। कुछ दिनों बाद ही उसने दाड़ी बढ़ाकर बाबा का रूप बना लिया और मंदिरों में रहने लगा। इसके बाद वह यूपी व महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों पर भेष बदलकर रहा। मेरठ में जब वह भेष बदलकर रह रहा था तो 31 जनवरी को एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। सीआईए टू इंचार्ज महरूफ अली ने बताया कि संजीव पर फर्जी दस्तावेज देकर पैरोल लेकर फरार होने के साथ अंबाला जेल में सुरंग बनाकर भागने के प्रयास के मामले में भी केस दर्ज है। उस केस में वह भगौड़ा है। संजीव को दो दिन के रिमांड पर लिया हुआ है। वीरवार को उसे दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।
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पैरोल लेने के लिए बीमार मां का हवाले देकर मकान की मरम्मत करवाने की दी थी एप्लीकेशन:
जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे संजीव ने पैरोल लेने के लिए अपनी बीमार मां का हवाला देते हुए कुरुक्षेत्र जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुभाषचंद को एप्लीकेशन दी थी। इसमें उसने मकान की मरम्मत की बात कही थी। तब संजीव ने जिला जेल में दुष्कर्म के केस में बंद बिलासपुर के चंगनौली के पूर्व सरपंच के बेटे से मुलाकात करके उनके मकान पर मां को किराये पर रहने का फर्जी इकरारनामा बनवाया था। इसी पते पर संजीव ने पैरोल ली थी। मई 2018 में संजीव की पैरोल मंजूर हुई। 31 मई 2018 को उसे वापस जेल में जाना था, लेकिन जेल में जाने की बजाय वह फरार हो गया। तब कुरुक्षेत्र जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुभाष चंद की शिकायत पर बिलासपुर पुलिस ने 10 जून 2018 को संजीव के खिलाफ प्रीजनर एक्ट धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। करीब दो साल आठ माह बाद एसटीएफ की टीम ने मेरठ से उसे गिरफ्तार कर सीआईए टू के हवाले किया था।
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ये है पूरा मामला
सहारनपुर की लक्ष्मणपुरी कॉलोनी निवासी संजीव कुमार बरवाला के पूर्व विधायक अंबाला के प्रभुवाला गांव निवासी रेलूराम पुनिया का दामाद था। उसने साल 1998 में रेलूराम की पुत्री सोनिया से लव मैरिज की थी। 23 अगस्त 2001 को उसने अपनी पत्नी सोनिया के साथ मिलकर बरवाला में पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उनके परिवार के आठ लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मृतकों में रेलूराम पूनिया के अलावा उनकी पत्नी कृष्णा, बेटे सुनील, बहू शकुंतला, बेटी प्रियंका, 4 साल के पोते लोकेश, ढाई साल की पोती शिवानी और डेढ़ महीने की प्रीति शामिल थे। तब उकलाना थाने में केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने संजीव, सोनिया व उसके माता पिता, भाई, मामा के लड़के व चाचा को गिरफ्तार किया था।
31 मई 2004 को सेशन जज की अदालत ने मृतक की बेटी सोनिया और दामाद संजीव को फांसी की सजा सुनाई थी। जबकि बाकी आरोपियों को बरी कर दिया था। दो अप्रैल 2005 को हाईकोर्ट ने संजीव व सोनिया की सजा को उम्रकैद में बदला। 15 फरवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने सेशन जज की सजा बरकरार रखने का फैसला दिया। 23 अगस्त 2007 को समीक्षा याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज हुई। सेशन जज ने 26 नवंबर 2007 को फांसी देने की तारीख मुकर्रर की। सोनिया और संजीव ने राष्ट्रपति के पास दया के लिए याचिका लगाई। तीन अप्रैल 2013 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दया याचिका खारिज कर दी थी। जनवरी 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी थी। इसके बाद संजीव व सोनिया अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, झज्जर, रोहतक व फरीदाबाद की जेलों में रहे। मई 2018 में वह कुरुक्षेत्र जेल से पैरोल पर बाहर आया था। लेकिन उसके बाद वह फरार हो गया था। फरार होने के बाद वह भेष बदलकर यूपी, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब व अन्य राज्यों में रहा। 31 जनवरी को मेरठ से एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया।