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यूक्रेन से घर लौटे बच्चों की मां ने उतारी आरती, नहीं रोक पाई आंखों के आंसू
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फोटो: 27, 29, 30, 30ए, 30 बी
बच्चों की सकुशल वापस पर छलके खुशी के आंसू, मां ने उतारी आरती
परिजनों ने घर पर केक काटकर किया खुशी का इजहार, पड़ोसी-रिश्तेदारों ने भी जाना हाल
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। यूक्रेन में फंसे जिले के कई विद्यार्थी सोमवार की सुबह अपने घर पहुंच गए। इससे पहले बच्चों के इंतजार में बेकरार परिजन उन्हें लेने के लिए दिल्ली हवाई अड्डे पर भी पहुंचे थे, जहां अपनों को सामने देख खुशी से उनकी आंखें भर आईं। घर पहुंचने पर मां ने बच्चों की आरती उतारी तो कहीं पर केक काट कर खुशी मनाई गई। हालांकि अभी जिले के कई विद्यार्थी यूक्रेन में ही फंसे हुए हैं। परिजन भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि उनके बच्चे भी सकुशल घर पर लौट आएं। वहीं जो बच्चे घर आ गए हैं, पड़ोसी व रिश्तेदार हालचाल जानने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं।
गांव लाल छप्पर निवासी अंकुर रोमानिया बॉर्डर से प्लेन में बैठकर रविवार रात करीब 12 बजे दिल्ली पहुंचा। अंकुर को लेने के लिए उनके पिता अनिल कौशिक और अन्य रिश्तेदार दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने जब अंकुर को देखा तो सभी भावुक हो गए। घर पहुंचने पर अंकुर की माता कांता कौशिक ने बेटे की आरती उतारी। घर की देहली पर दीपक जलाए। बेटे को देख कर भावुक हुई मां भी आंखों से आंसुओं को नहीं रोक पाई। घर में ले जाने के बाद अंकुर ने माता-पिता के साथ मिलकर केक काटा। अंकुर के चाचा अरुण कौशिक, चाची सुमन, विपिन, बड़ा भाई गुलशन कौशिक, भाभी अकांशा, फूफा पवन, बुआ रेखा, बहन शीतल व जीजा राहुल सभी इस मौके पर मौजूद रहे। अनिल कौशिक ने बताया कि बेटे को घर में देख कर सभी बहुत खुश हैं। उनकी खुशी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रातभर कोई नहीं सोया। इसके लिए वह भारत सरकार का धन्यवाद भी करते हैं।
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फोटो: 30बी
तीन दिन जागने के बाद घर में ली चैन की नींद
विश्वकर्मा मोहल्ला निवासी चिराग सबलोक यूक्रेन के इवानो में फंसा हुआ था। रोमानिया बॉर्डर से वह भी रात को ही दिल्ली पहुंचा। उन्हें लेने के लिए पिता संजीव सबलोक खुद दिल्ली गए थे। मां ज्योति बेटे को देख कर रोने लगी। संजीव सबलोक ने बताया कि बेटे को देखकर वह बहुत खुश हैं। सोमवार को चिराग दिनभर घर में सोया रहा, चूंकि तीन दिन से वह ठीक से सो भी नहीं सका था।
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परिजनों का कहना है कि सरकार के प्रयास से ही बेटा सकुशल घर लौटा है। उनके साथ अंबाला के जलूबी निवासी अमीर चंद के बेटे प्रशांत और गांव ताहरपुर का रितिक भी घर पहुंचा। दामला के अमन शर्मा का बेटा स्कंद अभी दीनप्रो में फंसा हुआ है। वह अभी तक बॉर्डर पर नहीं पहुंचा। संजीव का कहना है कि जैसे उनके बच्चे घर पर आए हैं, इसी तरह दूसरे बच्चों को भी जल्द से जल्द वापस लाया जाए। चूंकि वह जानते हैं कि उनके माता-पिता पर क्या बीत रही है। चिराग ने बताया कि अब यूक्रेन में हालात बहुत खराब हो गए हैं। लगभग सभी हिस्सों में बमबारी होने लगी है।
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बच्चों की सकुशल वापस पर छलके खुशी के आंसू, मां ने उतारी आरती
परिजनों ने घर पर केक काटकर किया खुशी का इजहार, पड़ोसी-रिश्तेदारों ने भी जाना हाल
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। यूक्रेन में फंसे जिले के कई विद्यार्थी सोमवार की सुबह अपने घर पहुंच गए। इससे पहले बच्चों के इंतजार में बेकरार परिजन उन्हें लेने के लिए दिल्ली हवाई अड्डे पर भी पहुंचे थे, जहां अपनों को सामने देख खुशी से उनकी आंखें भर आईं। घर पहुंचने पर मां ने बच्चों की आरती उतारी तो कहीं पर केक काट कर खुशी मनाई गई। हालांकि अभी जिले के कई विद्यार्थी यूक्रेन में ही फंसे हुए हैं। परिजन भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि उनके बच्चे भी सकुशल घर पर लौट आएं। वहीं जो बच्चे घर आ गए हैं, पड़ोसी व रिश्तेदार हालचाल जानने के लिए उनके घर पहुंच रहे हैं।
गांव लाल छप्पर निवासी अंकुर रोमानिया बॉर्डर से प्लेन में बैठकर रविवार रात करीब 12 बजे दिल्ली पहुंचा। अंकुर को लेने के लिए उनके पिता अनिल कौशिक और अन्य रिश्तेदार दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने जब अंकुर को देखा तो सभी भावुक हो गए। घर पहुंचने पर अंकुर की माता कांता कौशिक ने बेटे की आरती उतारी। घर की देहली पर दीपक जलाए। बेटे को देख कर भावुक हुई मां भी आंखों से आंसुओं को नहीं रोक पाई। घर में ले जाने के बाद अंकुर ने माता-पिता के साथ मिलकर केक काटा। अंकुर के चाचा अरुण कौशिक, चाची सुमन, विपिन, बड़ा भाई गुलशन कौशिक, भाभी अकांशा, फूफा पवन, बुआ रेखा, बहन शीतल व जीजा राहुल सभी इस मौके पर मौजूद रहे। अनिल कौशिक ने बताया कि बेटे को घर में देख कर सभी बहुत खुश हैं। उनकी खुशी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रातभर कोई नहीं सोया। इसके लिए वह भारत सरकार का धन्यवाद भी करते हैं।
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फोटो: 30बी
तीन दिन जागने के बाद घर में ली चैन की नींद
विश्वकर्मा मोहल्ला निवासी चिराग सबलोक यूक्रेन के इवानो में फंसा हुआ था। रोमानिया बॉर्डर से वह भी रात को ही दिल्ली पहुंचा। उन्हें लेने के लिए पिता संजीव सबलोक खुद दिल्ली गए थे। मां ज्योति बेटे को देख कर रोने लगी। संजीव सबलोक ने बताया कि बेटे को देखकर वह बहुत खुश हैं। सोमवार को चिराग दिनभर घर में सोया रहा, चूंकि तीन दिन से वह ठीक से सो भी नहीं सका था।
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परिजनों का कहना है कि सरकार के प्रयास से ही बेटा सकुशल घर लौटा है। उनके साथ अंबाला के जलूबी निवासी अमीर चंद के बेटे प्रशांत और गांव ताहरपुर का रितिक भी घर पहुंचा। दामला के अमन शर्मा का बेटा स्कंद अभी दीनप्रो में फंसा हुआ है। वह अभी तक बॉर्डर पर नहीं पहुंचा। संजीव का कहना है कि जैसे उनके बच्चे घर पर आए हैं, इसी तरह दूसरे बच्चों को भी जल्द से जल्द वापस लाया जाए। चूंकि वह जानते हैं कि उनके माता-पिता पर क्या बीत रही है। चिराग ने बताया कि अब यूक्रेन में हालात बहुत खराब हो गए हैं। लगभग सभी हिस्सों में बमबारी होने लगी है।