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हंगोली गांव में भी मलेरिया की दस्तक

Sat, 14 Sep 2013 12:26 AM IST
यमुनानगर
यमुनानगर Updated Sat, 14 Sep 2013 12:26 AM IST
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malaria captured hangoli
मुस्तफाबाद खंड के हंगोली गांव में एक महिला को मलेरिया होने की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के डाक्टरों की टीम ने गांव में पहुंचकर बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं।
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बुखार से पीड़ित यह महिला दो दिन पहले मुस्तफाबाद के स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए आई थी। डाक्टर ने ब्लड सैंपल लेकर लैबोरेटरी से जांच करवाई, जिसमें मलेरिया होने की पुष्टि हुई है।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और महिला के परिवार के अन्य सदस्यों के खून के नमूने लिए। इसके अलावा गांव के अन्य लोगों के भी खून के नमूने लिए गए हैं। मलेरिया पीड़ित महिला का डाक्टरों की देखरेख में इलाज आरंभ कर दिया गया है।
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अब तक 1204 को मलेरिया
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में इस वर्ष अब तक मलेरिया के 1204 कन्फर्म केस सामने आ चुके हैं। सबसे अधिक 340 केस खिजराबाद क्षेत्र के हैं, जबकि नाहरपुर में 210 व्यक्तियों को मलेरिया हुआ है। इसके अलावा रादौर में 153, साढौरा में 110, बिलासपुर में 40, ईएसआई में 40, यमुनानगर सिविल अस्पताल में 20, ट्रामा सेंटर में 6, सिविल अस्पताल जगाधरी में 32 और अर्बन हेल्थ सेंटर में 40 मलेरिया के केस सामने आए हैं।

गंदगी में पनपता है मलेरिया का मच्छर
मलेरिया का मुख्य कारण गंदे पानी का जमाव है, जहां मलेरिया फैलाने वाले मच्छर एनाफिलीज पनपते हैं। शहरी क्षेत्र के अधिकतर इलाकों में इन दिनों सफाई व्यवस्था चरमराई है। मच्छरों के काटने से बड़ी संख्या में लोग बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। पर्याप्त जानकारी और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण मरीज प्राइवेट डाक्टरों और झोलाझाप डाक्टरों से इलाज करवा रहे हैं। सही इलाज न होने पर मरीज की जान भी जा सकती है।


जानलेवा हो सकता है पीएफ श्रेणी का मलेरिया
मलेरिया कीे दो श्रेणियां हैं। मलेरिया पीवी और पीएफ। पीवी में मौत की संभावना काफी कम होती है, जबकि पीएफ केस में मरीज की मौत भी हो सकती है। पीएफ श्रेणी में बुखार सिर पर चढ़ जाता है। यदि रोगी का समय पर इलाज न हो तो उसकी मौत हो सकती है। दोनों ही श्रेणियों के मलेरिया की सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त दवा दी जाती है।


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